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जस्टिस सूर्यकांत की एक और टिप्पणी पर कोहराम, पूर्व IAS और वकीलों ने लिखी खुली चिट्ठी

CJI Suryakant Comment Controversy: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी पर देश में विवाद खड़ा हो गया है. विकास परियोजनाओं को रोकने वाली याचिकाओं पर की गई उनकी टिप्पणी के विरोध में पूर्व नौकरशाहों, 600 से अधिक नागरिकों और वकीलों ने खुली चिट्ठी लिखकर आपत्ति जताई है. जानिए क्या है पूरा मामला.

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CJI Suryakant Comment Controversy: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर कानूनी और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा विकास परियोजनाओं में बाधा डालने वाली याचिकाओं की आलोचना किए जाने के बाद पूर्व नौकरशाहों, वकीलों, पर्यावरणविदों और नागरिक समाज के समूहों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है. इस मामले में प्रधान न्यायाधीश को अलग-अलग समूहों द्वारा खुली चिट्ठी लिखकर इस टिप्पणी पर गंभीर चिंता जताई गई है.

क्या है पूरा मामला और CJI ने क्या कहा था?

दरअसल, यह पूरा विवाद करीब 15 दिन पुराना है. 11 मई को सुप्रीम कोर्ट में CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ गुजरात के पिपावाव बंदरगाह के विस्तार को मिली पर्यावरण मंजूरी के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान देश में विकास परियोजनाओं को अदालतों में चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर पीठ ने नाराजगी जताई.

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CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा, “हमें इस देश में एक भी ऐसी परियोजना दिखाएं, जहां इन तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा हो कि हम इसका स्वागत करते हैं.” पीठ ने आगे कहा, “आप हर चीज को अदालत में घसीट लाते हैं. इस देश में जिस तरह की याचिकाएं दायर की जा रही हैं, उनका मकसद सिर्फ विकास को रोकना है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश कैसे आगे बढ़ेगा?”

पूर्व सिविल सेवकों और वकीलों ने क्यों जताई आपत्ति?

CJI की इन टिप्पणियों के विरोध में पूर्व नौकरशाहों के मंच ‘कॉन्स्टिट्यूशन कंडक्ट ग्रुप’ के 71 सदस्यों ने एक खुली चिट्ठी लिखी है. उनका कहना है कि देश के सबसे बड़े न्यायालय की ऐसी टिप्पणियों से पर्यावरण संरक्षण के सुरक्षा उपाय कमजोर हो सकते हैं और निचली अदालतें भी पर्यावरण के मामलों के प्रति ऐसा ही रुख अपना सकती हैं. चिट्ठी में यह भी कहा गया कि पर्यावरण मंत्रालय के ज्यादातर विशेषज्ञ निकाय केवल सरकारी अधिकारियों से भरे होते हैं और वे रबर स्टैंप की तरह काम करते हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इन पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए.

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इसके अलावा, देश के 600 से ज्यादा नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और 72 वकीलों व कानून के छात्रों ने भी अलग से पत्र लिखकर इन टिप्पणियों को वापस लेने की मांग की है. उनका तर्क है कि ऐसी टिप्पणियों से पर्यावरण की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले जागरूक नागरिकों को संदिग्ध श्रेणी में खड़ा किए जाने का खतरा पैदा हो गया है.

First published on: May 26, 2026 09:26 AM

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About the Author

Vijay Jain

सीनियर न्यूज एडिटर विजय जैन को पत्रकारिता में 23 साल से अधिक का अनुभव है.  न्यूज 24 से पहले विजय दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अलग-अलग जगहों पर रिपोर्टिंग और टीम लीड कर चुके हैं, हर बीट की गहरी समझ है। खासकर शहर राज्यों की खबरें, देश विदेश, यूटिलिटी और राजनीति के साथ करेंट अफेयर्स और मनोरंजन बीट पर मजबूत पकड़ है. नोएडा के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, गोरखपुर, जयपुर, चंडीगढ़, पंचकूला, पटियाला और जालंधर में काम कर चुके हैं इसलिए वहां के कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत आदि की समझ रखते हैं. प्रिंट के कार्यकाल के दौरान इन्हें कई मीडिया अवार्ड और डिजिटल मीडिया में दो नेशनल अवार्ड भी मिले हैं. शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Vijay.kumar@bagconvergence.in

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