उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है. अब एक फिर मॉनसून अपनी रफ्तार वापस पकड़ सकता है. प्रशांत महासागर में बनी एक हलचल बंगाल की खाड़ी तक जा पहुंची है और ये हवा को तेजी से ऊपर की ओर धकेल रही है और घने बादल बन रह हैं, जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि फिर एक बार बारिश होने वाली है. अनुमान है कि ये सिस्टम अगले 2-3 दिनों में ओडिशा और पश्चिम बंगाल की तरफ रुख करेगा. इससे पूर्वी भारत में बारिश में इजाफा होगा और अगले कुछ हफ्तों में इसका असर मध्य और उत्तर भारत तक भी पहुंच सकता है.
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धीमा पड़ा मॉनसून
जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं उनसे पता चलता है कि भारी मात्रा में बादल बन रहे हैं, जिससे मॉनसून पर लगा ब्रेक खत्म होने की उम्मीद है. इससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात है सिस्टम की टाइमिंग, क्योंकि भारत को मॉनसून की कमी का सामना करना पड़ रहा है. जुलाई महीने की शुरुआत तो अच्छी हुई, कई इलाकों में ज़ोरदार बारिश हुई, लेकिन उसके बाद मौसम की रफ्तार धीमी पड़ गई. इसी वजह से सूरज की तपिश बढ़ने लगी और उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया. सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, खेती पर इसका बुरा असर पड़ा है. खरीफ की फसलों की बुआई धीमी हो गई है.
अल नीनो ने बढ़ाई मुसीबत
पिछले साल के इसी टाइम की तुलना में ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर का तापमान काफी बढ़ा है. इससे इस बात के नए सबूत मिलते हैं कि अल नीनो के असर के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलवायु क्षेत्रों में से एक में गर्मी बढ़ रही है. अमेरिकी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के समुद्र की सतह के तापमान के रोज़ाना के आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 में ‘नीनो 3.4’ इलाके का तापमान बढ़ गया. ये मध्य प्रशांत महासागर का एक खास हिस्सा है जिसका इस्तेमाल वैज्ञानिक ग्लोबल अल नीनो और ला नीना जलवायु पैटर्न पर नज़र रखने के लिए करते हैं.
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उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है. अब एक फिर मॉनसून अपनी रफ्तार वापस पकड़ सकता है. प्रशांत महासागर में बनी एक हलचल बंगाल की खाड़ी तक जा पहुंची है और ये हवा को तेजी से ऊपर की ओर धकेल रही है और घने बादल बन रह हैं, जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि फिर एक बार बारिश होने वाली है. अनुमान है कि ये सिस्टम अगले 2-3 दिनों में ओडिशा और पश्चिम बंगाल की तरफ रुख करेगा. इससे पूर्वी भारत में बारिश में इजाफा होगा और अगले कुछ हफ्तों में इसका असर मध्य और उत्तर भारत तक भी पहुंच सकता है.
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धीमा पड़ा मॉनसून
जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं उनसे पता चलता है कि भारी मात्रा में बादल बन रहे हैं, जिससे मॉनसून पर लगा ब्रेक खत्म होने की उम्मीद है. इससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात है सिस्टम की टाइमिंग, क्योंकि भारत को मॉनसून की कमी का सामना करना पड़ रहा है. जुलाई महीने की शुरुआत तो अच्छी हुई, कई इलाकों में ज़ोरदार बारिश हुई, लेकिन उसके बाद मौसम की रफ्तार धीमी पड़ गई. इसी वजह से सूरज की तपिश बढ़ने लगी और उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया. सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, खेती पर इसका बुरा असर पड़ा है. खरीफ की फसलों की बुआई धीमी हो गई है.
अल नीनो ने बढ़ाई मुसीबत
पिछले साल के इसी टाइम की तुलना में ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर का तापमान काफी बढ़ा है. इससे इस बात के नए सबूत मिलते हैं कि अल नीनो के असर के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलवायु क्षेत्रों में से एक में गर्मी बढ़ रही है. अमेरिकी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के समुद्र की सतह के तापमान के रोज़ाना के आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 में ‘नीनो 3.4’ इलाके का तापमान बढ़ गया. ये मध्य प्रशांत महासागर का एक खास हिस्सा है जिसका इस्तेमाल वैज्ञानिक ग्लोबल अल नीनो और ला नीना जलवायु पैटर्न पर नज़र रखने के लिए करते हैं.
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