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आसमान से 24 घंटे दुश्मन पर रखेगा नजर, चीन-पाक बॉर्डर की निगरानी के लिए आ रहा 15,000 करोड़ का स्वदेशी एयरशिप

चीन ने पहले से ही मानव रहित एयरशिप पर काम करना शुरू कर दिया है और बहुत जल्द इसे भारत की सीमा पर तैनात भी कर सकता है.

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मिडिल ईस्ट की लड़ाई को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय लगातार अपनी तीनों सेना की ताकत में इजाफा कर रहा है. इसी कड़ी में 15,000 करोड़ के स्वदेशी स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप बनाने की तैयारी चल रही है. यह एयरशिप अनमैनेड यानी मानव रहित होगी जो जमीन से 20 किलोमीटर से 30 किलोमीटर की स्ट्रैटोस्फियर पर तैनात किए जाएंगे. चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर रहेगी. इसका मुख्य काम लंबे समय तक निगरानी, इंटिलिजेंस जुटाने और टेलकॉम टेक्नोलॉजी को मजबूत करना होगा.

क्या हैं इसकी खासियत

सैटेलाइट की तरह घूमने के बजाए यह आसमान में एक ही जगह तैनात होकर दुश्मन की सभी गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रख सकता है. स्वदेशी स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप को मुख्य तौर पर IAC और LOC पर तैनात किया जाएगा, क्योंकि इन इलाकों से खतरा हमेशा बरकरार रहता है. इन एयरशिप में ऑप्टिकल कैमरे, रडार और मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगाए जाएंगे, जो जमीनी नेटवर्क को सैटेलाइट से जोड़ने का भी काम करेंगे.

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भारतीय रक्षा मंत्रालय इसे मेक-I प्रक्रिया के तहत बनाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें 70 फीसदी लागत की खर्च कर रहा है. बचे हुए 30 फीसदी निजी कंपनी खर्च करेगी. DRDO ने मध्य प्रदेश के श्योपुर में 17 किलोमीटर की ऊंचाई तक इस एयरशिप का सफल परीक्षण कर लिया है.

डीआरडीओ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में इंडियन एयरफोर्स एक ऐसा एयरशिप डेवलप कराना चाहती है जो सौर ऊर्जा की मदद से लंबे समय तक हवा में रखा जा सके इस टेक्निक पर काम चल रहा है.

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चीन-पाक पर नजर

सूत्रों का यह भी कहना है कि स्वदेशी स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप का सबसे बड़ा फायदा इसे बनाने में कम पैसों का खर्च होना है. क्योंकि सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट की जरूरत पड़ती है. इस एयरशिप को जमीन से ही उड़ाया जा सकता है. और जब इसे जमीन पर लाना है तो बेहद ही आसान तरीके से जमीन पर लाकर इसका मेंटेनेंस करके दोबारा इसे मिशन पर भेजा जा सकता है.

बता दें, चीन ने पहले से ही मानव रहित एयरशिप पर काम करना शुरू कर दिया है और बहुत जल्द इसे भारत की सीमा पर तैनात भी कर सकता है. इस वजह से भारतीय रक्षा मंत्रालय का यह वारशिप चीन को जवाब देने के लिये बेहद कारगर साबित होगा.

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First published on: Jul 14, 2026 10:11 PM

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