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12 Feb Bharat Bandh: क्‍यों हो रहा है आज भारत बंद, क्‍या हैं यून‍ियनों की मांगे?

Bharat Band Reason: आज गुरुवार को होने वाले भारत बंद और राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पीछे कई गंभीर मुद्दे और मांगें हैं. आइये जानते हैं क‍ि यून‍ियनों की क्‍या मांगे हैं और क‍िस वजह से कल चक्‍का जाम कर रहे हैं.

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Written By: Vandana Bharti Updated: Feb 12, 2026 07:34
12 फरवरी को भारत बंद क्‍यों है

12 Feb Bharat Bandh: आज 12 फरवरी 2026 को 10 बड़े यून‍ियनों की हड़ताल है. ये स्‍ट्राइक देशभर में हो रही है. लेक‍िन ज्‍यादातर लोगों को यह कंफ्यूजन है क‍ि हड़ताल क्‍यों हो रही है और इससे क्‍या-क्‍या प्रभाव‍ित होगा. दरअसल, आज हो रहे भारत बंद और राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पीछे कई गंभीर मुद्दे और मांगें हैं. यह मुख्य रूप से 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के साझा मंच ने बुलाया है. यूनियनों का दावा है कि इस आंदोलन में लगभग 30 करोड़ मजदूर और किसान हिस्सा ले रहे हैं.

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क्‍यों हो रही है हड़ताल?

नए लेबर कोड (Labor Codes) का विरोध
ट्रेड यूनियनों का सबसे बड़ा विरोध केंद्र सरकार के 4 नए लेबर कोड को लेकर है, जिन्होंने पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह ली है. यूनियनों का आरोप है कि ये नए नियम हायर एंड फायर (आसानी से नौकरी से निकालना) को बढ़ावा देते हैं, जिससे मजदूरों की जॉब सिक्योरिटी कम होगी. उनका कहना है कि ये कोड हड़ताल करने के अधिकार और सामूहिक सौदेबाजी (Collective Bargaining) की शक्ति को कमजोर करते हैं.

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal)
किसान संगठन विशेष रूप से प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं. संयुक्त किसान मोर्चा का मानना है कि यह समझौता भारतीय कृषि को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के सामने समर्पण करने जैसा है. किसानों को डर है कि इससे अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद भारत आएंगे, जिससे स्थानीय किसानों की कमाई पर बुरा असर पड़ेगा.

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ग्रामीण रोजगार (MGNREGA) और विकसित भारत मिशन
यूनियनों की मांग है कि विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को रद्द कर पुराने मनरेगा (MGNREGA) को फिर से मजबूती से लागू किया जाए. उनका आरोप है कि नए मिशन से ग्रामीण रोजगार की गारंटी और सुरक्षा कम हो गई है.

निजीकरण और अन्य मांगें
बैंक, बीमा और सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों के विनिवेश (Disinvestment) और निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की जा रही है. इसके अलावा बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में 5 दिन काम (शनिवार की छुट्टी) की मांग कर रहे हैं. वहीं बिजली संशोधन विधेयक और बीज विधेयक (Seed Bill) को वापस लेने की भी मांग की गई है.

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First published on: Feb 11, 2026 05:17 PM

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