संसद में परिसीमन और संबंधित संविधान संशोधन प्रस्तावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि परिसीमन बिल को लेकर सरकार की पूरी रणनीति संसद में विफल हो चुकी है. विपक्ष की मजबूत घेराबंदी के चलते सरकार इस पर आम सहमति बनाने में नाकाम रही है. विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक सभी राज्यों के हितों और चिंताओं को ध्यान में रखकर बातचीत नहीं होगी, वे इस पर अपना विरोध जारी रखेंगे.
इंस्टाग्राम पर PM मोदी का नया वीडियो, मोर को दाना गायों को चारा खिलाते दिखे, स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले किया कैप्चर
‘संघीय ढांचे और राज्यों के हितों की अनदेखी’
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार बिना व्यापक विचार-विमर्श और सहमति के परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थी. उन्होंने आरोप लगाया कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का नया गणित तय करने से उन राज्यों के साथ नाइंसाफी होगी जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरीन काम किया है, विशेष रूप से दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्य. विपक्ष का साफ रुख है कि राज्यों के प्रतिनिधित्व के साथ किसी भी तरह का असंतुलन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
विपक्ष की एकजुटता से बैकफुट पर सरकार
कांग्रेस महासचिव के मुताबिक, संविधान संशोधन जैसे बड़े फैसलों के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत और विपक्षी दलों का विश्वास जुटाने में सरकार पूरी तरह असफल रही है. विपक्षी दलों के कड़े तेवर और एकजुट विरोध के कारण सदन में सरकार की योजना आगे नहीं बढ़ सकी. उन्होंने यह भी दोहराया कि कांग्रेस महिला आरक्षण को बिना परिसीमन से उलझाए मौजूदा लोकसभा सीटों के दायरे में ही तुरंत लागू करने के पक्ष में है.
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस गतिरोध को खत्म करने के लिए विपक्षी दलों के साथ क्या रास्ता निकालती है. अधिक आधिकारिक जानकारी और संसदीय कार्यसूची के लिए संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर विवरण देखा जा सकता है.
राष्ट्रगान विवाद में कांग्रेस का पलटवार, संदीप दीक्षित ने अमित मालवीय को भेजा लीगल नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला?