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हेल्थ

नींद में सपना देखते ही चलने लगते हैं हाथ-पैर? इसे नॉर्मल समझकर न करें नजरअंदाज

Sleep Problem: अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि जब वो रहे होते हैं, जब सपने देखते वक्त उनका शरीर हाथ-पैर चलाने लगता है. ऐसा क्यों होता है, क्या यह कोई बीमारी है, आइए जानते हैं.

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Edited By : Azhar Naim Updated: Mar 14, 2026 09:59
Sleep Disorder Symptoms
सोते वक्त हाथ-पैरों का चलना.

नींद का समय शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. इस दौरान सपने आना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कुछ लोगों के साथ ऐसा होता है कि सपना देखते समय उनका शरीर भी प्रतिक्रिया देने लगता है. कई बार व्यक्ति नींद में बात करने लगता है, हाथ-पैर हिलाने लगता है या अचानक घबराकर उठ बैठता है. परिवार के लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना किसी नींद से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. इसलिए इस स्टोरी में हम आपको इस समस्या के बारे में बताएंगे.

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क्या है कहते हैं इस समस्या को?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस समस्या को REM Sleep Behavior Disorder (RBD) कहते हैं. इस स्थिति में व्यक्ति अपने सपनों के मुताबिक शारीरिक हरकतें करने लगता है, सामान्य तौर पर जब हम गहरी नींद के REM चरण में होते हैं, तब दिमाग मांसपेशियों को कुछ समय के लिए शांत कर देता है ताकि शरीर सपनों के अनुसार प्रतिक्रिया न करे. लेकिन RBD में यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती, यही कारण है कि कुछ लोग नींद में हाथ-पैर मारते हैं या अचानक चिल्ला भी सकते हैं. यह स्थिति कभी-कभी खतरनाक भी हो सकती है क्योंकि इससे चोट लगने का खतरा रहता है.

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कब आते हैं ज्यादा सपने और क्यों दिखते हैं ऐसे लक्षण?

नींद कई चरणों में पूरी होती है और REM स्टेज उनमें सबसे अहम मानी जाती है. इसी समय दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है और ज्यादातर सपने आते हैं. आमतौर पर इस दौरान शरीर शांत रहता है, लेकिन RBD के मामलों में यह सुरक्षा प्रक्रिया काम नहीं करती. ऐसे में व्यक्ति सपने में जो देखता है, वैसी ही हरकत करने लगता है, जैसे भागने का सपना आए तो हाथ-पैर चलाने लगता है या डरावना सपना आने पर जोर से बोल सकता है. अगर किसी को यह समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है.

किन लोगों में ज्यादा खतरा?

रिसर्च के अनुसार यह समस्या 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों, खासकर पुरुषों में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है. कुछ मामलों में यह पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का शुरुआती संकेत भी बन सकती है. डॉक्टर इसकी जांच के लिए स्लीप स्टडी टेस्ट करवाते हैं, जिसमें रात के दौरान शरीर की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है, ताकि उसके मुताबिक इलाज अपनाया जा सके.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Mar 14, 2026 09:59 AM

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