Kidney Disease Symptoms: मरीजों में अक्सर ही किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है लेकिन मरीजों को इस बात का अंदेशा ही नहीं होता है. शुरुआत आम दिक्कतों से होती है, जैसे बहुत ज्यादा थकान, पैरों में सूजन या फिर बेहोशी छाना. लगता है जैसे यह सब लंबे समय तक रहने वाली थकान की वजह से है. लेकिन, जब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं तो पता चलता है असल में किडनी खराब हो चुकी है और क्रिएटिनिन गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है. ऐसे में AIIMS, नई दिल्ली के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप महाजन से जानिए किडनी फेलियर होने से पहले शरीर में कैसे चेतावनी संकेत दिखते हैं और किस तरह इन संकेतों को पहचाना जा सकता है.
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क्या है किडनी फेलियर
हमारे देश में हर 10 में से एक व्यक्ति को किडनी की परेशानी है और ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्हें किडनी की परेशानी हो रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि क्रोनिक किडनी डिजीज एक साइलेंट या धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है और इसके लक्षण (Kidney Disease Symptoms) बहुत जल्दी नहीं आते हैं. जबतक इस बीमारी के लक्षण नजर आते हैं तबतक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है. ऐसे में डॉ. संदीप महाजन का कहना है कि किडनी फेलियर को समझना जरूरी है.
किडनी एक व्यस्त ऑर्गन है. यह दिनभर में लगभग 200 लीटर खून की सफाई करता है, शरीर से वेस्ट प्रोडक्ट बाहर निकालने के अलावा यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है, पानी की सही मात्रा बनाए रखता है और इलेक्ट्रोलाइट्स को ठीक रखता है. इसके अलावा, किडनी ऐसे कई हार्मोन बनाता है जो शरीर में RBC यानी रेड ब्लड सेल्स की मात्रा और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. जब किडनी की क्षमता कम होने लगती है तो शरीर इसे कई समय तक संभालने की कोशिश करता है और कई सालों तक कोई संकेत नहीं आते हैं. लेकिन, जब लक्षण दिखाई देने लगते हैं तब किडनी के काम करने की क्षमता 30% से 40% तक ही रहती है.
किडनी की बीमारी कौन-कौन सी है
किडनी की बीमारी को eGFR के आधार पर 5 स्टेज में बांटा जाता है-
- स्टेज 1 और स्टेज 2 में किडनी डैमेज तो होती है लेकिन कोई संकेत नहीं होते.
- स्टेज 3 में जब किडनी की क्षमता 40% से कम होती है तो ब्लड टेस्ट में दिक्कतें और कुछ मामूली संकेत दिखने लगते हैं.
- स्टेज 4 ऐसी स्थिति है जिसमें किडनी की क्षमता 30% या उससे कम होने पर तुंरत इलाज की जरूरत होती है.
- स्टेज 5 में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है.
इन चेतावनी संकेतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज
- हाल ही में ब्लड प्रेशर का हाई होना या ऐसा ब्लड प्रेशर जो पहले दवाओं के साथ कंट्रोल्ड था लेकिन अब काबू में नहीं आ रहा
- पेशाब में झाग आना, खून आना (Blood In Urine), पेशाब की मात्रा कम होना, बार-बार रात में पेशाब आना
- पैरों और आंखों के आस-पास सूजन दिखाई देना.
डॉक्टर बताते हैं कि बीमारी के बढ़ने के साथ-साथ कई और लक्षण स्पष्ट हो जाते हैं, जैसे लगातार थकान रहना जो आराम करने पर ठीक नहीं होता, जी मिचलाना या भूख ना लगना, मुंह में धातु का स्वाद आना, त्वचा का पीला पड़ना, रूखी त्वचा और बहुत रूखापन होना या लगातार खुजली होना. इनमें से अगर कोई भी लक्षण दिखे तो जांच करवाना जरूरी है.
किडनी की जांच करवाना है जरूरी
सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट, एस्टिमेटेड GFR और यूरिन प्रोटीन टेस्ट ये जांच सस्ती हैं और आसानी से उपलब्ध हैं. ये जांच अगर समय रहते करवा ली जाएं तो जीवन बदल सकती हैं.
कब बढ़ता है किडनी रोग का खतरा
ऐसी कुछ स्थितियां हैं जिनमें किडनी रोग (Kidney Disease) का खतरा बढ़ जाता है जैसे डायबिटीज. डायबिटीज दुनियाभर में किडनी फेलियर का सबसे मुख्य कारण है. लगातार ब्लड प्रेशर का ज्यादा रहना, परिवार में किसी को किडनी की बीमारी होना, बार-बार किडनी स्टोन होना, बार-बार यूरिन इंफेक्शन होना या बार-बार किडनी की दिक्कतें होना किडनी रोग का खतरा बढ़ा सकता है. इसके अलावा, लगातार पेनकिलर खाना या किडनी को नुकसान पहुंचा सकने वाली दवाएं ज्यादा लेना किडनी की दिक्कतों को बढ़ा सकता है. इन दिक्कतों से जूझ रहे लोगों को हर साल किडनी की जांच करवाना बेहद जरूरी है.
डॉक्टर कहते हैं कि अगर किडनी की बीमारी समय रहते पकड़ी जाए तो उसे अच्छे से मैनेज किया जा सकता है. लेकिन, अगर यह स्टेज 4 या 5 में पकड़ी जाती है तो इलाज के विकल्प कम हो जाते हैं.
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