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आंखों पर दबाव और सिर के दर्द को कम करेगा यह 20-20-20 रूल, जानिए यह क्या है और कैसे करता है काम

20-20-20 Rule Meaning: आंखों पर बहुत ज्यादा जोर देकर कुछ पढ़ने या स्क्रीन के सामने बैठे रहने से आंखों पर जोर पड़ता है और सिर में दर्द होता है सो अलग. ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन से जानिए आंखों की देखरेख के लिए कैसे आजमाते हैं 20-20-20 रूल.

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What Is 20-20-20 Rule: एक समय था जब कहा जाता था कि टीवी के सामने बैठे मत रहो या देर तक पढ़ते मत रहो नहीं तो आंखों पर दबाव पड़ता है. लेकिन, आज के समय में चाहे काम हो या पढ़ाई दोनों ही फोन और कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने करने पड़ते हैं. खासतौर से नौकरीपेशा लोगों के लिए दिनभर में 8 से 9 घंटे लैपटॉप की स्क्रीन के सामने बैठना मजबूरी हो गई है. ऐसे में होता यह है कि इस स्क्रीन टाइम से आंखों पर स्ट्रेन (Eye Strain) बढ़ता है और सिर में दर्द होने लगता है. ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का बताया 20-20-20 रूल काम आ सकता है. जानिए क्या है यह रूल और किस तरह आप भी इसे आजमा सकते हैं.

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क्या है 20-20-20 रूल

20-20-20 रूल का मतलब है कि कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने 20 मिनट तक काम करने के बाद 20 फीट दूर रखे किसी सामान को 20 सेकंड तक देखना. इसे पॉइंट्स में इस तरह समझा जा सकता है –

  • काम करने के 20 मिनट बाद ब्रेक लें
  • किसी चीज को देखें जो 20 फीट दूर है
  • ऐसा करते रहें 20 सेकंड तक

इस तरह 20-20-20 रूल आजमाया जा सकता है. इस 20-20-20 रूल से आंखों पर दबाव कम पड़ता है, आंखें ड्राई नहीं होती हैं और सिरदर्द होने की संभावना भी कम होने लगती है.

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आंखों पर दबाव कैसे पड़ता है

जब व्यक्ति बेहद पास से कुछ पढ़ता है, चाहे किताब से या कंप्यूटर की स्क्रीन से, तो दोनों आंखें पास के फोकस के लिए लेंस को रिशेप करती हैं. इस प्रोसेस को एकोमडेशन कहते हैं. लगातार पास से पढ़ने पर आंखें लगातार कॉन्ट्रैक्टेड रहती हैं. इसीलिए लंबे समय तक पढ़ने से जब आंखें उठाकर कोई दूर की चीज देखी जाती है तो धुंधला दिखने लगता है. ओर्बिकुलरीज और आईब्रो मसल्स आंखों के आस-पास सिंकड़ती हैं जिससे इन धुंधली चीजों को साफ देखा जा सके, इससे माथे और कनपट्टियों में दर्द होने लगता है और आंखें थकती हैं.

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इन तरीकों से भी पड़ सकता है आंखों को आराम

  • आंखों को आराम देने के लिए दूर तक देखा जा सकता है. आंखों को बिना सिंकुड़े और फोकस की कोशिश किए बिना ऐसा करने से आंखों को आराम मिलता है.
  • खुद से 10 बार धीरे-धीरे आंखों को झपकाएं. याद रहे कि आपको तेज-तेज नहीं झपकाना है. आंखें तेज झपकाने से दिक्कत बढ़ सकती है.
  • हर 30 सेकंड में अपनी आंखों को कुछ सेकंड के लिए बंद कर लें. इससे आंखों को आराम महसूस हो सकता है.
  • किसी कपड़े पर फूंक मारकर आंखों पर सिकाई की जा सकती है. इससे आंखों को गर्माहट महसूस होती है.
  • हल्के गर्म पानी में कपड़ा भिगोकर और निचोड़कर भी आंखों पर लगाया जा सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - WHO 

First published on: Sep 15, 2026 02:57 PM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती है. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं. अनुभव - 7 साल शिक्षा - जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पिछला अनुभव - NDTV, दिल्ली प्रेस, डायमंड पब्लिशिंग हाउस

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