Ovarian Cancer Symptoms: अंडाशय का कैंसर या ओवेरियन कैंसर तब होता है जब ओवरी, फेलोपियम ट्यूब या पेरिटोनियम में एब्नॉर्मल सेल्स बढ़ने लगती हैं और फैलना शुरू कर देती हैं जिससे ट्यूमर बन जाता है. इस कैंसर को अक्सर ही पहचानना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती स्टेज में नहीं दिखते हैं और दिक्कत बढ़ने पर या बाद की स्टेज में नजर आते हैं. ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण साइलेंट हो सकते हैं और आम दिक्कतों जैसे नजर आ सकते हैं. ऐसे में समय रहते इस कैंसर के लक्षणों को पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है.
यह भी पढ़ें - मुंह का कैंसर होने पर जीभ पर दिखते हैं ऐसे निशान, जानिए Oral Cancer की पहली, दूसरी, तीसरी और आखिरी स्टेज के लक्षण
ओवेरियन कैंसर के साइलेंट लक्षण
ओवेरियन कैंसर अन्य कैंसर की तरह रिएक्ट नहीं करता है और इसीलिए इसके लक्षण बेहद अलग से नजर आते हैं. ओवेरियन कैंसर में दिखने वाले लक्षण ज्यादातर आम दिक्कतों जैसे नजर आते हैं. ब्लोटिंग, पेल्विक फ्लोर का भारीपन, थोड़ा सा खाते ही पेट भर जाना, बाउल मूवमेंट्स में बदलाव आना, बिना कारण वजन कम होना और पेशाब से जुड़ी दिक्कतें होना ओवेरियन कैंसर के लक्षणों में शामिल है.
ओवेरियन कैंसर को लेकर बड़ी चिंता
जबतक महिलाएं डॉक्टर के पास जांच के लिए जाती हैं तबतक वह ओवेरियन कैंसर की स्टेज 3 या 4 तक पहुंच चुकी होती हैं. इस स्टेज में ओवेरियन कैंसर का 5 साल का सर्वाइल रेट 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है.
ओवेरियन कैंसर में इलाज कैसे होता है
ओवेरियन कैंसर का पता लगने के बाद सर्जरी की जा सकती है. इसके अलावा, अगर शुरुआती स्टेज में ओवेरियन कैंसर का पता चल जाए तो गर्भाशय और एक ओवरी को छोड़ दिया जाता है ताकि भविष्य में गर्भवती हुआ जा सके. एडवांस स्टेज में कैंसर का पता चलता है तो जितने हिस्से तक कैंसर फैला है उतने हिस्से को निकाल दिया जाता है और पूरी तरह ट्यूमर को बाहर कर दिया जाता है.
कीमोथेरैपी, टार्गेटेड थेरैपी और हार्मोन थेरैपी की मदद से ओवेरियन कैंसर का इलाज किया जाता है. अगर कैंसर एकबार फिर हो जाता है तो कीमोथेरैपी को दोहराया जाता है.
ओवेरियन कैंसर होने के कारण
जेनेटिक्स म्यूटेशंस के कारण ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ता है. अगर कोई महिला कभी मां नहीं बनी है यानी कभी गर्भवती नहीं हुई है, किसी को अगर 12 साल की उम्र या उससे पहले पीरियड्स शुरू हुए हैं या फिर मेनोपॉज देरी से हुआ है तो ओवेरियन कैंसर हो सकता है. एंडोमेटरियोसिस की कंडीशन में और लाइफस्टाइल या हार्मोन्स की गड़बड़ी के कारण भी ओवेरियन कैंसर हो सकता है.
किस उम्र की महिलाओं को होता है ओवेरियन कैंसर
ज्यादातर 50 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का रिस्क देखा जाता है.
यह भी पढ़ें -लिवर सिरोसिस का पता कैसे चलता है? जानिए Liver Cirrhosis में कैसे लक्षण नजर आते हैं
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
Ovarian Cancer Symptoms: अंडाशय का कैंसर या ओवेरियन कैंसर तब होता है जब ओवरी, फेलोपियम ट्यूब या पेरिटोनियम में एब्नॉर्मल सेल्स बढ़ने लगती हैं और फैलना शुरू कर देती हैं जिससे ट्यूमर बन जाता है. इस कैंसर को अक्सर ही पहचानना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती स्टेज में नहीं दिखते हैं और दिक्कत बढ़ने पर या बाद की स्टेज में नजर आते हैं. ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण साइलेंट हो सकते हैं और आम दिक्कतों जैसे नजर आ सकते हैं. ऐसे में समय रहते इस कैंसर के लक्षणों को पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है.
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ओवेरियन कैंसर के साइलेंट लक्षण
ओवेरियन कैंसर अन्य कैंसर की तरह रिएक्ट नहीं करता है और इसीलिए इसके लक्षण बेहद अलग से नजर आते हैं. ओवेरियन कैंसर में दिखने वाले लक्षण ज्यादातर आम दिक्कतों जैसे नजर आते हैं. ब्लोटिंग, पेल्विक फ्लोर का भारीपन, थोड़ा सा खाते ही पेट भर जाना, बाउल मूवमेंट्स में बदलाव आना, बिना कारण वजन कम होना और पेशाब से जुड़ी दिक्कतें होना ओवेरियन कैंसर के लक्षणों में शामिल है.
ओवेरियन कैंसर को लेकर बड़ी चिंता
जबतक महिलाएं डॉक्टर के पास जांच के लिए जाती हैं तबतक वह ओवेरियन कैंसर की स्टेज 3 या 4 तक पहुंच चुकी होती हैं. इस स्टेज में ओवेरियन कैंसर का 5 साल का सर्वाइल रेट 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है.
ओवेरियन कैंसर में इलाज कैसे होता है
ओवेरियन कैंसर का पता लगने के बाद सर्जरी की जा सकती है. इसके अलावा, अगर शुरुआती स्टेज में ओवेरियन कैंसर का पता चल जाए तो गर्भाशय और एक ओवरी को छोड़ दिया जाता है ताकि भविष्य में गर्भवती हुआ जा सके. एडवांस स्टेज में कैंसर का पता चलता है तो जितने हिस्से तक कैंसर फैला है उतने हिस्से को निकाल दिया जाता है और पूरी तरह ट्यूमर को बाहर कर दिया जाता है.
कीमोथेरैपी, टार्गेटेड थेरैपी और हार्मोन थेरैपी की मदद से ओवेरियन कैंसर का इलाज किया जाता है. अगर कैंसर एकबार फिर हो जाता है तो कीमोथेरैपी को दोहराया जाता है.
ओवेरियन कैंसर होने के कारण
जेनेटिक्स म्यूटेशंस के कारण ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ता है. अगर कोई महिला कभी मां नहीं बनी है यानी कभी गर्भवती नहीं हुई है, किसी को अगर 12 साल की उम्र या उससे पहले पीरियड्स शुरू हुए हैं या फिर मेनोपॉज देरी से हुआ है तो ओवेरियन कैंसर हो सकता है. एंडोमेटरियोसिस की कंडीशन में और लाइफस्टाइल या हार्मोन्स की गड़बड़ी के कारण भी ओवेरियन कैंसर हो सकता है.
किस उम्र की महिलाओं को होता है ओवेरियन कैंसर
ज्यादातर 50 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का रिस्क देखा जाता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.