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ग्रामीण इलाकों हर 6 में से 1 किशोर है गंभीर तनाव में, AIIMS से लिंक्ड स्टडी ने बताई मेंटल हेल्थ बिगड़ने की बड़ी वजह

Mental Health: व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य दुरुस्त रहना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी मानसिक स्वास्थ्य का अच्छा रहना भी है. लेकिन, हालिया स्टडी में इस बात का जिक्र किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने लगा है.

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Mental Health Crises: मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने की बात होती है तो आमतौर पर शहरों का ही जिक्र होता है. लेकिन, AIIMS-लिंक्ड एक स्टडी में ग्रामीण इलाकों में युवाओं के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य का जिक्र किया गया है. इंडियन जर्नल ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन में छपी एक स्टडी के मुताबिक, हरियाणा के 28 गांवों में 583 किशोरों-युवाओं पर की गई स्टडी में सामने आया है कि किशोर (Teenagers) मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं और खराब होते मानसिक स्वास्थ्य से दोचार हो रहे हैं. रिसर्चर्स ने पाया कि ज्यादातर किशोरों ने अपने दुख, उम्मीद हारने और सुसाइडल ख्यालों को जिंदगी का हिस्सा समझ लिया है और उन्हें प्रोफेशनल मेंटल हेल्थेकेयर के बारे में पता ही नहीं है.

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बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी वजह

स्टडी में इस बात का जिक्र किया गया है कि पढ़ाई का प्रेशर युवाओं में चिंता का सबसे आम कारण है. फेलियर का डर, खराब मार्क्स और स्कूल से जुड़ा दबाव इमोशनल ब्रेकडाउन, स्कूल छोड़ने और सुसाइडल ख्यालों से जुड़ा हुआ है. वहीं, रिसर्च में कई किशोरों से बात की गई जिनमें एक किशोर का कहना था कि उसने अपने माता-पिता को खो दिया है और उसने अपनी जान लेने के बारे में सोचा लेकिन माता-पिता का नाम खराब ना हो इसीलिए कभी इस बारे में बात नहीं की. एक दूसरे किशोर ने घर में हाथ बंटाने के लिए स्कूल छोड़कर काम करना शुरू किया और वह अक्सर महसूस करता है कि काश वह जी ही ना रहा होता.

मेंटल हेल्थ ट्रिगर्स

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किशोरों में बुलिंग, सामाजिक निंदा और परिवार में हो रही हिंसा मेंटल हेल्थ ट्रिगर्स बताए गए. रिसर्चर्स ने बताया कि कैसे एक बच्चे ने स्कूल में खेलना छोड़ दिया क्योंकि उसके क्लासमेट्स उसे छोटी हाइट के लिए चिढ़ाते थे और दूसरे ने घर के झगड़ों और स्कूल में ह्यूमिलेशन के चलते खुद को चोट पहुंचाना शुरू कर दिया.

मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण

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रिसर्च ने पाया कि मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने और किशोरों के सुसाइड करने के मामले में परीक्षा से जुड़े तनाव, घर के झगड़ों, रैगिंग और मोबाइल फोन से जुड़ी रोक-टोक और इमोशनल डिस्ट्रेस से जुड़े हैं.

57 प्रतिशत प्रतिभोगियों ने बताया कि केयरगिवर्स के किसी तरह के सब्सटेंस जैसे एल्कोहल या तंबाकू लेने के चलते, मौखिक हिंसा, हिंसा और आर्थिक दिक्कतों के चलते भी तनाव का सामना करना पड़ते रहा है.

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खानपान को लेकर इन्सेक्योरिटी, बेरोजगारी और शिक्षा के अवसरों की कमी को भी किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह बताया गया.

क्या है हल

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रिसर्चर्स का मानना है कि टीनेजर्स को मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने के लिए मदद दी जानी चाहिए. टीचर्स की ट्रेनिंग होनी चाहिए और हेल्थ वर्कर्स या नर्स वगैरह को यह ट्रेनिंग देनी चाहिए कि वे मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के शुरुआती लक्षणों को पहचान सकें. अगर इन समस्याओं का निजात टीनेज में ना किया जाए तो यह जिंदगी भर साथ रह सकती हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Jun 02, 2026 11:52 AM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. दिल्ली प्रेस और डायमंड पब्लिशिंग हाउस के लिए मैग्जीन में काम करने के बाद NDTV में साढ़े तीन साल कार्यरत रहीं. लाइफस्टाइल और सेहत बीट में गहन रुचि और लगभग छह साल का अनुभव लेकर न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर लिख रही हैं.

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सीमा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. दिल्ली प्रेस और डायमंड पब्लिशिंग हाउस के लिए मैग्जीन में काम करने के बाद NDTV में साढ़े तीन साल कार्यरत रहीं. लाइफस्टाइल और सेहत बीट में गहन रुचि और लगभग छह साल का अनुभव लेकर न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर लिख रही हैं.

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