आग में कैसे घुटता है दम? सांसों के लिए धुआं कितना खतरनाक, दिल्ली मालवीय नगर में 21 मौतों का सच

Delhi Restaurant Fire: दिल्ली के मालवीय नगर के रेस्टॉरेंट में लगी आग ने 21 लोगों की जान ले ली है. इसपर एशियन हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. मानव मनचंदा ने बताया कि किस तरह आग का धुआं घातक साबित होता है.

Delhi Restaurant Fire

मालवीय नगर के रेस्टॉरेंट में लगी आग ने ली 21 लोगों की जान.

Delhi Fire News: दिल्ली के मालवीय नगर के रेस्टॉरेंट में लगी भीषण आग (Malviya Nagar Restaurant Fire) की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आग में लोगों की मौत आखिर सिर्फ जलने से होती है या धुएं से दम घुटने के कारण भी जान चली जाती है. इस हादसे में 21 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक आग एक रेस्टोरेंट और उससे जुड़े हिस्से में लगी जिसके बाद धुएं और लपटों ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया. राहत-बचाव टीमों ने दर्जनों लोगों को बाहर निकाला, लेकिन कई लोगों की जान नहीं बच सकी. इस विषय पर एशियन हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. मानव मनचंदा ने बताया है कि आग के धुएं (Fire Smoke) से किस तरह दम घुटता है और यह कितना खतरनाक होता है.

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आग के धुएं से कैसे घुटता है दम

विशेषज्ञ बताते हैं कि आग लगने की घटनाओं में अधिकतर मौतें सीधे जलने से नहीं बल्कि जहरीले धुएं और ऑक्सीजन की कमी के कारण होती हैं. जब किसी बंद इमारत में आग लगती है तो प्लास्टिक, फर्नीचर, रबड़, कपड़े और अन्य सिंथेटिक पदार्थ जलने लगते हैं. इससे कार्बन-मोनोऑक्साइड, सायनाइड और सूक्ष्म कणों वाला जहरीला धुआं पैदा होता है. यही धुआं कुछ ही मिनटों में सांस की नलियों और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

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डॉ. मानव मनचंदा बताते हैं कि आग के दौरान धुआं सबसे बड़ा किलर साबित होता है. कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है जिससे दिमाग और दिल तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. व्यक्ति को चक्कर, घबराहट, सांस लेने में दिक्कत और कुछ ही मिनटों में बेहोशी हो सकती है. कई मामलों में मरीज को पता भी नहीं चलता और दम घुटने से मौत हो जाती है.

बाद में भी दिखती हैं दिक्कतें

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डॉक्टरों के अनुसार धुएं का असर केवल उसी समय तक सीमित नहीं रहता. जो लोग आग से बच भी जाते हैं उनमें बाद में फेफड़ों की सूजन, सांस फूलना, खांसी, गले में जलन और संक्रमण जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं. अस्थमा, सीओपीडी या पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह खतरा और ज्यादा गंभीर हो जाता है.

डॉ. बताते हैं, घना धुआं फेफड़ों की अंदरूनी परत को जला सकता है. धुएं के महीन कण गहराई तक जाकर एयरवे को ब्लॉक करते हैं जिससे शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिलती. ऐसे मरीजों को कई बार ऑक्सीजन सपोर्ट या आईसीयू तक की जरूरत पड़ती है.

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आग लगने की स्थिति में क्या करना चाहिए

विशेषज्ञ आग लगने की स्थिति में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं. अगर कमरे या इमारत में धुआं भर जाए तो नीचे झुककर चलना चाहिए क्योंकि गर्म धुआं ऊपर की ओर जमा होता है. मुंह और नाक को गीले कपड़े से ढकना मददगार हो सकता है. लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द खुले स्थान तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए.

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दिल्ली के मालवीय नगर की यह त्रासदी केवल एक हादसा नहीं बल्कि चेतावनी भी है कि आग से सुरक्षा के नियम, इमरजेंसी एग्जिट और फायर सेफ्टी सिस्टम कितने जरूरी हैं, क्योंकि कई बार आग की लपटों से पहले धुआं ही सांसें छीन लेता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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