---विज्ञापन---

विदेशों में घरों की छतों पर क्यों नहीं होती पानी की टंकियां? चौंका देगी इसके पीछे की असली वजह

विदेशों में घरों की छतों से पानी की टंकियां गायब होने का यह राज आपको हैरान कर देगा. जानिए कैसे वहां का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बिना घरेलू टंकी के हर नल में पानी पहुंचाता है.

---विज्ञापन---

Water Tank Facts: भारत में घरों की छतों पर काली और नीली पानी की टंकियां दिखना एक बहुत ही आम बात है. हमारे देश में ज्यादातर लोग यही मानकर चलते हैं कि पूरी दुनिया में पानी की सप्लाई का यही एक इकलौता सिस्टम होगा. लेकिन अगर आप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप के देशों में जाएंगे, तो आपको वहां घरों की छतों पर कोई भी टंकी नजर नहीं आएगी. इसके बावजूद वहां के लोगों को चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के नलों में पानी मिलता रहता है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि बिना किसी स्टोरेज टैंक के वहां के बाथरूम, किचन और ऊपरी मंजिलों तक पानी कैसे पहुंचता है. इसका सीधा जवाब वहां के मजबूत बुनियादी ढांचे, पानी के लगातार प्रेशर और करीब सौ साल पुराने एक अलग वाटर सिस्टम में छिपा हुआ है.

भारत में क्यों जरूरी है छत की टंकी?

भारत के ज्यादातर शहरों में नगर निगम या सरकारी सप्लाई का पानी दिन में कुछ खास घंटों के लिए ही आता है. ऐसे में लगातार पानी की सप्लाई बनाए रखने के लिए लोग पहले जमीन के नीचे बने टैंक में पानी इकट्ठा करते हैं और फिर उसे पंप के जरिए छत की टंकी में चढ़ाते हैं. इसके बाद ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण के नियम से पानी खुद-ब-खुद नीचे की मंजिलों के नलों तक पहुंचता है. इसके विपरीत अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में पानी की सप्लाई के लिए जमीन के नीचे दबाव वाली यानी प्रेशराइज्ड पाइपलाइनों का एक जाल बिछा होता है. वहां बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से चौबीसों घंटे लगातार पानी की सप्लाई की जाती है. इस नेटवर्क का प्रेशर इतना ज्यादा मजबूत होता है कि पानी बिना किसी घरेलू मोटर या टंकी के सीधे घरों की ऊपरी मंजिलों तक पहुंच जाता है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: दुनिया का पहला समंदर पर तैरता शहर बसने को तैयार, जानें क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं?

पूरे इलाके के लिए बनते हैं बड़े वाटर टावर

एक आम धारणा यह भी है कि विदेशों में पानी को स्टोर करने का कोई सिस्टम ही नहीं होता है, जो कि बिल्कुल गलत है. असल में वहां हर एक घर की छत पर अलग से टंकी रखने के बजाय पूरे मोहल्ले या इलाके के लिए बड़े-बड़े सरकारी वाटर टावर बनाए जाते हैं. ये टावर पूरे क्षेत्र में पानी के प्रेशर को एक समान बनाए रखने और जरूरत के समय पानी की सप्लाई को जारी रखने का काम करते हैं. इसके अलावा मौसम भी इस वाटर सिस्टम को बनाने की एक बड़ी वजह रहा है. अमेरिका और कनाडा जैसे ठंडे देशों में सर्दियों के समय तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है. अगर वहां छतों पर खुली टंकियां रखी जाएं, तो पानी पूरी तरह जम जाएगा जिससे पाइपलाइन फट सकती है. इस समस्या से बचने के लिए वहां पूरा सिस्टम जमीन के नीचे ‘फ्रॉस्ट लाइन’ के नीचे बनाया जाता है.

---विज्ञापन---

सदियों पुराना है बुनियादी ढांचा

ज्यादातर पश्चिमी देशों ने 19वीं सदी में ही अपने शहरों में सेंट्रलाइज्ड वाटर सिस्टम पर बहुत बड़ा निवेश किया था. जैसे-जैसे उनके शहर बड़े होते गए, यह आधुनिक पाइपलाइन नेटवर्क वहां का स्टैंडर्ड बन गया और इसी वजह से वहां कभी घरेलू टंकियों की जरूरत महसूस ही नहीं हुई. भारत के अलावा मैक्सिको, मिस्र, ब्राजील और तुर्की जैसे देशों में भी छतों पर टंकियां रखने का चलन आज भी बहुत आम है, क्योंकि इन जगहों पर पानी का प्रेशर हमेशा एक जैसा नहीं रहता है. तकनीकी रूप से कोई भी एक सिस्टम दूसरे से बहुत बेहतर या खराब नहीं है. भारत का सिस्टम पानी की सीमित सप्लाई के बीच बैकअप देने के लिए सबसे व्यावहारिक है, जबकि विदेशों का सिस्टम उनके मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिका है. कुल मिलाकर दोनों ही व्यवस्थाएं स्थानीय चुनौतियों और मौसम को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं.

First published on: Jun 04, 2026 03:23 PM

End of Article

About the Author

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में तीन वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. राजा ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Zee Media के डिजिटल प्लेटफॉर्म India.Com हिंदी से की थी. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

Read More

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में तीन वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. राजा ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Zee Media के डिजिटल प्लेटफॉर्म India.Com हिंदी से की थी. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola