उल्टी सांस चलना क्या होता है? जानिए क्यों मौत से पहले आती हैं ऐसी खोखली सांसें

Death Rattle: कहते हैं व्यक्ति के आखिरी पलों में उसकी सांसों का पैटर्न बदल जाता है. ऐसा क्यों होता है और इस दौरान व्यक्ति के मुंह से घरघराहट की आवाज क्यों निकलती है, जानिए यहां.

reverse breathing

उल्टी सांसें चलने पर क्या होता है, जानिए यहां.

Reverse Breathing: मरने से पहले व्यक्ति की सांसों का पैटर्न बदल जाता है, इसे उल्टी सांस चलना या चेन-स्टोक्स ब्रीदिंग कहा जाता है. यह सांस लेने का एक असामान्य चक्र है जिसमें सांस गहरी और तेज चलने के बाद एकदम धीमी और खोखली सी हो जाती है और फिर रुक जाती है. जिस व्यक्ति के आखिरी पल करीब होते हैं उसकी सांसों का पैटर्न बदलने लगता है, कई बार व्यक्ति एकदम तेज सांस लेता है और उसकी सांसें फूलने लगती हैं. यह शरीर के शट डाउन होने का संकेत होता है. यहां जानिए व्यक्ति मृत्यु के करीब होता है तो सांस उल्टी चलने के साथ ही शरीर में और क्या-क्या बदलाव नजर आने लगते हैं.

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मृत्यु के करीब होने पर उल्टी सांसें

जो व्यक्ति मृत्यु के करीब होता है वह अचानक से तेज सांस अंदर लेता है और फिर सांस लेने की गति धीमी हो जाती है. इसके तुरंत बाद सांसें 10 से 30 सेकंड या एक मिनट तक रुक जाती हैं. इसके बाद फिर एकदम से घरघराहट की सी आवाज आती है और सांसें अनियमित होने लगती हैं. यह जीवन के अंतिम पड़ाव का संकेत हो सकता है.

मृत्यु से पहले आती है ऐसी आवाज

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व्यक्ति जब मौत के करीब होता है या कहें उसके अंतिम पल होते हैं उस समय उसके मुंह से एक गीली, गरारे जैसी या खर्राटे जैसी एक आवाज निकलती है जिसे डेथ रैटल (Death Rattle) कहते हैं. इस डेथ रैटल का मतलब है कि व्यक्ति अब कुछ भी निगल नहीं सकता है और उसके गले के क्लियर फ्लुइड्स उनके गले और श्वसन नली तक पहुंच रहे हैं. यह एक बड़ा संकेत है कि व्यक्ति अपनी आखिरी पलों में है.

क्या इससे दर्द होता है

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सांस उल्टी चलने या डेथ रैटल के दौरान मरीज के मुंह से निकल रही आवाजें सुनकर परिवार डर जाता है और उनका यही प्रश्न रहता है कि क्या इससे दर्द होता है या नहीं. लेकिन, डेथ रैटल में आमतौर पर दर्द महसूस नहीं होता है, डिस्कंफर्ट नहीं लगता है और चोकिंग नहीं होती है. इस दौरान व्यक्ति सचेत नहीं रहता है.

मृत्यु के अलावा भी आ सकती हैं ऐसी सांसे

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चेन स्टोक्स ब्रीदिंग की बात करें तो यह मृत्यु के अलावा भी कुछ स्थितियों में हो सकती है. किसी गंभीर या आपातकालीन स्थिति में भी व्यक्ति की सांसें उल्टी चल सकती हैं. स्ट्रोक, ब्रेन हैमरेज या एक्सीडेंट के बाद इस तरह सांस आ सकती है या सांसों का पैटर्न बदल सकता है. दिल के कमजोर होने पर खून को पंप करने में दिक्कत आती है या फिर फेफड़ों में पानी भरने पर पल्मोनरी एडिमा के कारण ऐसा हो सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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