टाइफाइड एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है. हर साल, बड़ी संख्या में लोग इस संक्रमण का शिकार होते हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह, दूषित पानी और संक्रमित खाना होता है. जो व्यक्ति इस संक्रमण का शिकार हो जाता है, उसे तेज बुखार, सिरदर्द, कंजोरी, भूख कम लगना, पेट की परेशानी, उल्टी, दस्त और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती है. हालांकि, वक्त रहते सही जांच और एंटीबायोटिक दवाओं की मदद से कुछ दिनों के अंदर मरीज को राहत मिलने लगती है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मरीज एकदम फिट हो गया, बल्कि ठीक होने के बाद मरीज के शरीर को कुछ चाहिए होता है, ताकि वह एक्टिव महसूस कर सके.
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बुखार खत्म होते ही क्या ठीक हो जाता है मरीज?
कई लोग टाइफाइड से ठीक होने के बाद तुरंत आपने कामों में लग जाते हैं, लेकिन ऐसा करना शरीर पर दबाव डालने जैसा हो सकता है. क्योंकि कुछ मामलों में बीमारी के लक्षण दोबारा लौट सकते हैं, जिसे रिलैप्स कहा जाता है. अगर इलाज पूरा होने के बाद फिर से बुखार, शरीर में दर्द, भूख कम लगना या पहले जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत आराम और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. इतना ही नहीं, खुद से दवा न लें, वहीं दवा खाएं, जो डॉक्टर आपको दोबारा बताए.
टाइफाइड के बाद शरीर को आखिर क्या चाहिए?
टाइफाइड शरीर की इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है. ऐसे में भले ही बीमारी ठीक हो जाए, लेकिन कुछ समय तक जल्दी थकान महसूस होना सामान्य है. इसलिए शरीर को धीरे-धीरे रिकवरी का मौका देना चाहिए न कि, तुरंत भारी एक्सरसाइज, ज्यादा मेहनत या लंबे समय तक काम करें. रिकवरी के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
- पर्याप्त नींद और आराम लें
- रोजमर्रा के काम धीरे-धीरे बढ़ाएं
- शरीर की कमजोरी को नजरअंदाज न करें
- ज्यादा थकान होने पर डॉक्टर से सलाह लें
खाना-पानी और दवाओं का रखें ख्याल
आराम के अलावा शरीर को पौष्टिक तत्वों की काफी जरूरत होती है, इसलिए अपने खानपान पर खास ध्यान दें. जल्दी रिकवरी के लिए आसानी से पचने वाला और पौष्टिक भोजन खांए, इससे खाना जल्दी पचता है और शरीर को ताकत मिलती है.ताकत के लिए आप घर पर बना खाना, दाल, खिचड़ी, फल और पौष्टिक आहार लें, साथ ही, पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन वाला भोजन खाए. ध्यान रखें कि, आपको बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना खाने से बचना है, क्योंकि इससे पेट की समस्या दोबारा बढ़ सकती है. इसके अलावा इस बीमारी के दौरान शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए जितना हो सके पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी न होने दें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स जरूर पूरा करें. अक्सर लोग बुखार और लक्षण कम होने के बाद सोचते हैं कि वह अब ठीक है और दवा बंद कर देते हैं, या बड़ी गलती है.
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