News24 हिंदी
न्यूज 24 डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।
Read More---विज्ञापन---
Thyroid Cancer Causes: कैंसर कई प्रकार के होते हैं। इनमें थायरॉइड कैंसर भी शामिल हैं, जो महिलाओं में कॉमन होता है। भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। थायरॉइड कैंसर भारतीय महिलाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाले कैंसर बन गया है, पिछले दो दशकों से शहरी इलाकों में इसके मामले काफी बढ़ गए हैं। महिलाओं में थायरॉइड कैंसर होने की संभावना पुरुषों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा होती है, विशेषकर 30-50 वर्ष की आयु के बीच। आइए जानते हैं इस पर डॉक्टर की खास राय।
धर्मशिला नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के हेड और नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अंबेश सिंह न्यूज-24 से बातचीत में बताते हैं कि थायरॉइड कैंसर का जोखिम ज्यादा आयु वाली महिलाओं को होता है। इसमें 30-50 आयु वर्ग की महिलाएं शामिल है। थायरॉइड फैमिली हिस्ट्री से भी हो सकता है। यदि किसी के परिवार में थायराइड कैंसर हुआ है, तो भविष्य में यह किसी और को भी हो सकती है। पहले से थायराइड संबंधी विकार वाली महिलाएं, जो गॉयटर या हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित है, उन्हें कैंसर हो सकता है। बचपन में किसी प्रकार के रेडिएशन के संपर्क में आए व्यक्ति को भी कैंसर हो सकता है।
डॉक्टर अंबेश ने इसके कुछ प्रमुख कारण बताएं है, जो महिलाओं में थायरॉइड कैंसर के रिस्क को बढ़ाते हैं, जैसे कि:
हार्मोन्स सबसे प्रमुख कारण
हार्मोनल इंबैलेंस के चलते महिलाओं को थायरॉइड कैंसर का अधिक जोखिम होता है, विशेषकर एस्ट्रोजन, जो थायरॉइड सेल्स की वृद्धि को बढ़ावा देता है। गर्भावस्था और कई बार प्रसव भी हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण इस जोखिम को और बढा सकता है।
पर्यावरण का असर
फैक्ट्री वेस्ट और हैवी मेट्लस थायरॉइड ग्लैंड्स के कार्य को बिगाड़ देती हैं। मेडिकल इमेजिंग (सीटी स्कैन, एक्स-रे) से रेडिएशन एक्सपोजर का जोखिम बढ़ जाता है, विशेषकर जब बचपन में एक्सपोजर हुआ हो।
अनहेल्दी लाइफस्टाइल
शरीर में पर्याप्त पोषण न होने से इस प्रकार के कैंसर का रिस्क बढ़ता है। आयोडीन की कमी या बहुत ज्यादा होने से थायरॉइड डिजीज होते हैं।
तनाव
लगातार तनाव में रहने से भी हार्मोनल इंबैलेंस और इम्यूनिटी प्रभावित होती है, जो कैंसर जैसी स्थितियों को बढ़ावा देता है।
1. फिजिकल चेकअप- डॉक्टर गर्दन की गांठों और सूजी हुई लसीका ग्रंथियों की जांच करते हैं।
2. ब्लड टेस्ट- थायराइड फंक्शन टेस्ट (TSH, T3, T4)।
3. अल्ट्रासाउंड- नोड्यूल की पहचान के लिए थायराइड की इमेजिंग।
4. फाइन-नीडल एस्पिरेशन (FNA)- गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट जिसमें संदिग्ध नोड्यूल से कोशिकाओं को निकालकर माइक्रोस्कोपिक जांच की जाती है।
5. अतिरिक्त इमेजिंग- यदि कैंसर की पुष्टि हो जाए तो फैलाव जानने के लिए सीटी या MRI स्कैन।
सर्जरी- सबसे आम उपचार जिसमें थायराइड ग्रंथि का हिस्सा या पूरी ग्रंथि हटाना (थायराइडेक्टॉमी) शामिल है। भारत के प्रमुख अस्पतालों में अब न्यूनतम इनवेसिव तकनीकें उपलब्ध हैं।
ये भी पढ़ें- Covid-19 Alert: विटामिन्स और न्यूट्रिएंट्स की कमी से भी हो सकता है कोरोना! जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर
न्यूज 24 पर पढ़ें हेल्थ, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।