लिवर काम करना कब बंद कर देता है? (Image: AI/Pexels)
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लिवर हमारे शरीर का एक बेहद ही महत्वपूर्ण अंग है, जिसमें हल्की सी खराबी सेहत की बिगाड़ सकती है. लोगों की खराब लाइफस्टाइल, ज्यादा मसालेदार खाने आदि के कारण लिवर की हेल्थ बिगड़ती रहती है और एक वक्त ऐसा आता है कि लिवर काम करना बंद कर देता है. आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरा दुनिया में बड़ी संख्या में लोग लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शिकार है और अपना इलाज करा रहे हैं. हम आपको इस स्टोरी में लिवर फेलियर के पीछे की वजह, उसके कुछ प्रकार और खतरों के बारे में बताएंगे और साथ ही, ये भी बताएंगे कि आप कैसे अपने आपको ऐसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं.
भारत में लिवर के इलाज के लिए मशहूर ILBS के अनुसार, लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो भोजन पचाने, पोषक तत्वों को अवशोषित करने, ऊर्जा जमा करने, खून से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है. खास बात यह है कि लिवर को गंभीर नुकसान होने तक कई बार स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. हालांकि, किसी संक्रमण या बीमारी के कारण लिवर अपने जरूरी काम करने में सक्षम नहीं रहता, तो इसे लिवर फेलियर कहा जाता है. यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है, वरना स्थिति खराब हो जाती है.
इन 3 प्रकार के लिवर फेलियर को समझे
ILBS के अनुसार, लिवर फेलियर के तीन प्रकार या पैटर्न होते हैं. इनमें;
एक्यूट लिवर फेलियर Acute Liver Failure
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एक्यूट लिवर फेलियर (Acute Liver Failure) में लिवर कुछ दिनों से लेकर हफ्तों के अंदर लिवर अचानक काम करना बंद कर सकता है. यह उन लोगों में भी हो सकता है, जिन्हें पहले से लिवर की बीमारी नहीं थी. इस स्थित के कारण की बात करें, तो दवाओं की ओवरडोज, गंभीर वायरल हेपेटाइटिस (Hepatitis) और विषैले पदार्थ(toxins) इसके कारण हो सकते हैं. यह जानलेवा स्थिति है और तुरंत अस्पताल में इलाज जरूरी होता है.
क्रॉनिक लिवर फेलियर Chronic Liver Failure
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क्रॉनिक लिवर फेलियर (Chronic Liver Failure) धीरे-धीरे महीनों या सालों में विकसित होता है. लंबे समय तक लिवर को होने वाले नुकसान से उसमें घाव और सिकुड़न बढ़ती जाती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता भी कम होने लगती है. इसके प्रमुख कारणों में लंबे समय का वायरल हेपेटाइटिस (Hepatitis), शराब से जुड़ी लिवर बीमारी और फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या शामिल हैं.
एक्यूट-ऑन-क्रॉनिक लिवर फेलियर (Acute-on-Chronic Liver Failure) उन लोगों में हो सकता है, जिन्हें पहले से लिवर से जुड़ी कोई बीमारी है और उनकी हालत अचानत तेजी से बिगड़ने लगती है. संक्रमण, शराब या अन्य गंभीर समस्या इसे ट्रिगर कर सकते हैं. इसमें लिवर के साथ किडनी, दिमाग और फेफड़े जैसे अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.
लिवर फेलियर के लक्षण और कारण क्या हैं
लिवर फेलियर कई कारणों से हो सकता है, जिनमें दवाओं की विषैला प्रभाव या ओवरडोज, वायरल हेपेटाइटिस, लंबे समय तक शराब का सेवन, फैटी लिवर की समस्या, गंभीर संक्रमण और कुछ दुर्लभ जेनेटिक बीमारियां शामिल हैं.
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इसके लक्षणों की बात करें, तो शुरुआत में थकान, भूख कम लगना, हल्की मतली और पेट के ऊपरी हिस्से में परेशानी हो सकती है. स्थिति बिगड़ने पर आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल, पैरों या पेट में सूजन, आसानी से चोट या खून आना और भ्रम, ज्यादा नींद या व्यवहार में किसी तरह का बदलाव जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ऐसे संकेत नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और इलाज कराएं. लिवर की समस्या को वक्त रहते ठीक करने के लिए रेगुलर चेकअप कराते रहे और दवाओं और सही आहार का सहारा लें. डॉक्टर की सलाह के नियमित रूप से अपनाया जाए, तो स्थिति तो बेहतर किया जा सकता है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.