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पैरों में टाइटनेस के अलावा ये 2 लक्षण भी बताते हैं खून का थक्का जम रहा है, डॉक्टर ने कहा कभी ना करें इग्नोर

Khoon Ka Thakka Jamna: खून का थक्का जमने को इग्नोर किया जाए तो यह पैरों से होते हुए फेफड़ों तक जा सकता है और मेडिकल इमरजैंसी की वजह बनता है. ऐसे में समय रहते इसे पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है.

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Blood Clot In Legs: पैरों में खून का थक्का जमने को डीप वेन थ्रोम्बोसिस कहते हैं. यह आमतौर पर पैरों की नसों में खून का थक्का जमने पर होता है. खून का थक्का जमने पर पैरों में इसके लक्षण भी नजर आते हैं जिन्हें लोग जाने-अनजाने इग्नोर कर देते हैं और दिक्कत बढ़ती चली जाती है. इसी बारे में बताते हुए वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुमित कपाड़िया ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से वीडियो शेयर किया है और बताया है कि पैरों में खून का थक्का जमने (Khoon Ka Thakka Jamna) के 3 सबसे बड़े लक्षण कौन से हैं और इन्हें कैसे पहचाना जा सकता है.

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पैरों में खून का थक्का जमने के लक्षण

वैस्कुलर सर्जन बताते हैं कि बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके पैरों में खून का थक्का जमता है और उन्हें पता ही नहीं चलता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर ब्लड क्लॉट्स साइलेंटली डेवलप होते हैं और उनके लक्षण नजर नहीं आते हैं. ऐसे में पैरों पर होने वाली दिक्कतों को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए ताकि समय रहते ब्लड क्लॉट्स का पता लगाया जा सकते. डॉक्टर बताते हैं कि अगर ये ब्लड क्लॉट्स पैरों से निकलकर फेफड़ों तक चले जाते हैं तो जानलेवा बन सकते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि ये 3 दिक्कतें पैरों में ब्लड क्लॉट बनने का संकेत हो सकती हैं –

पैरों में सूजन – एक पैर में अगर अचानक से सूजन आ जाती है तो यह ब्लड क्लॉट बनने का लक्षण हो सकता है.

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पैरों में टाइटनेस – पैरों की पिंडलियों में टाइटनेस महसूस होने लगती है, ऐसा लगता है जैसे स्किन खिंच रही है.

त्वचा की रंगत बदलना – खून का थक्का जमने से पैरों की त्वचा अचानक बदलने लगती है, त्वचा की रंगत में बदलाव नजर आ सकता है. पैर लाल नजर आ सकते हैं या फिर गर्म महसूस होते हैं.

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डॉक्टर सलाह देते हैं कि पैरों में खून का थक्का जमने के शुरुआती लक्षणों ( Blood Clots Symptoms) को पहचानना और समय पर चेकअप कराना बेहद जरूरी है.

खून का थक्का जमना क्या होता है

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खून का थक्का जैल जैसी सेमीसॉलिड यानी अर्थतरल खून की सेल्स और प्रोटीन हैं जो खून के गाढ़ा होने पर थक्का बन जाते हैं. खून का थक्का आमतौर पर चोट लगने के बाद बनता है लेकिन एब्नॉर्मल क्लॉट्स बनने लगें तो यह जान के लिए खतरा पैदा करते हैं. जो लोग किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, धूम्रपान करते हैं, मोटापे का शिकार हैं या उम्र बढ़ने लगी है तो उनमें खून का थक्का जमने की संभावना ज्यादा होती है.

खून का थक्का फेफड़ों तक चला जाए तो क्या होता है

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पैरों से होते हुए अगर खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो इसे पल्मोनरी एंबोलिज्म कहते हैं. ऐसा होने पर सांस फूलने लगती है. छाती में दर्द होता है, गहरी सांस लेने पर दर्द बढ़ने लगता है, दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं और बिना किसी कारण खांसी आने लगती है या खांसते हुए बलगम के साथ खून दिखने लगता है. इस स्थिति में बिना देर किए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Jul 25, 2026 10:35 AM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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