नवजात बच्चे को कंगारू केयर से मिलता है फायदा, AIIMS की प्रोफेसर ने बताया Kangaroo Care क्या है और कैसे दी जाती है

Newborn Baby Care: AIIMS के OBGYN डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुभूति राणा ने बताया बच्चे के लिए कंगारू केयर का क्या महत्व है. यहां जानिए नवजात बच्चे की देखभाल के लिए किस तरह कंगारू केयर अपनाई जा सकती है.

Kangaroo Care

कंगारू मदर केयर से शिशु को क्या फायदे होते हैं? AI Generated Image

What Is Kangaroo Care: बच्चे का जन्म होता है तो नए वातावरण में खुद को ढालना बच्चे के लिए मुश्किल होने लगता है. बच्चा अक्सर ही रोता है और माता-पिता के साथ कनेक्शन बनाने में भी उसे दिक्कत होती है. ऐसे में नवजात की देखभाल के लिए कंगारू केयर अपनाई जा सकती है. AIIMS के OBGYN डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुभूति राणा ने बताया कि नवजात बच्चे के लिए कंगारू केयर बेहद महत्वपूर्ण होती है. यहां जानिए कंगारू केयर क्या है और इससे नवजात बच्चे (Newborn Baby) के साथ-साथ मां को क्या फायदा मिल सकता है.

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क्या होती है कंगारू केयर

डॉक्टर बताती हैं कि कंगारू केयर नवजात बच्चे को दी जाने वाली सिंपल लेकिन बेहद इफेक्टिव केयर है. इसमें बच्चे को माता-पिता की नंगी छाती पर लंबाई में रखा जाता है. इससे बच्चे का अपने पेरेंट से डायरेक्ट स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट (Skin to skin contact) होता है. वर्तमान में इसे नवजात की देखभाल का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है. खासतौर से समय से पहले पैदा हुए बच्चों और लो बर्थ वेट बेबीज यानी वे बच्चे जिनका वजन सामान्य से कम होता है, उनके लिए यह केयर जरूरी है.

मां और बच्चे के लिए स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट क्यों जरूरी है

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स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट के बच्चे पर बेहद अच्छे काल्मिंग इफेक्ट्स (Calming Effects) होते हैं. यह बच्चे के हार्ट रेट, सांस, तापमान और नर्वस सिस्टम को रेग्यूलेट करता है. स्तनपान कराने वाली मां में स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट से ब्रेस्टफीडिंग बेहतर होती है क्योंकि मिल्क प्रोडक्शन स्टिम्यूलेट होता है और बच्चे को लैचिंग यानी दूध पीने में मदद मिलती है.

इसके अलावा स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट का बच्चे पर इमोशनल इंपैक्ट भी पड़ता है. इससे मां और बच्चे के बीच बोंडिंग होती है और हेल्दी न्यूरोलॉजिकल और इमोशनल डेवलपमेंट भी बढ़ती है.

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बच्चे को कंगारू केयर किसे देनी चाहिए

कंगारू केयर बच्चे को कोई भी पेरेंट यानी माता या पिता, दादा-दादी, नाना-नानी या कोई करीबी केयरगिवर भी दे सकता है जो बच्चे का ध्यान रखता है. जब मां को आराम की जरूरत होती है या रिकवरी का समय चाहिए होता है तो कंगारू केयर कोई और दे सकता है. यह बच्चे के कंफर्ट के लिए जरूरी है.

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बच्चे और पेरेंट के बीच बोंडिंग में कंगारू केयर का प्रभाव

बच्चे की जिंदगी के शुरुआती साल बच्चे और पेरेंट दोनों के लिए चुनौतियों और एडजस्टमेंट से भरे होते हैं. कंगारू केयर हमें याद दिलाती है कि सबसे पावरफुल केयर असल में सबसे सिंपल केयर है. यह केयर है बच्चे को अपने सीने से लगा लेना.

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कितनी बार देनी चाहिए कंगारू केयर

रोजाना अगर कुछ मिनटों के लिए भी बच्चे को कंगारू केयर दी जाए तो इसका बच्चे के विकास, वृद्धि और इमोशनल सिक्योरिटी पर महत्वपूर्ण असर होता है. यह बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि माता-पिता के लिए भी जरूरी है. इसीलिए नवजात को कंगारू केयर जरूर देनी चाहिए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - AIIMS

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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