शरीर में कैल्शियम की सही मात्रा हड्डियों और दांतों की मजबूती के साथ-साथ मांसपेशियों, नसों और दिल के कामकाज के लिए जरूरी होती है. लेकिन जब खून में कैल्शियम का लेवल नॉर्मल से ज्यादा हो जाता है तो इस परेशानी को हाइपरकैल्सीमिया कहा जाता है. शुरुआत में इसके लक्षण इतने नॉर्मल हो सकते हैं कि कई बार महिलाएं इन्हें थकान, पेट की समस्या या उम्र बढ़ने से जोड़कर नजरअंदाज कर देती हैं. भारत में हुई NCBI की रिसर्च में हाइपरकैल्सीमिया के मरीजों में महिलाओं की संख्या भी काफी रही है. उत्तर भारत के एक टर्शियरी केयर सेंटर की 2024 में पब्लिश प्रोस्पेक्टिव स्टडी में 91 मरीजों में 57 यानी 62.64 फीसदी महिलाएं थीं. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि इसके लक्षण क्या हैं.
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हाइपरकैल्सीमिया होने पर शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
खून में कैल्शियम बढ़ने का असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है. लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैल्शियम कितना बढ़ा है और कितने समय से बढ़ा हुआ है. हल्के मामलों में इंसान को बहुत कम या कोई लक्षण नहीं भी हो सकता है, जबकि ज्यादा कैल्शियम बढ़ने पर पाचन तंत्र, किडनी, हड्डियों और नर्वस सिस्टम इफेक्ट हो सकते हैं
क्या हैं हाइपरकैल्सीमिया के लक्षण?
- हाइपरकैल्सीमिया में भूख कम लगना, मतली और उल्टी जैसी समस्या हो सकती है. 2024 की उत्तर भारत की स्टडी में सभी 91 मरीजों में मतली और भूख कम लगने की शिकायत दर्ज की गई, जबकि करीब 65 फीसदी मरीजों को उल्टी हुई.
- कैल्शियम बढ़ने का असर आंतों पर भी पड़ सकता है. इसके कारण कब्ज, पेट दर्द और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अध्ययन में करीब 54 फीसदी मरीजों को कब्ज और लगभग 55 फीसदी को पेट दर्द की शिकायत थी.
- बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस होना, शरीर में कमजोरी या रोजाना के काम करने में पहले के मुकाबले ज्यादा परेशानी होना हाइपरकैल्सीमिया से जुड़ा हो सकता है.अध्ययन में लगभग 41 फीसदी मरीजों में थकान दर्ज की गई है.
- कैल्शियम का स्तर बढ़ने पर किडनी इफेक्ट हो सकती है. कुछ लोगों में बार-बार पेशाब आना और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है. अध्ययन में लगभग 33 फीसदी मरीजों में डिहाइड्रेशन और करीब 14 फीसदी में ज्यादा पेशाब आने की समस्या दर्ज हुई.
क्या हर ज्यादा कैल्शियम का मतलब हाइपरकैल्सीमिया की बीमारी है?
हाइपरकैल्सीमिया के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्राइमरी हाइपरपैराथायरायडिज्म, कुछ कैंसर, विटामिन डी ज्यादा होना, किडनी से जुड़ी समस्याएं और कुछ दवाएं शामिल हैं. उत्तर भारत की 2024 स्टडी में प्राइमरी हाइपरपैराथायरायडिज्म सबसे आम था.
कैसे पता चलता है कि शरीर में कैल्शियम ज्यादा है?
अगर डॉक्टर को हाइपरकैल्सीमिया का खतरा होता है तो आमतौर पर ब्लड टेस्ट में कैल्शियम का लेवल देखा जाता है. इसके साथ PTH और विटामिन डी जैसे टेस्ट कारण पता करने में मदद कर सकते हैं.
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