बच्चा हर समय देखता रहता है यूट्यूब शॉर्ट्स? एक्सपर्ट ने बताया बच्चों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है

Kids Watching YouTube Shorts: पैरेंट्स अक्सर ही बच्चों को जाने-अनजाने यूट्यूब शॉर्ट्स या इंस्टाग्राम रील्स देखने की आदत डलवा देते हैं. लेकिन, यह आदत बच्चों के दिमाग और उनकी सेहत पर क्या असर डालती है, यह जानना जरूरी है.

Brain damage in children

बच्चा अगर यूट्यूब शॉर्ट्स हर समय देखता है तो उसके दिमाग पर क्या असर पड़ता है, जानें यहां. Image Credit - Pexels

Children’s Health: बच्चों के हाथों में फोन पकड़ाते हुए माता-पिता को यह आभास नहीं होता कि वे अपने बच्चे को जाने-अनजाने फोन की लत (Phone Addiction) लगवा रहे हैं. लेकिन, यह फोन की लत तब और ज्यादा सीरियस हो जाती है जब बच्चे को इंस्टाग्राम रील्स या यूट्यूब शॉर्ट्स देखने की आदत लग जाती है. बच्चा हर समय फोन में लगा रहना चाहता है, शॉर्ट वीडियोज (Short Videos) छोटी उम्र से ही उसका अटेंशन स्पैन कम करने लगती है और पैरेंट्स को रियलाइज नहीं होता कि इस छोटी सी आदत से बच्चे के दिमाग पर कितना खतरनाक असर पड़ सकता है. इसी बारे में बता रही हैं चाइल्ड साइकोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. सुरभि. इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक पोस्ट में एक्सपर्ट ने बताया है कि यूट्यूब शॉर्ट देखने पर बच्चे के दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता है.

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यूट्यूब शॉर्ट्स का बच्चे के दिमाग पर असर

डॉक्टर बताती हैं कि बच्चे को हर समय यूट्यूब शोर्ट्स (Short Videos) दिखाने पर बच्चे का ब्रेन डैमेज हो सकता है. यह बच्चे को एक नहीं बल्कि कई तरह से प्रभावित करता है –

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पढ़ाई में फोकस कम होता है – यूट्यूब शॉर्ट्स देखते रहने पर बच्चों का फोकस पढ़ाई से हटने लगता है. बच्चे जब फोन में नहीं भी लगे होते तब भी उनका पूरा ध्यान फोन और फोन के वीडियोज पर लगा रहता है.

बच्चों में टैंट्रम और जिद बढ़ने लगती है – बच्चा हर समय वीडियो देखने का आदी हो जाता है और जब बच्चे को मना किया जाता है तो बच्चा टैंट्रम दिखाने लगता है. उसकी जिद बढ़ने लगती है. वह ना फोन के बिना कुछ खाना चाहता है और ना ही कुछ और करने में रुचि दिखाता है.

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बच्चों का व्यवहार और नींद का पैटर्न बदलने लगता है – हर समय फोन में लगे रहने वाला बच्चा या हर समय शॉर्ट वीडियो देखने वाला बच्चा जल्दी सोना नहीं चाहता. बच्चे की नींद प्रभावित होती है. वहीं, बच्चा जो कुछ देखता है उन्हीं चीजों को अपने व्यवहार में लाने की कोशिश करता है. इससे बच्चे का व्यवहार बनावटी होने लगता है या पहले जैसा नहीं रहता.

दिमाग कुछ प्रोसेस नहीं कर पाता – बच्चों का ब्रेन हाइजैक्ड हो जाता है और वे किसी चीज को प्रोसेस नहीं कर पाते हैं. बच्चे का पढ़ाई ही नहीं बल्कि अपने आस-पास के खेल-कूद में भी ध्यान नहीं लगता है.

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खुद को रोक नहीं पाते – अगर बच्चे खुद भी चाहें कि इतना यूट्यूब ना देखते रहें, तब भी बच्चे खुद को रोक नहीं पाते और बार-बार फोन में वीडियोज देखते रहते हैं.

कैसे छुड़ाएं फोन की लत

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बच्चे की फोन की लत (Phone Ki Lat) छुड़ाने के लिए यह जरूरी है कि उसके सामने आप भी फोन ना चलाएं. बच्चे को मनोरंजन के लिए कहानियां सुनाएं, उससे बातें करें या उसे फोन देना ही है तो उसे उसके खुद के वीडियो दिखाएं. छोटी उम्र में ही बच्चे को उस दुनिया से अवगत ना कराएं जिसे उसका मस्तिष्क प्रोसेस नहीं कर पाता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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