Oral Cancer Symptoms Test: मुंह के कैंसर को ओरल कैंसर, ओरल कैविटी कैंसर या माउथ कैंसर (Mouth Cancer) कहा जाता है. यह मुंह के ही किसी हिस्से में पनपना शुरू होता है और अन्य अंगों तक फैल सकता है. मुंह के कैंसर की कैविटी मुंह के किसी भी हिस्से में निकल सकती है. यह जीभ, होंठों, मसूड़ों, दांतों, गाल के अंदरूनी हिस्से, स्लाइवरी ग्लैंड्स, मुंह के तले पर, मुंह के ऊपरी हिस्से पर, टॉन्सिल्स में या उवुला में नजर आ सकती है. इसीलिए समय रहते ओरल कैंसर की पहचान करना जरूरी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी की गई जानकारी में बताया गया है कि मुंह के कैंसर के लक्षण कैसे दिखते हैं और किस तरह इसकी जांच की जाती है.
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मुंह के कैंसर के चेतावनी संकेत और लक्षण
- मुंह में, चेहरे पर या गले पर घाव हो जाना जो ठीक नहीं होता है
- मुंह खोलने में दिक्कत आना
- जीभ, मसूड़ों या मुंह के अंदरूनी किसी हिस्से पर सफेद, लाल या मिक्स रंग के धब्बे नजर आना
- गर्दन पर गांठ बनना या मांस का मोटा हो जाना
- मुंह में, जीभ पर या जबड़े में लगातार दर्द बने रहना
- कुछ भी चबाने या निगलने में लंबे समय तक दिक्कत महसूस होना
- मुंह के अंदर, होंठों के ऊपर या मसूड़ों में सूजन या मोटा दाना निकल आना
ये लक्षण भी दिख सकते हैं
- आवाज में बदलाव आना
- दांतों का ढीला पड़ जाना
- मुंह में बिना किसी वजह खून निकलना
- बिना वजह वजन कम होना.
ये लक्षण ओरल कैविटी के बिनाइन ट्यूमर का लक्षण या शरीर में होने वाले किसी और कैंसर का लक्षण भी हो सकते हैं. ऐसे में ये लक्षण 2 हफ्तों से ज्यादा बने रहते हैं तो इन्हें इग्नोर ना करें और डॉक्टर से जांच कराएं.
कैसे होती है मुंह के कैंसर की जांच
मुंह के कैंसर की जांच के लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, जनरल फिजिकल टेस्ट और ओरल टेस्ट किया जाता है. ओरल एग्जामिनेशन की जांच के लिए मुंह के हर हिस्से को देखा जाता है. लाल या सफेद पैचेस की जांच होती है और किसी तरह का लंप तो नहीं है यह देखा जाता है. इसके बाद ये टेस्ट होते हैं –
ब्रश काइटोलॉजी – इस टेस्ट में संदेह वाले हिस्से को लेकर उसकी माइक्रोस्कोप के नीचे जांच होती है और पाथोलॉजिस्ट देखते हैं कि कोई एब्नॉर्मल सेल तो नहीं दिख रही है.
फाइन नीडल एस्पिरेशन कायटोलॉजी – इस टेस्ट में पतली सूंई से सूजन वाले हिस्से से सेल्स निकाली जाती हैं. इन सेल्स की जांच की जाती है.
बायोप्सी – संदेह वाले हिस्से का छोटा टिशू लिया जाता है और पंच बायोप्सी उपकरण की मदद से जांच होती है. देखा जाता है कि टिशू में कैंसर सेल्स हैं या नहीं.
इमेजिंग टेस्ट – कुछ इमेजिंग टेस्ट जैसे एक्सरे, सीटी स्कैन, MRI या PET स्कैन किया जा सकता है. इससे पता चलता है कि कैंसर कहां तक फैला है.
किन्हें है ज्यादा खतरा
- किसी भी तरह के तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को
- मुंह के अंदर तंबाकू रखने पर
- एल्कोहल का सेवन करने पर
- दांतों का नुकीला होना या गलत साइज के डेंचर पहनना
- खराब डाइट
- ह्यूमन पैपीलोमावायरस
- इम्यनिटी का कमजोर होना
- सूरज की अल्ट्रावायरल किरणों के संपर्क में आना जिससे होंठों पर कैंसर हो सकता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.