Nakhun Par Kali Line Hona: नाखून पर काली धारी का बनना मेलानोनीचिया कहलाता है. मेलानोनीचिया में नाखून पर मेलेनिन पिग्मेंट जमा होने लगता है. इस दिक्कत में नाखून पर काला या भूरा रंग का निशान दिखता है. ऐसा बिना किसी हानि के भी हो सकता है या ये निशान किसी गंभीर समस्या का संकेत भी होता है. ऐसे में अगर आपको भी अपने नाखून पर कालापन या काली-भूरी धारियां (Black Lines On Nails) नजर आती हैं तो यहां जानिए किस स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत में ऐसा होता है या नाखून पर इस तरह के निशान नजर आना किस बीमारी के लक्षण हैं.
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नाखूनों पर काली-भूरी धारियां दिखने का कारण
स्किन कलर – अगर आपकी स्किन का कलर डार्क है तो इससे स्किन मेलोनोनीचिया हो सकता है यानी नाखूनों पर धारियां नजर आ सकती हैं.
प्रेग्नेंसी – प्रेग्नेंसी के दौरान स्किन का कलर बदलने लगता है. इससे भी नाखूनों पर निशान दिख सकते हैं.
इंफेक्शन – किसी तरह का फंगल, बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन जैसे एचआईवी या एचपीवी नाखून पर निशान बनने की वजह बन सकता है.
इंफ्लेमेशन – स्किन की कुछ कंडीशंस में नाखून के आस-पास की त्वचा सूज जाती है. इससे मेलेनोनीचिया हो सकता है.
खराब खान-पान – प्रीटीन की कमी, विटामिन डी की कमी और विटामिन बी12 की कमी से नाखून पर काली लकीरें या निशान पड़ सकते हैं.
ट्रॉमा – पैर के नाखूनों पर काली लकीरें पड़ने की वजह बहुत ज्यादा टाइट जूते पहनना हो सकता है, हाथ के नाखूनों पर इन निशानों की वजह नाखून चबाना और नाखून खींचना भी हो सकता है.
स्किन कंडीशंस – सोराइसिस, क्रोनिक रेडियो डर्मटाइटिस या क्रोनिक पेरोनीचिया जैसी स्किन कंडीशंस में नाखून पर निशान (Marks On Nails) पड़ सकते हैं.
ट्यूमर – कुछ कैंसर या ट्यूमर नाखून पर निशान पड़ने की वजह बनते हैं. इससे नाखून के अंदर के टिशूज डैमेज होने लगते हैं.
कैसे दूर होगी नाखून पर लकीरों की दिक्कत
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपको यह दिक्कत क्यों हो रही है. दिक्कत का पता लगाकर इलाज हो सकता है. अगर नाखून पर कोई चोट है तो उस चोट को भरना, इंफेक्शन है तो इंफेक्शन को ट्रीट करना और प्रेग्नेंसी है तो बच्चे के जन्म के बाद दिक्कत से छुटकारा पाया जा सकता है.
विटामिन की कमी कैसे होगी पूरी
नाखूनों पर लकीरें नजर आना किसी विटामिन की कमी (Vitamin Deficiency) का भी लक्षण हो सकता है. ऐसे में विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी पूरी करके दिक्कत को दूर कर सकते हैं. पर्याप्त मात्रा में धूप लें, दूध, मशरूम, अंडे और मछली को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं. फोर्टिफाइड फूड्स या विटामिन के सप्लीमेंट्स लेकर भी समस्या का निवारण हो सकता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.










