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Mpox Virus, Symptoms and Prevention: कुछ समय पहले ही पूरा विश्व कोरोना जैसे भयानक वायरस से जूझ रहा था, लोग इससे उभर ही रहे थे कि नए वायरस ने दस्तक दे डाली। इस वायरस का नाम है एमपॉक्स, इस बीमारी को लेकर WHO ने इमरजेंसी घोषित कर दी है। इस वायरस ने फिर से आम लोगों के जीवन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा इस बीमारी को लेकर इमरजेंसी जारी की गई है। यह बीमारी पहले अफ्रीका तक सीमित थी लेकिन अब इसके मामले विश्वभर में मिल रहे हैं। पाकिस्तान में एमपॉक्स का एक मामला सामने आया है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार कई देश इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं, ऐसे में इस बीमारी के बारे में सब कुछ जानना जरूरी है।
एमपॉक्स को पहले मंकीपॉक्स के नाम से भी जाना जाता था, यह एक प्रकार का वायरस है जो ऑर्थोपॉक्स वायरस जीन्स का एक प्रकार माना जाता है। यह स्मॉल पॉक्स यानी चेचक जैसी बीमारी होती है, मंकीपॉक्स का पहला मामला साल 1958 में बंदरों में पाया गया था। यह वायरस कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है।
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यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संबंध में आने से फैलती है, एमपॉक्स एक से दूसरे इंसान में आसानी से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के इंफेक्टेड एरिया जैसे स्किन, मुंह, जननांगों से संपर्क से यह फैलता है। हालांकि, यह बीमारी ज्यादातर संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से होती है। पीड़ित जानवर के काटने, खरोचने या खाने से भी ये हो सकता है। इंसानों में यह संक्रमित कपड़ों के कॉन्टेक्ट में आने से या अन्य दूषित चीजों को छूने से फैल सकता है।

MPox
इस बीमारी में लक्षण 1 से 21 दिनों के अंदर कभी भी नजर आ सकते हैं, शुरुआत में इसके लक्षण रैशेज, सिरदर्द, गले मे दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन के साथ छोटे-छोटे दाने निकलना होते हैं। एमपॉक्स एक घातक और जानलेवा बीमारी है, कई बार रिकवरी करते समय लिम्फ नोड्स सूज जाती है जिसके चलते इंसान की मौत भी हो सकती है।
इस बीमारी में बुखार और दर्द की समस्या होती है, मेडिकल में इसका कोई सटीक इलाज नहीं है। डॉक्टर आपको डाइट प्लान के साथ दर्द की दवाएं दे सकते हैं। अगर किसी ने इसका वैक्सीन लिया हुआ है तो खतरा कम होता है। जिन लोगों की इम्यूनिटी स्ट्रांग होती है वो लोग भी जल्दी ठीक हो जाते हैं।
सबसे पहले तो पीड़ित व्यक्तियों के संबंध में आने से बचें, यदि कोई परिवार में ही एमपॉक्स से जूझ रहा है तो उससे क्वारंटाइन कर दें। परिवार के अन्य लोग उनके संबंध में ना आए, खासतौर पर बच्चे, बूढ़े व गर्भवती महिलाएं। मरीज को मास्क पहनने के लिए कहे और दवाओं के साथ पर्याप्त आराम दें।
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