चिलचिलाती गर्मी को मात देने के लिए चीन का अनोखा जुगाड़! आसमान से नहीं, गगनचुंबी इमारतों से बरस रहा पानी!

क्लाइमेट चेंज की वजह से चीन में हीटवेव का खतरा लगातार बढ़ रहा है. इसके अलावा, शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ की वजह से तापमान गांवों के मुकाबले बहुत ज्यादा हो जाता है.

Rain in china

चीन ने जून-जुलाई की भीषण गर्मी से निपटने के लिए एक ऐसा अनोखा और ‘हाई-टेक’ तरीका खोज निकाला है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं, जिनमें चीन की ऊंची-ऊंची इमारतों की छतों से कोहरे की तरह पानी बरसता दिख रहा है. यह कोई कुदरती बारिश या विजुअल इफेक्ट नहीं है, बल्कि चीन के उत्तरी शांक्सी प्रांत के युनचेंग शहर में आजमाया गया एक खास रूफटॉप मिस्टिंग सिस्टम है.

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कैसे काम करता है यह ‘जादुई’ कूलिंग सिस्टम?

इमारतों से पानी बरसाने का यह तरीका पूरी तरह से विज्ञान के एक जाने-माने नियम ‘इवेपोरेटिव कूलिंग’ पर काम करता है. यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे हमारे शरीर से निकलने वाला पसीना हवा के संपर्क में आकर सूखता है और हमें ठंडक का अहसास कराता है. इमारतों की छतों पर बेहद बारीक छेद वाले हाई-प्रेशर नोजल लगाए जाते हैं, जो पानी को बेहद महीन बूंदों के रूप में हवा में स्प्रे करते हैं. जैसे ही ये बारीक बूंदें गर्म हवा के संपर्क में आती हैं, वे तुरंत भाप बनकर उड़ने लगती हैं. इस प्रक्रिया में वे आसपास की गर्मी को सोख लेती हैं.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब बाहर का तापमान 38°C के आसपास होता है, तो यह सिस्टम महज कुछ ही मिनटों में वहां के तापमान को 5°C से 8°C तक कम कर देता है. पानी की बूंदें इतनी बारीक होती हैं कि वे जमीन पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ जाती हैं. यानी नीचे चल रहे लोग या सड़कें बिना भीगे ही ठंडी हवा का मजा ले सकते हैं.

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AC के मुकाबले बेहद सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल

पारंपरिक एयर कंडीशनर जहां भारी मात्रा में बिजली खाते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं यह मिस्टिंग सिस्टम बेहद किफायती है. इसमें सिर्फ पानी, पंप और नोजल की जरूरत होती है, जिससे बिजली की खपत न के बराबर होती है. चीन के कई शहरों में इसका इस्तेमाल पहले से ही पार्कों, बस स्टॉप और सार्वजनिक चौराहों पर किया जा रहा है.

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क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

क्लाइमेट चेंज की वजह से चीन में हीटवेव का खतरा लगातार बढ़ रहा है. इसके अलावा, शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ की वजह से तापमान गांवों के मुकाबले बहुत ज्यादा हो जाता है. ऐसे में घनी आबादी वाले अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोगों के लिए यह सिस्टम किसी वरदान से कम नहीं है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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