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आंखों पर भी नजर आते हैं किडनी खराब होने के लक्षण, जानिए Kidney Disease का पहला संकेत क्या होता है

Kidney Disease Symptoms: किडनी खराब होने पर शरीर पर अलग-अलग तरह के प्रभाव नजर आते हैं. आंखें देखकर भी पहचान सकते हैं कि किडनी की सेहत सही नहीं है.

Kidney Disease: किडनी शरीर का वो हिस्सा है जो शरीर की गंदगी को फिल्टर करके बाहर निकाल देता है. इसे शरीर का फिल्टर सिस्टम कहते हैं. अगर किडनी की सेहत (Kidney Health) बिगड़ती है और पूरे शरीर पर इसका बुरा असर नजर आने लगता है. किडनी की हालत खराब हो तो आंखों की दिक्कतें (Eye Problems) भी हो सकती हैं. किडनी खराब हो तो शरीर पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है, इंफ्लेमेशन बढ़ती है जिसका असर आंखों पर भी पड़ता है, विटामिन और मिनरल्स इंबैलेंस हो सकते हैं, शरीर में वेस्ट प्रोडक्ट्स की मात्रा बढ़ जाती है और कई रक्त धमनियां डैमेज हो सकती हैं. ऐसे में यहां जानिए किडनी खराब होने पर आंखों पर कौन से संकेत नजर आने लगते हैं.

किडनी खराब होने पर आंखों पर दिखने वाले संकेत | Signs Of Kidney Damage On Eyes

आंखों का फूलना – आंखों के फूलने या पफीनेस की दिक्कत नजर आ सकती है. किडनी में दिक्कत हो तो शरीर में एक्सेस फ्लुइड जमा होने लगता है. इससे आंखों के आस-पास की त्वचा फूल जाती है. फ्लुइड बिल्डअप के अलावा शरीर में प्रोटीन लीक होने से प्रोटीन्यूरिया की दिक्कत हो सकती है. प्रोटीन लेवल्स कम होने पर फ्लुइड आंखों के आस-पास जमने लगता है. इससे आंखे फूली हुई और सूजी हुई नजर आने लगती हैं.

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धुंधला नजर आ सकता है – किडनी की बीमारियों में आंखों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं. इससे आंखों से धुंधला नजर आने (Blurred Vision) की दिक्कत भी हो सकती है.

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आंखों में खुजली होना – जिन लोगों की किडनी खराब होने लगती है उनकी आंखों में इरिटेशन ज्यादा होने लगती है और आंखें सूखी हुई महसूस होती हैं. इससे आंखों में खुजली भी हो सकती है.
रंग अलग दिख सकते हैं – कई बार किडनी की बीमारियों के कारण व्यक्ति को चीजों का रंग बदला हुआ नजर आने लगता है. ऐसा मैक्यूलर डिजनरेशन के कारण होता है.

किडनी ट्रीटमेंट का आंखों पर असर पड़ सकता है

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किडनी की बीमारियों में जो ट्रीटमेंट्स किए जाते हैं उनसे भी आंखों पर असर पड़ सकता है. जब खून से वेस्ट प्रोडक्ट निकाला जाता है तो इससे फ्लुइड शिफ्ट हो सकता है और प्रेशर बदलता है जिससे कैटेरेट्स और ग्लूकोमा जैसी दिक्कतों का रिस्क बढ़ जाता है. रेटिनोपैथी यानी रेटिना में डैमेज (Retina Damage) हो सकता है, आंखों पर बहुत ज्यादा प्रेशर पड़ने से ग्लूकोमा की दिक्कत हो सकती है और आंखों के सेंट्रल पार्ट में डैमेज हो सकता है. आंखों के सामने धुंधलापन छाने की दिक्कत भी इन प्रभावों में शामिल है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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First published on: Oct 14, 2025 03:20 PM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. दिल्ली प्रेस और डायमंड पब्लिशिंग हाउस के लिए मैग्जीन में काम करने के बाद NDTV में साढ़े तीन साल कार्यरत रहीं. लाइफस्टाइल और सेहत बीट में गहन रुचि और लगभग छह साल का अनुभव लेकर न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर लिख रही हैं.

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Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. दिल्ली प्रेस और डायमंड पब्लिशिंग हाउस के लिए मैग्जीन में काम करने के बाद NDTV में साढ़े तीन साल कार्यरत रहीं. लाइफस्टाइल और सेहत बीट में गहन रुचि और लगभग छह साल का अनुभव लेकर न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर लिख रही हैं.

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