क्या कोई वैज्ञानिक कारण है कि बच्चों को सब्जियां पसंद नहीं हैं? स्टडी ने किया खुलासा

Why Children Dislike Vegetables: बच्चे अक्सर ही सब्जियों से जी चुराने लगते हैं. ऐसे में नई स्टडी ने बताया है कि इसके पीछे क्या वजह हो सकती है. अगर आपका बच्चा भी सब्जियां खाने से बचता है तो यहां जानिए क्या हो सकता है कारण.

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सब्जियां खाना क्यों पसंद नहीं करते बच्चे?

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Children Disliking Vegetables: माता-पिता की अक्सर ही बच्चों से यह शिकायत रहती है कि वह सब्जियां खाने में आनाकानी करते हैं. कभी खाने की थाली में बच्चे सब्जियों को छांटकर अलग कर देते हैं, तो कभी स्कूल से लौटते हैं तो टिफिन का एक हिस्सा इन छोड़ी गई सब्जियों से ही भरा हुआ रहता है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे सब्जियों को लेकर इतने ‘चूजी’ क्यों होते हैं और क्यों उन्हें कुछ सब्जियां अच्छी लगती हैं और कुछ नहीं. कई यूनिवर्सिटीज में हुई स्टडी (Study) ने इस सवाल का जवाब दिया है और बताया है कि बच्चों के सब्जियों को छांट-छांटकर खाने के पीछे असल वजह क्या है.

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सब्जियां छांटकर क्यों खाते हैं बच्चे

इंग्लैंड की एस्टोन यूनिवर्सिटी से फंडेड रिसर्च 12 मई को डेवलपमेंटल साइकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई थी. इस रिसर्च में 2 साल के बच्चों को शामिल किया गया था. स्टडी के दौरान इन बच्चों ने कोई सब्जी नहीं खाई. असल में इन बच्चों की मां को प्रेग्नेंसी के दौरान गाजर और केल पाउडर के कैप्सूल दिए गए थे. स्टडी के चीफ रिसर्चर ने बताया कि बच्चे गर्भ (Womb) में रहते हुए जिन गंध को अनुभव करते हैं वो उनकी लॉन्ग ट्रम मेमोरी में आ जाता है.

अन्य स्टडी में सामने आया कि बच्चे असल में जन्म से पहले गर्भ में जो कुछ अनुभव करते हैं या कहें उनके शरीर में जो कुछ जाता है उसके आधार पर बच्चे सब्जियों को पसंद या ना पसंद करते हैं. इसके अलावा, कुछ रिसर्चर्स ने माना कि बच्चों पर जन्म के तुरंत बाद स्टडी होनी चाहिए. बच्चे की सब्जियों को लेकर पसंद या नापसंद जेनेटिक से कितनी इंफ्लुएंस होती है यह स्टडी में शामिल नहीं किया गया है.

किस तरह की गई यह स्टडी

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स्टडी के लिए रूई के टुकड़े को गाजर या केल के पाउडर में डुबाया गया और बच्चे की नाक के पास लाया गया. कुछ बच्चों के चेहरे पर रुई सूंघकर मुस्कुराहट दिखी तो कुछ ने मुंह बना लिया. बच्चों के इस रिएक्शन को वीडियो में रिकॉर्ड करके जांच की गई. स्टडी से पता चला कि जिन बच्चों को भ्रूण में गाजर का पाउडर दिया गया था वे ज्यादा खुश दिखे बजाय उनके जिन्हें केल का पाउडर दिया गया था.

भ्रूण में रहते हुए बच्चे भ्रूण को घेरने वाले एमनियोटिक फ्लुइड को सांस के जरिए और मुंह से अंदर लेते हैं. मां जो कुछ खाती है वह इस फ्लुइड के जरिए बच्चे तक पहुंचता है. मां के खाना खा लेने के 20 मिनट बाद बच्चे को अलग-अलग फ्लेवर्स और सुगंध अनुभव करने मिलते हैं.

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स्टडी के अनुसार, जिन बच्चों की मां को प्रेग्नेंसी के दौरान केल का पाउडर दिया गया था, जन्म के बाद उनके बच्चों को यह पाउडर कड़वा होने के बावजूद अच्छा लगा. ऐसे में स्टडी में गर्भावस्था में मां जो खाती है उससे बच्चे की सब्जियों को लेकर पसंद या नापसंद को लिंक करके देखा जा रहा है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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