महंगे स्मार्टफोन्स की बढ़ती कीमतों के कारण आज कई लोग पैसे बचाने के लिए रिफर्बिश्ड (Refurbished) स्मार्टफोन खरीदना पसंद कर रहे हैं. ऐसे फोन नए डिवाइस की तुलना में कम कीमत पर मिल जाते हैं, इसलिए बजट कम होने पर यह एक अच्छा विकल्प लग सकता है. लेकिन सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला लेना सही नहीं होता. रिफर्बिश्ड फोन खरीदने से पहले उसके फायदे के साथ-साथ उससे जुड़े जोखिमों को समझना भी जरूरी है. अगर कुछ जरूरी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बाद में आपको अतिरिक्त खर्च और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
क्या होता है रिफर्बिश्ड फोन?
रिफर्बिश्ड फोन वह स्मार्टफोन होता है जिसे किसी ग्राहक ने किसी वजह से वापस कर दिया हो या जिसमें कोई तकनीकी खराबी रही हो. ऐसे डिवाइस की मरम्मत करने के बाद उसकी टेस्टिंग और क्वालिटी चेक की जाती है और फिर दोबारा बिक्री के लिए तैयार किया जाता है. यह सामान्य सेकेंड हैंड फोन से अलग होता है, क्योंकि इसे बेचने से पहले जांच और रिपेयरिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है.
बैटरी की परफॉर्मेंस हो सकती है कमजोर
रिफर्बिश्ड फोन खरीदते समय सबसे पहले उसकी बैटरी पर ध्यान देना चाहिए. कई मामलों में फोन में पहले से इस्तेमाल की गई बैटरी होती है, जिससे बैटरी बैकअप कम मिल सकता है और फोन को बार-बार चार्ज करना पड़ सकता है. अगर बैटरी बदली भी गई हो, तो यह जरूरी नहीं कि वह ओरिजिनल क्वालिटी की ही हो.
वारंटी और सर्विस का रखें ध्यान
नए स्मार्टफोन की तुलना में रिफर्बिश्ड फोन पर आमतौर पर कम अवधि की वारंटी मिलती है. कई विक्रेता केवल 3 से 6 महीने की वारंटी देते हैं, जबकि कुछ मामलों में वारंटी सिर्फ चुनिंदा पार्ट्स तक सीमित होती है. ऐसे में अगर बाद में कोई बड़ी खराबी आती है, तो उसकी मरम्मत का खर्च आपको खुद उठाना पड़ सकता है.
पहले हुई रिपेयरिंग का असर भी पड़ सकता है
रिफर्बिश्ड फोन पहले से रिपेयर किए जा चुके होते हैं. अगर रिपेयरिंग के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले पार्ट्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है, तो फोन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है. बाद में कैमरा, डिस्प्ले, स्पीकर, चार्जिंग पोर्ट या टचस्क्रीन जैसी चीजों में दिक्कत आने की संभावना बनी रहती है.
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सॉफ्टवेयर अपडेट और नए फीचर्स की कमी
अधिकतर रिफर्बिश्ड फोन पुराने मॉडल होते हैं. ऐसे में हो सकता है कि उन्हें लंबे समय तक सॉफ्टवेयर या सिक्योरिटी अपडेट न मिलें. इससे न सिर्फ नए फीचर्स का फायदा नहीं मिल पाएगा, बल्कि साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं.
खरीदने से पहले इन बातों की जरूर करें जांच
अगर आप रिफर्बिश्ड फोन खरीदने का मन बना चुके हैं, तो खरीदारी से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच जरूर करें.
- हमेशा भरोसेमंद और अधिकृत विक्रेता से ही फोन खरीदें.
- वारंटी और रिटर्न पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें.
- फोन की बैटरी हेल्थ, डिस्प्ले, कैमरा और सभी जरूरी फीचर्स की जांच करें.
- IMEI नंबर और डिवाइस की ऑथेंटिसिटी जरूर वेरिफाई करें.
- खरीदारी के समय बिल और वारंटी कार्ड लेना बिल्कुल न भूलें.
क्या रिफर्बिश्ड फोन खरीदना सही फैसला है?
अगर आपका बजट सीमित है और आप किसी भरोसेमंद प्लेटफॉर्म या अधिकृत विक्रेता से वारंटी के साथ रिफर्बिश्ड फोन खरीदते हैं, तो यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. लेकिन सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला करना समझदारी नहीं होगी. बैटरी की स्थिति, वारंटी, रिपेयर हिस्ट्री और सॉफ्टवेयर सपोर्ट जैसी जरूरी बातों की जांच करने के बाद ही खरीदारी करें. थोड़ी-सी सावधानी भविष्य में होने वाले अतिरिक्त खर्च और अनावश्यक परेशानी से बचा सकती है.
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महंगे स्मार्टफोन्स की बढ़ती कीमतों के कारण आज कई लोग पैसे बचाने के लिए रिफर्बिश्ड (Refurbished) स्मार्टफोन खरीदना पसंद कर रहे हैं. ऐसे फोन नए डिवाइस की तुलना में कम कीमत पर मिल जाते हैं, इसलिए बजट कम होने पर यह एक अच्छा विकल्प लग सकता है. लेकिन सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला लेना सही नहीं होता. रिफर्बिश्ड फोन खरीदने से पहले उसके फायदे के साथ-साथ उससे जुड़े जोखिमों को समझना भी जरूरी है. अगर कुछ जरूरी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बाद में आपको अतिरिक्त खर्च और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
क्या होता है रिफर्बिश्ड फोन?
रिफर्बिश्ड फोन वह स्मार्टफोन होता है जिसे किसी ग्राहक ने किसी वजह से वापस कर दिया हो या जिसमें कोई तकनीकी खराबी रही हो. ऐसे डिवाइस की मरम्मत करने के बाद उसकी टेस्टिंग और क्वालिटी चेक की जाती है और फिर दोबारा बिक्री के लिए तैयार किया जाता है. यह सामान्य सेकेंड हैंड फोन से अलग होता है, क्योंकि इसे बेचने से पहले जांच और रिपेयरिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है.
बैटरी की परफॉर्मेंस हो सकती है कमजोर
रिफर्बिश्ड फोन खरीदते समय सबसे पहले उसकी बैटरी पर ध्यान देना चाहिए. कई मामलों में फोन में पहले से इस्तेमाल की गई बैटरी होती है, जिससे बैटरी बैकअप कम मिल सकता है और फोन को बार-बार चार्ज करना पड़ सकता है. अगर बैटरी बदली भी गई हो, तो यह जरूरी नहीं कि वह ओरिजिनल क्वालिटी की ही हो.
वारंटी और सर्विस का रखें ध्यान
नए स्मार्टफोन की तुलना में रिफर्बिश्ड फोन पर आमतौर पर कम अवधि की वारंटी मिलती है. कई विक्रेता केवल 3 से 6 महीने की वारंटी देते हैं, जबकि कुछ मामलों में वारंटी सिर्फ चुनिंदा पार्ट्स तक सीमित होती है. ऐसे में अगर बाद में कोई बड़ी खराबी आती है, तो उसकी मरम्मत का खर्च आपको खुद उठाना पड़ सकता है.
पहले हुई रिपेयरिंग का असर भी पड़ सकता है
रिफर्बिश्ड फोन पहले से रिपेयर किए जा चुके होते हैं. अगर रिपेयरिंग के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले पार्ट्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है, तो फोन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है. बाद में कैमरा, डिस्प्ले, स्पीकर, चार्जिंग पोर्ट या टचस्क्रीन जैसी चीजों में दिक्कत आने की संभावना बनी रहती है.
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सॉफ्टवेयर अपडेट और नए फीचर्स की कमी
अधिकतर रिफर्बिश्ड फोन पुराने मॉडल होते हैं. ऐसे में हो सकता है कि उन्हें लंबे समय तक सॉफ्टवेयर या सिक्योरिटी अपडेट न मिलें. इससे न सिर्फ नए फीचर्स का फायदा नहीं मिल पाएगा, बल्कि साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं.
खरीदने से पहले इन बातों की जरूर करें जांच
अगर आप रिफर्बिश्ड फोन खरीदने का मन बना चुके हैं, तो खरीदारी से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच जरूर करें.
- हमेशा भरोसेमंद और अधिकृत विक्रेता से ही फोन खरीदें.
- वारंटी और रिटर्न पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें.
- फोन की बैटरी हेल्थ, डिस्प्ले, कैमरा और सभी जरूरी फीचर्स की जांच करें.
- IMEI नंबर और डिवाइस की ऑथेंटिसिटी जरूर वेरिफाई करें.
- खरीदारी के समय बिल और वारंटी कार्ड लेना बिल्कुल न भूलें.
क्या रिफर्बिश्ड फोन खरीदना सही फैसला है?
अगर आपका बजट सीमित है और आप किसी भरोसेमंद प्लेटफॉर्म या अधिकृत विक्रेता से वारंटी के साथ रिफर्बिश्ड फोन खरीदते हैं, तो यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. लेकिन सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला करना समझदारी नहीं होगी. बैटरी की स्थिति, वारंटी, रिपेयर हिस्ट्री और सॉफ्टवेयर सपोर्ट जैसी जरूरी बातों की जांच करने के बाद ही खरीदारी करें. थोड़ी-सी सावधानी भविष्य में होने वाले अतिरिक्त खर्च और अनावश्यक परेशानी से बचा सकती है.
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