फोन से पर्सनल डेटा और फोटो-वीडियो लीक कर सकते हैं ये Apps, तुरंत करें डिलीट

क्या आपके फोन में भी ऐसे ऐप्स पड़े हैं जिन्हें आपने महीनों से नहीं खोला? अगर हां, तो यह आपकी प्राइवेसी, बैटरी और फोन की स्पीड के लिए खतरा बन सकते हैं. जानते हैं कौन-से एप्स को कर देना चाहिए डिलीट.

Delete App

महीनों से इस्तेमाल नहीं किए गए Apps को फोन में रखना पड़ सकता है भारी. (Photo-AI)

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हम में से ज्यादातर लोग जरूरत पड़ने पर कोई नया ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, लेकिन काम खत्म होने के बाद उसे हटाना भूल जाते हैं. धीरे-धीरे ऐसे कई ऐप फोन में जमा हो जाते हैं, जिनका हम महीनों तक इस्तेमाल भी नहीं करते. देखने में भले ही ये ऐप्स बेकार लगे, लेकिन ये आपकी प्राइवेसी, सिक्योरिटी और फोन की परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं. यही वजह है कि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स समय-समय पर फोन से पुराने और इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स हटाने की सलाह देते हैं.

सिर्फ ऐप हटाना ही नहीं, अकाउंट भी करें बंद

कई बार लोग किसी ऐप का इस्तेमाल एक-दो बार करने के बाद उसे भूल जाते हैं. अगर अब उस ऐप की जरूरत नहीं है, तो सिर्फ उसे अनइंस्टॉल करना ही काफी नहीं माना जाता. अगर उस ऐप पर आपका अकाउंट बना हुआ है, तो पहले उसमें लॉगआउट करें और जरूरत खत्म हो चुकी हो तो अकाउंट भी डिलीट या बंद कर दें. इससे आपकी निजी जानकारी लंबे समय तक कंपनी के सर्वर पर नहीं रहेगी.

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पुराने ऐप्स कई जरूरी परमिशन लिए रहते हैं

ऐसे कई ऐप्स होते हैं जिन्हें हम महीनों तक नहीं खोलते, लेकिन वे फोन में कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स और फोटो जैसी अहम परमिशन लेकर पड़े रहते हैं. कई ऐप्स बैकग्राउंड में भी काम करते रहते हैं, जिससे आपकी प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है.

डेटा चोरी और हैकिंग का बढ़ सकता है खतरा

अगर किसी पुराने ऐप में बाद में कोई सिक्योरिटी खामी सामने आती है या उसका डेटा लीक हो जाता है, तो आपकी निजी जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है. इसी वजह से साइबर सिक्योरिटी कंपनियां सलाह देती हैं कि समय-समय पर फोन में मौजूद ऐप्स की समीक्षा करें और जिनकी जरूरत नहीं है उन्हें हटा दें.

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फोन की परफॉर्मेंस पर भी पड़ता है असर

बिना इस्तेमाल वाले ऐप्स सिर्फ सिक्योरिटी के लिए ही नहीं, बल्कि फोन की स्पीड और बैटरी के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं. कई ऐप्स बैकग्राउंड में इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, लगातार नोटिफिकेशन भेजते हैं और समय-समय पर अपडेट डाउनलोड करते रहते हैं. इससे बैटरी जल्दी खत्म होती है, मोबाइल डेटा ज्यादा खर्च होता है और फोन पहले की तुलना में धीमा महसूस हो सकता है.

कई ऐप्स लगातार डेटा भी जुटाते रहते हैं

बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि कई ऐप्स यूजर की लोकेशन, इस्तेमाल का तरीका और दूसरी जानकारी लगातार इकट्ठा करते रहते हैं. भले ही आपने महीनों से उस ऐप को नहीं खोला हो, लेकिन अगर उसे जरूरी परमिशन मिली हुई है, तो वह कुछ डेटा जुटा सकता है. ऐसे ऐप्स को हटाना आपकी प्राइवेसी के लिए बेहतर माना जाता है.

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स्टोरेज खाली करने का भी आसान तरीका

आजकल कई ऐप्स का साइज कई सौ MB से लेकर 1GB या उससे भी ज्यादा होता है. ऐसे में जिन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन्हें हटाने से फोन में काफी स्टोरेज खाली हो सकती है. इससे नई फोटो, वीडियो और जरूरी फाइलों के लिए आसानी से जगह मिल जाती है.

जरूरत पड़ने पर App Archiving या Offload App का करें इस्तेमाल

अगर आपको लगता है कि भविष्य में किसी ऐप की जरूरत दोबारा पड़ सकती है, तो उसे पूरी तरह हटाने की बजाय उपलब्ध फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं. iPhone में Offload App और Android में App Archiving जैसे फीचर दिए जाते हैं. इनके जरिए ऐप हट जाता है, लेकिन उसका जरूरी डेटा सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर ऐप को आसानी से दोबारा इंस्टॉल किया जा सकता है.

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कितने समय में करनी चाहिए ऐप्स की सफाई?

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हर तीन महीने में कम से कम एक बार अपने फोन में इंस्टॉल सभी ऐप्स की जांच जरूर करें. जो ऐप्स लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुए हैं और जिनकी अब जरूरत नहीं है, उन्हें हटा देना बेहतर रहता है. इससे फोन हल्का रहता है, बैटरी बेहतर चलती है और सिक्योरिटी से जुड़े जोखिम भी काफी हद तक कम हो जाते.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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