टीनएजर्स को इंस्टाग्राम से लग रही सोशल मीडिया की लत, Meta पर केस दर्ज, मार्क जकरबर्ग पर लगे गंभीर आरोप

इंस्टाग्राम को लेकर मेटा एक बार फिर कानूनी विवाद में फंस गया है. अब इस पर आरोप है कि इंस्टाग्राम को ऐसे डिजाइन किया गया है जिससे टीनएजर्स सोशल मीडिया के आदी हो जाएगा. जानते हैं मामले की पूरी डिटेल्स.

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क्या Instagram बना रहा है बच्चों को सोशल मीडिया का आदी?

इंस्टाग्राम एक बार फिर विवादों में है. अमेरिका के टेनेसी राज्य ने मेटा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. आरोप है कि इंस्टाग्राम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि टीनएजर्स ज्यादा से ज्यादा समय ऐपर पर बिताएं. राज्य का कहना है कि इससे युवाओं में सोशल मीडिया की लत बढ़ रही है और उनके मेंटल हेल्थ पर भी बूरा असर पड़ रहा है.

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Meta पर क्या हैं आरोप?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में ये जांच की जाएगी कि क्या मेटा ने जानबूझकर इंस्टाग्राम को ऐसे फीचर्स के साथ तैयार किया है, जो टीनएजर्स को बार-बार ऐप इस्तेमाल करने के लिए उकसाता है. टेनेसी राज्य का आरोप है कि कंपनी ने यूजर्स की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का उल्लंघन किया है. आरोप में कहा गया कि मेटा ने ऐसा प्रोडक्ट बनाया, जिसका मकसद यूजर्स, खासकर किशोरों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म से जोड़े रखना है. ऐप का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि टीनएजर्स बार-बार Instagram खोलने और लगातार इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होते हैं.

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इंटरनल रिसर्च को छिपाने का भी आरोप

टेनेसी के अटॉर्नी जनरल जोनाथन स्करमेटी के ऑफिस से दायर मुकदने में दावा किया गया है कि मेटा ने अपनी इंटरनल रिसर्च के नतीजे आम लोगों के लिए सार्वजनिक नहीं किए. आरोप है कि इन रिसर्च में बताया गया था कि इंस्टाग्राम का किशोरों की मेंटल हेल्थ पर नेगेटिव असर पड़ सकता है, लेकिन कंपनी ने ये जानकारी लोगों से छुपाकर रखी.

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जकरबर्ग पर भी उठे सवाल

केस में ये भी कहा गया कि मेटा के संस्थापक और सीईओ मार्क जकरबर्ग को कंपनी के कई कर्मचारियों ने रिसर्च के नतीजों की जानकारी दी थी. कर्मचारियों ने ये भी बताया था कि इंस्टाग्राम का यूज टीनएजर्स पर किस तरह बुरा असर डाल रहा है. ऐसे में जकरबर्ग ने इसे कम करने के लिए कोई फंडिग नहीं की. साथ ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद नुकसानदायक कंटेट को लेकर सार्वजनिक रूप से भ्रामक बयान भी दिए गए.

कोर्ट से जुर्माना और बदलाव की मांग

टेनेसी के अटॉर्नी जनरल के कोर्ट से मेटा पर जुर्मना लागाने और इंस्टाग्राम में जरूरी बदलाव कराने की मांग की है. मुकदमें मे ऑटो-प्ले, इंस्टा रील्स और नेटिफेकेशन जैसे फीचर्स का भी जिक्र किया गया है. ये फीचर्स यूजर्स को इंस्टा पर लंबा समय बिताने पर मजबूर करते हैं.

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Meta ने क्या कहा?

रिपोर्ट के अनुसार, Meta का कहना है कि राज्य के आरोप Instagram पर यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट पर बेस्ड हैं. कंपनी का ये भी तर्क है कि अमेरिका के कम्युनिकेशन डिसेंसी एक्ट (section 230) के तहत किसी थर्ड पार्टी द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को कानूनी सुरक्षा मिलती है. ऐसे में कंपनी खुद को इन आरोपों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं मानती.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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