भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर छिड़ा विवाद गहरा गया है. चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म-6 के ऑनलाइन वर्जन में बदलाव और वोटर लिस्टों के काम को आपत्ति जताते हुए सवाल उठाए तो कांग्रेस और विपक्षी दलों के साथ-साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने CEC ज्ञानेश कुमार पर वोटर लिस्टों में हेरफेर करने के आरोप लगाते हुए इस्तीफा मांग लिया. इस बीच एक लेटर वायरल हुआ है, जिसे लेकर दावा किया गया है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने राष्ट्रपति मुर्मू को लेटर लिखकर इस्तीफा देने की पेशकश की है, लेकिन चुनाव आयोग ने लेटर को फर्जी और AI जनरेटेड बताते हुए लेटर पर भरोसा न करने की अपील की है.
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CEC ज्ञानेश कुमार किसे भेजेंगे इस्तीफा?
बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफा देने के नियम इलेक्शन कमिश्नर और अदर इलेक्शन कमिश्नर 2023 एक्ट की धारा 11 के तहत वर्णित किए गए हैं. नियम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त खुद भी पद से इस्तीफा दे सकते हैं और वे इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजेंगे. इन्हें राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए इस्तीफा लिखना होगा और इस्तीफा को राष्ट्रपति की मंजूर मिलने के बाद ही पद खाली माना जाएगा. नए मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
CEC के पद की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?
इलेक्शन कमिश्नर और अदर इलेक्शन कमिश्नर 2023 एक्ट के अनुच्छेद 324 के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की जिम्मेदारी देश में निष्पक्ष चुनाव कराना, मतदाता सूचियों को अपडेट करना और चुनाव की निगरानी करना है. लेकिर अगर मुख्य चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफा दे देते हैं तो न ही आयोग के किसी वरिष्ठ अधिकारी को उनका पद सौंपा जाएगा. हालांकि अनुच्छेद 324(2) के तहत राष्ट्रपति के पास अधिकार है, लेकिन अनुच्छेद 324(3) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त सिर्फ अध्यक्ष की भूमिका में रहेंगे और कोई चुनाव आयुक्त आधिकारिक आदेश के बिना मुख्य चुनाव आयुक्त न बनेगा न कहलाएगा.
CEC के इस्तीफे से क्या काम रुक जाएंगे?
वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफा देने के बाद चुनाव आयोग भंग नहीं होता है और न ही चुनाव आयोग का कोई काम रुकता है, बल्कि दोनों चुनाव आयुक्त आपस में तालमेल बिठाकर रोजमर्रा के कामकाम करते हैं और जरूरी प्रशासनिक फैसले लेते हैं. वे काम तब तक करते रहते हैं, जब तक नए मुख्य चुनाव आयुक्त निुयक्ति नहीं होते. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से कोई संवैधानिक संकट भी खड़ा नहीं होता है. क्योंकि चुनाव आयोग कई सदस्यों से मिलकर बना संस्थान है, जिसका काम किसी एक के न होने से रुकता नहीं, लेकिन नए मुख्य चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.
नए CEC का चुनाव किस प्रक्रिया से होगा?
बता दें कि इलेक्शन कमिश्नर और अदर इलेक्शन कमिश्नर 2023 एक्ट की धारा 7 के तहत नए मुख्य चुनाव आयुक्त का चुनाव करने के लिए 3 सदस्यों की कमेटी बनाई जाएगी. इस कमेटी के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ-साथ प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त कैबिनेट मंत्री सदस्य होते हैं. यह कमेटी सर्च कमेटी के द्वारा तैयार पैनल लिस्ट पर चर्चा करके अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजती है, जिसमें से एक नाम को राष्ट्रपति मंजूरी देते हैं. सर्च कमेटी पद के लिए योग्य अफसरों के नामों की लिस्ट बनाती है. वहीं चयन समिति के पास अधिकार होता है कि वह बाहर के किसी योग्य अधिकारी के नाम पर भी विचार कर सकती है. लेकिन ज्यादातर मामलों में वरिष्ठ चुनाव आयुक्त को ही नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया जाता है, वहीं सरकार किसी योग्य व्यक्ति को भी इस पद पर नियुक्त कर सकती है.