क्या है ITMS?
ITMS का मकसद रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा, अडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल, ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट और इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए मौजूदा सड़क नेटवर्क को बेहतर ढंग से मैनेज करना है. आसान भाषा में कहें तो इससे ट्रैफिक पर कम से कम रुकना पड़ेगा, ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण का स्तर भी घटेगा. ITMS प्रोजेक्ट को करीब 1,789 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. ये प्रोजेक्ट 42 चिन्हित ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर करेगा और इसे 24 महीनों में तीन चरणों में लागू किया जाएगा, जिसके बाद पांच साल तक इसका ऑपरेशन और रखरखाव किया जाएगा.
अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ITMS के बारे में जानकारी देते हुए कहा- दिल्ली में ट्रैफिक मैनेजमेंट, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई. उन्होंने आगे कहा- ”AI-इनेबल्ड अडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल, टेक्नोलॉजी-बेस्ड एनफोर्समेंट और रियल-टाइम ट्रैफिक जानकारी से यात्रा सुरक्षित और आसान और बनेगी.” केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा- ”इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम दिल्ली जैसे मेगासिटी के लिए बेहद जरूरी है. दिल्ली पुलिस इस दिशा में बहुत अच्छा काम कर रही है. इसे तीन चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें एक-एक करके खास कॉरिडोर को शामिल किया जाएगा.”
कैसे काम करेगा ITMS?
अभी दिल्ली के 1,529 ट्रैफिक सिग्नल तय समय पर काम करते हैं. उदाहरण के लिए, अगर कोई सिग्नल 30 या 35 सेकंड के लिए सेट है, तो वो पूरे समय के लिए लाल ही रहता है, चाहे एक तरफ ट्रैफिक ज्यादा हो और दूसरी तरफ कम. सिस्टम ऐसा होना चाहिए जो हालात के हिसाब से खुद को ढाल सके और इंटेलिजेंट हो यानी रियल-टाइम ट्रैफिक के मुताबिक सिग्नल का समय बदल सके. जहां ट्रैफिक बढ़ रहा हो वहां लाल बत्ती का समय कम कर दे और जहां सड़क खाली हो वहां उसे बढ़ा दे. ITMS के आने से CCTV और AI के इस्तेमाल से ना सिर्फ ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को आसानी से पकड़ा जा सकेगा, बल्कि चोरी की गाड़ियां भी ट्रेस हो जाएंगी.