FBI Most Wanted List Rules: कैसे तय होती है FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट? जानें चयन प्रक्रिया और कड़े नियम

FBI Most Wanted List Rules: अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने अपनी सबसे खतरनाक टॉप 10 मोस्ट वॉन्टेड भगोड़ों की नई सूची जारी की है. सूची में किसी अपराधी का नाम यूं ही शामिल नहीं होता. इसके लिए एजेंसी के 56 फील्ड ऑफिस से लेकर हेडक्वार्टर तक बेहद सख्त और लंबी चयन प्रक्रिया अपनाई जाती है. जानें किन दो बड़े पैमानों पर तय होती है FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट

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अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने अपनी सबसे खतरनाक टॉप 10 मोस्ट वॉन्टेड भगोड़ों की नई सूची जारी की है. credit: AI/x(FBI Los Angeles)

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FBI Most Wanted List Rules: अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) की ‘टेन मोस्ट वॉन्टेड फ्यूजिटिव्स’ सूची दुनिया भर में सबसे खतरनाक अपराधियों की पहचान मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सूची में किसी मुजरिम का नाम कैसे और किस आधार पर शामिल किया जाता है? इसकी शुरुआत साल 1950 में हुई थी, जब एक पत्रकार ने एफबीआई से देश के ‘सबसे खूंखार अपराधियों’ की पहचान मांगी थी. तब से लेकर आज तक इस लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए एजेंसी एक बेहद सख्त और तय प्रक्रिया का पालन करती है. इस सूची की एक खास बात यह भी है कि इसमें कोई ‘नंबर 1’ या रैंकिंग नहीं होती. सूची में शामिल सभी 10 अपराधी कानून की नजर में समान रूप से खतरनाक माने जाते हैं.

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चयन के दो सबसे बड़े पैमाने

एफबीआई किसी भी अपराधी को टॉप 10 में शामिल करने से पहले मुख्य रूप से दो बातों की गहराई से जांच करती है. पहला, आरोपी का अपराध इतिहास कितना हिंसक और खतरनाक है? क्या वह हथियारों से लैस है और वर्तमान में जनता की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बना हुआ है?
दूसरा, क्या उसकी तस्वीर और जानकारी दुनिया भर में फैलाने से जनता की मदद से उसे पकड़ने में सफलता मिलेगी? अगर कोई अपराधी पहले से ही बहुत मशहूर है और प्रचार का कोई नया फायदा नहीं मिलने वाला तो उसे अक्सर इस सूची में जगह नहीं दी जाती.

56 फील्ड ऑफिस से हेडक्वार्टर तक की प्रक्रिया

जब भी सूची में कोई जगह खाली होती है, यानी कोई मुजरिम पकड़ा जाता है या उसके खिलाफ मामला खत्म हो जाता है तो एफबीआई के सभी 56 फील्ड ऑफिस से नए नाम मांगे जाते हैं. स्थानीय दफ्तर अपने सबसे शातिर भगोड़ों की फाइल हेडक्वार्टर भेजते हैं. इसके बाद एफबीआई की ‘क्रिमिनल इन्वेस्टिगेटिव डिवीजन’ (CID) इन नामों की समीक्षा करती है. फिर विशेष एजेंटों और जनसंपर्क अधिकारियों की टीम मिलकर सबसे उपयुक्त उम्मीदवार का चयन करती है. अंत में एफबीआई डायरेक्टर की अंतिम मंजूरी के बाद ही नया नाम सार्वजनिक किया जाता है.

टॉप 10 मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में कौन-कौन?

अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) की आधिकारिक वेबसाइट FBI.gov पर दुनिया के सबसे खूंखार और शातिर अपराधियों की अपनी ‘Ten Most Wanted Fugitives’ लिस्ट अपडेट की है.

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  • गैंगस्टर गोल्डी बराड़ उर्फ सतिंदरजीत सिंह: भारत के कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ उर्फ सतिंदरजीत सिंह का नाम भी 543वें भगोड़े के रूप में दर्ज हो गया है. उस पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 9 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया है. लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट से जुड़ा यह गैंगस्टर अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी, रंगदारी और कई हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में वांछित है. FBI के लॉस एंजेलिस फील्ड ऑफिस के असिस्टेंट डायरेक्टर पैट्रिक ग्रैंडी ने बताया कि बराड़ एक बेहद खतरनाक अपराधी है और उसे पकड़ना सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता है.   
  • भद्रेशकुमार चेतनभाई पटेल : मैरीलैंड में अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के आरोप में फरार, जिस पर 10 लाख डॉलर का इनाम है.   
  • ट्रुंग डुक लू : फिलाडेल्फिया में दो सगे भाइयों के अपहरण, प्रताड़ना और हत्या के सनसनीखेज मामले में मोस्ट वॉन्टेड.   
  • अनिबल अलेक्जेंडर कनेलोन अग्युरे : अंतरराष्ट्रीय क्राइम व हिंसक वारदातों में शामिल वेनेजुएला का अपराधी.   
  • विल्वर विलेगास-पालोमिनो : कोलंबिया के विद्रोही संगठन ELN का सीनियर सदस्य, नार्को-टेररिज्म और कोकीन तस्करी के मामले में वॉन्टेड; 50 लाख डॉलर का इनाम.   
  • अलेजैंड्रो रोसालेस कैस्टिलो : नॉर्थ कैरोलिना में युवती की हत्या और डकैती के गंभीर मामले में लंबे समय से फरार.   
  • फाउस्टो इसिड्रो मेजा-फ्लोरेस : मेक्सिको के बड़े ड्रग कार्टेल का सरगना, जो बड़े पैमाने पर अमेरिका में हेरोइन, मेथ और कोकीन की सप्लाई के लिए जिम्मेदार है.
  • यूलान एडोने आर्चगा कैरियस : होंडुरास में खूंखार गिरोह ‘एमएस-13’ (MS-13) का कथित सरगना आर्चगा कैरियस संगठित अपराध का एक बड़ा नेटवर्क चलाता है. न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में उस पर रैकेटियरिंग, कोकीन आयात और अवैध मशीनगन रखने जैसे गंभीर संघीय अपराधों के तहत आरोप तय किए गए हैं.
  • जियोवानी विसेंट मोस्केरा सेरानो: जियोवानी विसेंट मोस्केरा सेरानो पर बड़े पैमाने पर कोकीन वितरण, आतंकी नेटवर्क को साजो-सामान व सामग्री सहायता देने और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं.  
  • रुजा इग्नाटोवा : ‘क्रिप्टो क्वीन’ के नाम से चर्चित रुजा इग्नाटोवा दुनिया के सबसे बड़े पोंजी और क्रिप्टो घोटालों में से एक ‘वनकॉइन’ की मास्टरमाइंड मानी जाती है. निवेशकों से अरबों डॉलर की धोखाधड़ी करने के बाद से वह फरार है.

FBI के अनुसार, इन भगोड़ों को समाज के लिए बेहद घातक माना जाता है. एजेंसी ने साफ किया है कि इन पर सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.   

कौन है भद्रेशकुमार चेतनभाई पटेल, लिस्ट में नाम

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI की ‘टॉप 10 मोस्ट वॉन्टेड’ सूची में शामिल भद्रेशकुमार चेतनभाई पटेल मूल रूप से भारत के गुजरात का रहने वाला है. वह अप्रैल 2015 से अमेरिकी जांच एजेंसियों की नजरों से फरार चल रहा है. मामला 12 अप्रैल 2015 की रात का है. अमेरिका के मैरीलैंड स्थित डोनट शॉप में नाइट शिफ्ट में काम कर रहे भद्रेशकुमार ने कहासुनी के चलते अपनी पत्नी पलक पटेल की रसोई के चाकू से हत्या की थी और बड़े ही शांत तरीके से स्टोर का ओवन बंद करके अपने कमरे पर गया, जरूरी सामान लिया और टैक्सी पकड़कर फरार हो गया. FBI ने भद्रेशकुमार की गिरफ्तारी या सटीक जानकारी देने वाले के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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