क्या दोनों चुनाव आयुक्तों को पद से हटा सकते हैं CEC ज्ञानेश कुमार? जानें क्या हैं नियम, प्रक्रिया और अधिकार

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को महाभियोग प्रस्ताव के जरिए पद से हटाया जा सकता है, लेकिन चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है? क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) उन्हें सीधे पद से बर्खास्त कर सकते हैं?

gyanesh kumar | vivek joshi | sukhbir singh sandhu

भारतीय चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों के बीच मतभेद उजागर हुए हैं. Credit- ECI

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भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर देश की सियासत गरमाई हुई है. चुनाव आयोग के दोनों चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने SIR और वोटर लिस्टों से जुड़े कई मामलों में उनसे चर्चा नहीं करने और राय-सहमति नहीं लेने के आरोप लगाए हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. विवाद के चलते कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगा है. विपक्षी दलों और कांग्रेस की महाभियोग लाने की तैयारी है तो ऐसे में क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) दोनों चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कोई एक्शन ले सकते हैं? क्या उनको पद से हटा सकते हैं? क्या उनके पास अधिकार है?

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दोनों चुनाव आयुक्तों के CEC से मतभेद जगजाहिर

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद सामने सामने आए हैं. एक रिपोर्ट जारी करके विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने दावा किया है कि पिछले 10 महीनों में वे SIR समेत 14 फैसलों पर लिखित असहमति और आपत्ति जता चुके हैं, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त को कोई फर्क नहीं पड़ा. इस घटनाक्रम की विपक्ष ने आलोचना की और कुछ NDA सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है. अब क्योंकि चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मतभेद जताए हैं तो तीनों के बीच मनभेद और तनाव होना लाजिमी है, लेकिन ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त दोनों के खिलाफ सीधा एक्शन नहीं ले सकते.

CEC चुनाव आयुक्तों को पद से नहीं हटा सकते?

संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) दोनों चुनाव आयुक्तों को सीधे पद से नहीं हटा सकते. क्योंकि उन्हें पद से हटाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास है. लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) दोनों चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की लिखित सिफारिश जरूर कर सकते हैं. सिफारिश मिलने के बाद राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट से विचार विमर्श करेंगे. इसके बाद ही वे अपना फैसला सुनाते हुए सिफारिश पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे. राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद ही चुनाव आयुक्तों को पद से हटाया जाएगा. यानी मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की भूमिका सिर्फ सिफारिश करने की है, सीधे पद से हटाने की नहीं है.

मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग से हटा सकते

बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश करके पद से हटाया जा सकता है, जिसे भी संसद में पास कराने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होगी. वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर पद से हटा सकते हैं, लेकिन ऐसा होने पर महाभियोग पास कराना ही होगा. जिसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सांसदों का दो-तिहाई बहुमत मिलना चाहिए. उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलनी चाहिए. लेकिन चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए महाभियोग की जरूरत नहीं है, बल्कि संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की लिखित सिफारिश राष्ट्रपति को जरूरी है.

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चुनाव आयुक्तों के खिलाफ नहीं हो सकती कार्रवाई

बता दें कि इलेक्शन कमिश्नर और अदर इलेक्शन कमिश्नर 2023 एक्ट की धारा 16 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों को सुरक्षा का कवच मिला है. यानी पद पर नियुक्त तीनों आयुक्त अगर कोई फैसला लेते हैं और उसे लागू करते हैं तो उनके खिलाफ न कोई केस दर्ज हो सकता है, न कार्रवाई हो सकती है और न ही अदालत सुनवाई कर सकती है. यह सुरक्षा कवच पूर्व आयुक्तों पर भी लागू होता है, लेकिन ऐसा नहीं कि तीनों को पद से नहीं हटाया जा सकता. बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को संसद में महाभियोग प्रस्ताव पास कराकर और दोनों चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की सिफारिश पर राष्ट्रपति पद से हटा सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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