जब शोमैन सुभाष घई ने 14 साल की उम्र में उठाया ये घातक कदम, चौक जाएंगे फैंस

Life Of Subhash Ghai : भारतीय फिल्मों के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर सुभाष घई ने कामयाबी हासिल करने के लिए अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा आया था, जब शोमैन सुभाष घई ने बड़ा ही घातक कदम उठाया था

Subhash Ghai

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Life Of Subhash Ghai : सफल शख्सियतें भी किस तरह जीवन में बड़े उतार-चढ़ाव देखती हैं, इसी का उदाहरण है शोमैन सुभाष घई की जिंदगी। उनसे जुड़ी कई निजी बातों का खुलासा हाल ही में उन पर लिखी किताब कर्मा चाइल्ड में हुआ है।

किताब की शुरुआत सुभाष घई द्वारा नीला थोथा (Dehydrated Copper Sulphate) खाकर जान देने की बात से ही होती है। इसके पीछे की कहानी कुछ यूं है कि एक बार सुभाष के अपने पिता के क्लीनिक से एक पैसे की चोरी थी और पिक्चर देखी, ये पता लगने के बाद उनके पिता आगबबूले हो गए और लकड़ी की छड़ी से उनकी मार लगी। पढ़ाई में कमजोर सुभाष अक्सर दोस्तों के साथ संगीत और नाटक की दुनिया में मशगूल रहते थे, ऐसे में उनके पिता से उनकी डांट लगती रहती थी। एक दिन वो गुस्सा होकर अपने किसी दोस्त के पास रहने चले गए। पर चार दिन बाद दोस्त के परिवार को दिल्ली से बाहर जाना था, ऐसे में सुभाष किसी किराना की दुकान में दिन में काम करते और रात को दुकान के बाहर पड़े लकड़ी के पट्टे पर सो जाते। पर फिर पिता ने उन्हें ढूंढ निकाला और वापस घर ले आए।

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जानें सुसाइड की क्यों की थी कोशिश?

14 साल की उम्र में अपने भाई-बहनों का ख्याल रखने वाले सुभाष जिंदगी से परेशान होकर एक दिन अपने पिता से पूछ बैठे कि आपने मुझे पैदा ही क्यों किया? ये सुनकर सुभाष के पिता का गुस्सा सातवें आसमां पर पहुंचा और उन्होंने उन्हें कसकर एक थप्पड़ मारा। कुपित होकर सुभाष ने नीले थोथे के एक पैकेट को एक कप पानी में मिलाया और पी गए। अगली सुबह उन्होंने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर पाया और उनके पिता उनके सिरहाने बैठे हुए थे। नीले थोथे के जहर से उनके पेट में काफी दर्द हो रहा था और वो काफी कमजोर भी महसूस कर रहे थे। इसी घटना के बाद उन्होंने ठाना कि वो एक दिन कुछ बनकर दिखाएंगे।

सुभाष को दिल की बात मानने को कहती थीं मां

किताब में बताया गया है कि सुभाष जब दस साल के थे, तभी उनके पैरेंट्स का सप्रेशन हो गया था। उनकी मां उनको काफी लंबे खत लिखा करती थीं और हमेशा उनसे अपने दिल की बात को मानने की बात कहती थीं। हीरो मूवी से लेकर कालिचरण और विश्वनाथ की सफलता के सोपान पर पहुंचे सुभाष घई किस तरह अपनी मां को इस बात के लिए मनाते हैं कि उनके बीमार पिता अपनी दूसरी पत्नी के साथ उनके साथ रह सके, इसका विवरण बहुत ही भावात्मक है।

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Abhishek Mehrotra

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अभिषेक मेहरोत्रा उन चुनिंदा पत्रकारों में शुमार हैं, जो हमेशा कुछ नया करने और खुद को समय से आगे रखने में प्रयासरत रहते हैं. प्रिंट मीडिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने डिजिटल जर्नलिज्म में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है. बतौर ग्रुप एडिटर डिजिटल News24 से जुड़ने से पहले अभिषेक मेहरोत्रा बिज़नेस वर्ल्ड में डिजिटल एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे थे. उन्होंने Zee मीडिया में डिजिटल एडिटर के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है. उनकी लीडरशिप में ज़ी न्यूज़ की वेबसाइट न केवल लोगों की पसंदीदा वेबसाइट बनी, बल्कि उसने नंबर 1 न्यूज़ वेबसाइट का मुकाम भी हासिल किया. अभिषेक मेहरोत्रा के कार्यकाल में जी न्यूज़ की वेबसाइट ने 100 मिलियन यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया था, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. अभिषेक मेहरोत्रा ने अपना करियर आगरा के स्वराज्य टाइम्स से जर्नलिज्म की पढाई के दौरान शुरू किया। उसके बाद अमर उजाला, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स के जरिए अपनी पत्रकारिता की पारी को आगे बढ़ाया। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में है जो आज के युग के मीडिया यानी वेब जर्नलिज्म के अच्छे जानकार माने जाते हैं। नवभारतटाइम्स ऑनलाइन के साथ वेब पत्रकारिता शुरू करने वाले अभिषेक का जागरण डॉट कॉम को एक बड़ी ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम योगदान रहा है। अभिषेक ने काफी पहले ही वेब वर्ल्ड की बारीकियों को समझ लिया था, क्योंकि वह जानते थे कि पत्रकारिता का भविष्य डिजिटल मीडिया में ही निहित है. आज वह अपनी उस समझ, ज्ञान, अनुभव और खबरों को बेहतर ढंग से समझने के कौशल के बल पर पत्रकारिता के स्तंभ को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने 5 सालों तक मीडिया स्ट्रीम से जुड़ी वेबसाइट समाचार4मीडिया डॉट कॉम में संपादकीय प्रभारी का दायित्व भी निभाया है. मीडिया जगत और वहां के बिजनेस मॉडल पर उनकी पैनी नजर के चलते वे मीडिया विश्लेषक के तौर पर भी जाने जाते हैं। खबरों की दुनिया के तमात दबाव और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के व्यंगकार को जीवित रखा है. उनके लेख अमर उजाला, आउटलुक हिंदी, चौथी दुनिया में बतौर व्यंग्यकार निरंतर प्रकाशित होते है. राज्यसभा डॉट कॉम और दैनिक जागरण के लिए वे विदेशी और समसमायिक मुद्दों पर लिखने वाले स्थापित कॉलमिनिस्ट हैं।
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