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US Tariffs on India: रूसी तेल खरीदने पर भड़का अमेरिका, भारत पर 100% टैक्स लगाने के लिए सीनेट में आया नया बिल

US Sanctions Bill on Russian Oil: अमेरिकी सीनेटरों ने रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन समेत 5 देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। जानिए भारत की मजबूरी और ट्रेड वार के इस नए खतरे का पूरा गणित।

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नई दिल्ली / वॉशिंगटन: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी सीनेट (US Senate) में एक नया और कड़ा प्रतिबंध विधेयक (Sanctions Bill) पेश किया गया है। इस बिल में प्रस्ताव रखा गया है कि रूस से तेल खरीदने वाले 5 प्रमुख देशों पर 100% तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि इन पांच देशों की लिस्ट में भारत भी शामिल है। अगर यह बिल पास होता है, तो अमेरिका को एक्सपोर्ट होने वाले भारतीय सामानों पर भारी टैक्स लग सकता है।

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क्या है यह नया अमेरिकी बिल?

अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह (Bipartisan Group) ने मंगलवार को एक नया प्रतिबंध विधेयक पेश किया है। इसका मुख्य मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को पूरी तरह से रोकना है ताकि वह यूक्रेन में युद्ध बंद करने पर मजबूर हो सके। जो 5 देश अमेर‍िका के निशाने पर हैं, उनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शाम‍िल हैं।

अगर प्रस्‍ताव को मंजूरी म‍िल जाती है तो इन देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर 100% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। बता दें क‍ि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) यह तय करेंगे कि किस देश पर कितना टैरिफ लगाना है। मीड‍िया र‍िपोर्ट्स के अनुसार इस बिल के समर्थकों का मानना है कि इसे अगस्त 2026 से पहले पास कराया जा सकता है।

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गौर करने वाली बात ये है क‍ि यह बिल अप्रैल 2025 में आए सैंक्शनिंग रशिया एक्ट का एक नरम रूप है। पिछले साल वाले बिल में तो 500% तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी, लेकिन वह वोटिंग तक नहीं पहुंच पाया था।

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भारत ने रूस से तेल खरीदना क्यों बढ़ाया?
इस पूरे मामले के पीछे एक बड़ी भू-राजनीतिक मजबूरी है। दरअसल, ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच सैन्य टकराव के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग पूरी तरह प्रभावित हो गई। भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% कच्चा तेल खाड़ी देशों (Gulf Countries) से इसी रास्ते से मंगाता था। रास्ता बंद होने के कारण भारतीय रिफाइनरियों के पास रूस से तेल खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

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मजेदार बात यह है कि खुद अमेरिका के प्रतिबंध नियंत्रण विभाग (OFAC) ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए विशेष लाइसेंस देकर इस व्यापार को अस्थायी मंजूरी दी थी, जिसकी समयसीमा हाल ही में 17 जून 2026 को खत्म हुई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो करीब €4.5 बिलियन (लगभग 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक) था। चीन के बाद भारत, रूस का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

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व्यापार वार्ता पर क्या पड़ेगा असर?
यह बिल ऐसे समय पर आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता चल रही है। इसी साल फरवरी में दोनों देशों के बीच भारतीय सामानों पर 18% टैरिफ की रूपरेखा तय हुई थी। लेकिन फरवरी के अंत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों (IEEPA) के जरिए टैरिफ लगाने को गैरकानूनी घोषित कर दिया, जिससे वह समझौता अटक गया।

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फिलहाल, भारतीय सामान 15% के फ्लैट अस्थाई टैरिफ पर अमेरिका जा रहे हैं, जिसकी अवधि 24 जुलाई 2026 को खत्म हो रही है। ऐसे में 100% टैरिफ का नया खतरा व्यापारिक रिश्तों को और उलझा सकता है।

अमेरिका के अंदर ही हो रहा है विरोध
इस बिल को लेकर खुद अमेरिका के राजनेताओं में मतभेद हैं। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेटिक सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने इसकी तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह रूस पर प्रतिबंध लगाने से ज्यादा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले दरवाजे से असीमित टैरिफ शक्तियां देने का जरिया है, जिसका नुकसान अंततः अमेरिकी परिवारों को भुगतना पड़ेगा।

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First published on: Jul 16, 2026 08:25 AM

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About the Author

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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