H-1B वीजा नियमों को तोड़ना पड़ेगा महंगा, 2.4 करोड़ का जुर्माना और 10 साल तक लग सकता है बैन

H-1B VISA Program: नियोक्ताओं पर कम से कम पांच साल का प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है. डॉक्यूमेंट्स से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों में भी जुर्माने में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है.

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5 हजार डॉलर की अधिकतम सजा को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर. (Photo: AI)

अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम से जुड़े नियमों का जानबूझकर उल्लंघन करना अब कंपनियों को महंगा पड़ सकता है. अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसमें गंभीर उल्लंघनों के लिए कंपनियों पर अधिकतम 2.4 करोड़ रुपये (2.5 लाख डॉलर) तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही कुछ कंपनियों को इमिग्रेशन कार्यक्रमों में भाग लेने से 10 साल तक बैन किया जा सकता है. H-1B वीजा फ्रॉड क्रैकडाउन एक्ट नाम का यह विधेयक टेक्सास की रिपब्लिकन सांसद बेथ वैन ड्यूएन ने पेश किया गया है.

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3 से 10 साल बढ़ा न्यूनतम प्रतिबंध

H-1B वीजा फ्रॉड क्रैकडाउन एक्ट का उद्देश्य उन नियोक्ताओं पर सख्ती बढ़ाना है, जो जानबूझकर H-1B कार्यक्रम के नियमों का उल्लंघन करते हैं. सबसे बड़ा बदलाव उन गंभीर मामलों में प्रस्तावित है, जिनमें अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने की योजना से जुड़े उल्लंघन शामिल हैं. ऐसे मामलों में जुर्माना मौजूदा 35 हजार डॉलर से बढ़ाकर 2.5 लाख डॉलर करने का प्रस्ताव है. साथ ही कंपनी पर लगने वाले न्यूनतम प्रतिबंध को तीन साल से बढ़ाकर 10 साल करने की बात कही गई है.

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जानबूझकर किए गए उल्लंघनों पर भी बढ़ेगा जुर्माना

विधेयक में अन्य जानबूझकर किए गए H-1B उल्लंघनों के लिए भी जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव है. मौजूदा 5 हजार डॉलर की अधिकतम सजा को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर तक करने की बात कही गई है. ऐसे मामलों में नियोक्ताओं पर कम से कम पांच साल का प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है. डॉक्यूमेंट्स से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों में भी जुर्माने में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है. एक श्रेणी में मौजूदा 250 से 2 हजार डॉलर के जुर्माने को बढ़ाकर 1 हजार से 10 हजार डॉलर किया जा सकता है. वहीं दूसरी श्रेणी में 2 हजार से 5 हजार डॉलर की मौजूदा सीमा बढ़ाकर 20 हजार से 50 हजार डॉलर करने का प्रस्ताव है.

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भारतीयों पर क्या पड़ेगा असर?

आपको बता दें कि H-1B वीजा का इस्तेमाल अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय आईटी और दूसरे प्रोफेशनल्स के बीच यह वीजा काफी पॉपुलर है. हालांकि, प्रस्तावित विधेयक का निशाना H-1B वीजा रखने वाले कर्मचारियों की बजाय नियोक्ता कंपनियां हैं. विधेयक की प्रायोजक बेथ वैन ड्यूएन का कहना है कि मौजूदा सजा कंपनियों को नियम तोड़ने से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है. उनका आरोप है कि H-1B कार्यक्रम का बड़े स्तर पर दुरुपयोग हुआ है और जानबूझकर नियम तोड़ने वाली कंपनियों को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने चाहिए.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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