अगर आप भी अपनी चाय की टपरी से लेकर बच्चों के स्कूल की फीस और अस्पताल का बिल चुकाने के लिए UPI (Unified Payments Interface) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है.
अब आपके ये UPI पेमेंट्स सिर्फ एक क्लिक में पैसे ट्रांसफर करने का जरिया नहीं रहेंगे, बल्कि सरकार इनके जरिए यह समझने की कोशिश करेगी कि देश में प्राइवेट एजुकेशन और हेल्थकेयर का कारोबार किस रफ्तार से बढ़ रहा है. लिहाजा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने एक नया और बड़ा प्रस्ताव रखा है.
आखिर सरकार को आपके UPI पेमेंट्स की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार देश की आर्थिक स्थिति और सेवाओं की तरक्की को मापने के लिए एक इंडेक्स बनाती है, जिसे सर्विस प्रोडक्शन इंडेक्स (ISP) कहा जाता है. फिलहाल इस इंडेक्स में होटल, ट्रांसपोर्ट, आईटी जैसी कई सेवाएं तो शामिल हैं, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी दो बड़ी सेवाओं का मंथली डेटा सरकार के पास पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पाता था. हमारे देश की कुल सर्विसेज GVA (Gross Value Added) में शिक्षा का हिस्सा करीब 7.2% और स्वास्थ्य का हिस्सा लगभग 3% (कुल 10% से ज्यादा) है.
अब सरकार हर महीने यह जानने के लिए कि कितने लोग प्राइवेट स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और लैबों में खर्च कर रहे हैं, UPI मर्चेंट कोड (MCC) के डेटा का इस्तेमाल करेगी.
स्कूल-कॉलेज की फीस से कैसे पता चलेगा पढ़ाई का हाल?
जब आप UPI से किसी स्कूल, कॉलेज या वोकेशनल इंस्टीट्यूट की फीस भरते हैं, तो हर संस्थान का एक खास मर्चेंट कोड (Merchant Category Code) होता है. सरकार इस कोड के जरिए पहचान लेगी कि पेमेंट स्कूल फीस के लिए हुई है, कॉलेज के लिए या किसी प्रोफेशनल कोर्स के लिए.
हालांकि सिर्फ पैसों का आंकड़ा देखकर अंदाजा नहीं लगाया जाएगा. सरकार इस डेटा को महंगाई दर (CPI for Education) से एडजस्ट करेगी, ताकि पता चल सके कि देश में पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी वास्तविक गतिविधियां (Real Education Activity) कितनी बढ़ी हैं.
अस्पताल के बिल और डॉक्टर की फीस भी आएगी काम
ठीक इसी तरह, जब आप किसी डॉक्टर, डेंटिस्ट, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब या अस्पताल में UPI से भुगतान करेंगे, तो मर्चेंट कोड से यह अलग-अलग दर्ज हो जाएगा कि पैसा अस्पताल में गया है या डायग्नोस्टिक लैब में. इसे स्वास्थ्य संबंधी महंगाई (CPI-Health) से एडजस्ट करके हर महीने प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर की गतिविधियों का नया इंडिकेटर तैयार किया जाएगा.
देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर होगी और भी साफ
इस नए कदम से भारत के सर्विस सेक्टर का डेटा ज्यादा पारदर्शी और मजबूत होगा. जुलाई 2026 से शुरू हुए इस इंडेक्स में पहले सर्विसेज GVA का सिर्फ 60% हिस्सा कवर होता था. एजुकेशन और हेल्थकेयर जुड़ने के बाद यह कवरेज बढ़कर 78.4% हो जाएगी.
सरकारी संस्थानों के खर्च का हिसाब सरकार अपने PFMS (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) से लेगी, जबकि प्राइवेट सेक्टर और आम जनता के खर्च का हिसाब आपके UPI पेमेंट्स के जरिए तय होगा.
आपके रोजाना के UPI पेमेंट्स से सरकार को किसी व्यक्ति की जासूसी नहीं करनी है, बल्कि सामूहिक रूप से (Aggregate Data) यह समझना है कि देश की जनता शिक्षा और स्वास्थ्य पर हर महीने कितना खर्च कर रही है. इससे सरकार को बेहतर नीतियां (Policies) बनाने और देश की आर्थिक ग्रोथ का सही अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी.