अगर आप नया मकान, प्लॉट या जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं या अपने मौजूदा प्रॉपर्टी के कागजातों की असलियत (Authenticity) जांचना चाहते हैं, तो यह खबर आपके बहुत काम की है. अब आपको प्रॉपर्टी के कागजातों और रजिस्ट्री की जांच कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और लंबी लाइनों में खड़े होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. राज्य सरकारों ने जमीन और प्रॉपर्टी से जुड़े सभी रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है. आइए, आपको बताते हैं कि अपने मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स की ऑनलाइन वेरिफिकेशन कैसे कर सकते हैं.
ऑनलाइन रजिस्ट्री जांचना क्यों जरूरी है?
पुराने समय में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में फर्जीवाड़े और एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने के मामले अक्सर सामने आते थे. डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स के आने से सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाएगी. ऑनलाइन रिकॉर्ड्स की मदद से आप तुरंत जान सकते हैं कि जमीन का असली मालिक कौन है. साथ ही ये जान पाएंगे कि संपत्ति पर कोई पुराना लोन या कानूनी विवाद है या नहीं, इसका पता आसानी से चल जाता है.
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री ऑनलाइन कैसे चेक करें?
हर राज्य का अपना आधिकारिक लैंड रिकॉर्ड पोर्टल जैसे उत्तर प्रदेश के लिए igrsup.gov.in, महाराष्ट्र के लिए Mahabhulekh, बिहार के लिए Bhumi Jankari आदि होता है. आइये आपको एक उदाहरण के साथ समझाते हैं कि ऑनलाइन जांच कैसे कर सकते हैं:
पोर्टल पर जाएं: अपने राज्य के स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट जैसे: igrsup.gov.in पर विजिट करें.
ऑप्शन चुनें: होमपेज पर मौजूद Property Details या Property Search / संपत्ति खोजें वाले टैब पर क्लिक करें.
जानकारी भरें: अपनी संपत्ति से जुड़ी जरूरी जानकारियां दर्ज करें, जैसे—जिला (District), तहसील/रजिस्ट्रार ऑफिस, संपत्ति का प्रकार, प्लॉट/खसरा नंबर, रजिस्ट्री नंबर, मालिक का नाम और रजिस्ट्रेशन की तारीख.
सर्च बटन दबाएं: पूरी जानकारी सबमिट करते ही आपकी प्रॉपर्टी का पूरा बायोडाटा और रजिस्ट्री डिटेल्स स्क्रीन पर आ जाएगी.
ऑनलाइन डिटेल्स से अपने कागजात कैसे मिलाएं?
स्क्रीन पर दिख रहे डाउनलोड/ऑनलाइन डॉक्यूमेंट में आपको ये जानकारियां मिलेंगी:
- जमीन के मालिक का नाम (Owner Name)
- रजिस्ट्री की तारीख और स्टाम्प ड्यूटी की रकम
- संबंधित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस का नाम
अपने पास मौजूद physical रजिस्ट्री के कागजों को इस ऑनलाइन रिकॉर्ड से मैच करें. अगर दोनों जगह सभी जानकारियां एक जैसी हैं, तो आपका डॉक्यूमेंट पूरी तरह असली (Genuine) है. आप चाहें तो इस ऑनलाइन रिकॉर्ड को डाउनलोड करके प्रिंट भी निकाल सकते हैं.
अगर Record Not Found दिखाए तो क्या करें?
अगर ऑनलाइन सर्च के दौरान स्क्रीन पर Record Not Found या Invalid Entry का मैसेज आता है, तो घबराएं नहीं! इसके दो कारण हो सकते हैं:
- डाटा अपडेट न होना: कई बार नई रजिस्ट्री का डाटा सिस्टम में अपडेट होने में थोड़ा समय लगता है.
- फर्जी रजिस्ट्री का खतरा: या फिर आपके पास जो कागजात हैं, उनमें कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा हो सकता है.
ऐसी स्थिति में तुरंत अपने इलाके के सब-रजिस्ट्रार (Sub-Registrar) ऑफिस जाएं और वहां के ऑफिशियल रजिस्टर/रजिस्ट्री बुक में अपनी एंट्री चेक कराएं. इसके लिए आमतौर पर 50 से 200 रुपये का मामूली शुल्क लगता है.
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले ये 2 डॉक्यूमेंट्स जरूर चेक करें
किसी भी प्रॉपर्टी में पैसा लगाने से पहले धोखाधड़ी से बचने के लिए इन दो कागजातों की जांच जरूर कर लें:
- भारमुक्त प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate – EC): यह सर्टिफिकेट दिखाता है कि उस प्रॉपर्टी पर पिछले सालों में कोई लोन, बैंक बंधक या कानूनी दावा तो नहीं है. अगर EC क्लियर है, तो प्रॉपर्टी कानूनी रूप से साफ-सुथरी है.
- दाखिल-खारिज (Mutation Record): यह इस बात की पुष्टि करता है कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन का मालिकाना हक (Ownership) पुराने मालिक से नए मालिक के नाम ट्रांसफर हो चुका है.
प्रॉपर्टी की खरीदारी जीवन की बड़ी पूंजी का निवेश होती है. इसलिए सिर्फ बेचने वाले की बातों पर भरोसा न करें. महज 5 मिनट का समय निकालकर अपने राज्य के ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन पोर्टल से डिजिटल वेरिफिकेशन करें और बेफिक्र रहें!