Explainer: आम बजट से कब और क्‍यों मर्ज हुआ रेल बजट, क्यों खत्म हुई 92 साल पुरानी परंपरा?

92 साल पुरानी परंपरा को खत्म कर साल 2017 में रेल बजट का आम बजट में विलय कर दिया गया. आइये जानते हैं क‍ि सरकार के इस फैसले के पीछे की क्‍या वजह थी और इसका क्‍या असर हुआ…

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रेल बजट को आम बजट से कब मर्ज क‍िया गया

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Rail Budget 2026: भारतीय वित्तीय इतिहास में 1 फरवरी 2017 का दिन बेहत महत्‍वपूर्ण है. क्‍योंक‍ि इसी दिन तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए पहली बार संयुक्त केंद्रीय बजट पेश किया था. ब्रिटिश काल से चली आ रही रेल बजट को अलग से पेश करने की प्रथा को खत्म कर इसे ‘जनरल बजट’ का हिस्सा बना दिया गया. भारतीय वित्तीय इतिहास इस व‍िलय को सबसे बड़े सुधारों में से एक मानते हैं. दरअसल, वो मानते हैं क‍ि रेल बजट का विलय केवल एक प्रशासनिक या कागजी बदलाव नहीं था, बल्कि भारतीय रेलवे को एक घाटे वाले विभाग से निकालकर एक आधुनिक और कुशल परिवहन ढांचे में बदलने की दिशा में उठाया गया कदम है.

आज वंदे भारत, अमृत भारत स्टेशन योजना और कवच प्रणाली जैसी सफलताएं इसी वित्तीय मजबूती का परिणाम हैं. सालों तक अलग से पेश किए जाने के बाद, मोदी सरकार ने इस परंपरा को क्‍यों खत्म कर द‍िया और इसका क्‍या असर हुआ, आइये आपको यहां ड‍िटेल में समझाते हैं…

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विलय का ऐतिहासिक सफर
1924 में ‘एकवर्थ कमेटी’ (Acworth Committee) की सिफारिश पर रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया था. उस समय भारत की कुल अर्थव्यवस्था में रेलवे का योगदान बहुत बड़ा था और बजट का लगभग 70-80% हिस्सा केवल रेलवे से संबंधित होता था. लेकिन समय के साथ अन्य क्षेत्रों (जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और सर्विस सेक्टर) का विस्तार हुआ और जीडीपी में रेलवे का हिस्सा गिरता चला गया. 21 सितंबर 2016 को मोदी सरकार ने नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस विलय को मंजूरी दी.

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विलय के पीछे क्‍या थे कारण (Why the Merger?)
पुरानी परंपरा को खत्‍म करना:
1924 में एकवर्थ कमेटी ने रेल बजट को इसलिए अलग किया था क्योंकि तब भारत की GDP में रेलवे का हिस्सा 70-80% था. साल 2016 तक आते-आते यह बहुत कम हो गया था, इसलिए अलग बजट का कोई तर्क नहीं बचा था.

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वित्तीय बोझ और लाभांश (Dividend): पहले रेलवे को केंद्र सरकार को ‘लाभांश’ देना पड़ता था. विलय के बाद रेलवे इस बोझ से मुक्त हो गया, जिससे उसे अपने विस्तार के लिए अधिक धन मिला.

राजनीतिक लोकलुभावनवाद पर रोक: अक्सर रेल मंत्री अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए नई ट्रेनों की घोषणा कर देते थे, जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं होती थीं. विलय से रेलवे को शुद्ध रूप से एक ‘परिवहन संगठन’ के रूप में देखा जाने लगा.

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प्रशासनिक जटिलता: दो अलग बजटों के लिए दो अलग-अलग प्रक्रियाओं और लेखा-जोखा (Accounting) की आवश्यकता होती थी, जिससे समय और संसाधन बर्बाद होते थे.

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एकीकृत बजट से क्‍या फायदे हुए (Benefits of Merger)
समग्र विकास की दृष्टि:
अब परिवहन के सभी साधनों (सड़क, जलमार्ग, हवाई और रेल) के लिए बजट एक साथ तय होता है. इससे ‘मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी’ (जैसे PM गति शक्ति) को बढ़ावा मिला.

पूंजीगत व्यय (Capex) में वृद्धि: विलय के बाद रेलवे को बजटीय सहायता में भारी वृद्धि हुई. आज रेलवे का बजट 2.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जो पहले संभव नहीं था.

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वित्तीय स्वायत्तता: अब रेलवे को सरकार को सालाना लाभांश (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) नहीं देना पड़ता, इस पैसे का उपयोग सुरक्षा और आधुनिकीकरण में किया जा रहा है.

निर्णय लेने में तेजी: वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच समन्वय बेहतर हुआ है, जिससे बड़ी परियोजनाओं (जैसे बुलेट ट्रेन, वंदे भारत) के लिए फंड जारी करना आसान हो गया है.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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