History of Indian Railway Budget: भारतीय रेल, देश में मात्र एक यात्रा की सुविधा नहीं देती, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में इसका बहुत बड़ा योगदान है. यह देश में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाले सेक्टर्स में से एक है. भारतीय रेल बजट का इतिहास (History of Rail Budget) बहुत पुराना और दिलचस्प है. भारत में रेल बजट की शुरुआत आजादी से पहले ही हो गई थी. 92 वर्षों तक अलग से पेश किए जाने के बाद, साल 2017 में मोदी सरकार ने रेल बजट को फिर से सामान्य बजट में मिला दिया. अब रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाता. आइये आपको बताते हैं कि भारत में पहली बार रेल बजट (Rail Budget) कब पेश किया गया था और इसे किसने पेश किया…
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पहली बार कब और किसने पेश किया?
रेल बजट (Rail Budget) पहली बार आजादी से पहले अंग्रेजों के शासनकाल में पेश किया गया था. हालांकि तब यह जनरल बजट का ही हिस्सा होता था, लेकिन सन 1920-21 की एकवर्थ कमेटी (Acworth Committee) की सिफारिशों के आधार पर रेल बजट को जनरल बजट (General Budget) से अलग कर दिया गया था. भारतीय रेलवे के लिए पहला अलग बजट 1924 में पेश किया गया था. उस वक्त ब्रिटिश अधिकारी सर चार्ल्स इनवेरारिटी (Sir Charles Innes) ने इसे पेश किया था.
स्वतंत्र भारत का पहला रेल बजट
रेल बजट पेश करने की परंपरा साल दर साल जारी रही और आजाद भारत का पहला रेल बजट 20 नवंबर 1947 को पेश किया गया. इसे स्वतंत्र भारत के पहले रेल मंत्री जॉन मथाई (John Mathai) ने पेश किया था. सन 1947 का रेल बजट केवल 126.69 करोड़ रुपये का था.
पहली बार शुरू की गई नई योजनाएं
जब जॉन मथाई ने 1947 में बजट पेश किया, तो उनका मुख्य ध्यान विभाजन के बाद रेल नेटवर्क को फिर से व्यवस्थित करने पर था. इसलिए बजट का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के परिवहन और रेल पटरियों के पुनर्निर्माण के लिए आवंटित किया गया था.
इसके साथ ही चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स की नींव रखने की योजना बनाई गई ताकि देश में खुद के इंजन बन सकें. इसी बजट के बाद तीसरे दर्जे (Third Class) के डिब्बों में सुधार और पंखे लगाने जैसी बुनियादी सुविधाओं की शुरुआत भी की गई थी.