आम जनता और देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत और होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बन रही सहमति के कारण तेल की कीमतों में यह बड़ी गिरावट देखने को मिली है.
आइए, जानते हैं कि क्रूड ऑयल क्यों सस्ता हुआ है और इससे भारत व आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा!
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कितनी गिरी कच्चे तेल की कीमतें?
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) में लगभग 5.9% की बड़ी गिरावट आई है और यह गिरकर 79.06 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. यह पिछले तीन हफ्तों का सबसे निचला स्तर है. वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी करीब 6.2% गिरकर 75.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चा तेल 177 रुपये की गिरावट के साथ करीब 7860 रुपये प्रति बैरल पर खुला.
क्यों अचानक घटने लगे कच्चे तेल के दाम?
कीमतों में इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के खतरे का टलना और कूटनीतिक बातचीत है.
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दुनिया का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) समुद्री रास्ते से तेल का व्यापार करता है. ईरान और ओमान के बीच बातचीत के बाद अब इस रास्ते से तेल के जहाजों (टैंकर्स) के सुरक्षित गुजरने का रास्ता साफ हो रहा है. दूसरी ओर कतर और ओमान की मध्यस्थता की बात करें तो कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और ओमान इस समझौते में अहम भूमिका निभा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी प्रशासन के बीच समझौते का ड्राफ्ट साझा किया जा रहा है.
भारत और आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. इसलिए जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होता है, तो भारत को सीधा फायदा मिलता है.
10,000 करोड़ रुपये की बचत: कच्चे तेल के दाम में हर 1 डॉलर की गिरावट से भारत का तेल आयात बिल (Import Bill) करीब ₹10,000 करोड़ कम हो जाता है. इससे देश की विदेशी मुद्रा बचती है.
महंगाई पर लगाम: क्रूड सस्ता होने से माल ढुलाई (Transport & Logistics) का खर्च कम होता है. इससे फल, सब्जियां, राशन और बाकी जरूरी सामान सस्ते होते हैं.
क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
अगर कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ हफ्तों तक 80 डॉलर के नीचे ही बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में बड़ी कटौती कर सकती हैं. वैश्विक शांति और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की तरफ बढ़ते कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गुड न्यूज लेकर आए हैं. अगर तेल की ये कम कीमतें टिकी रहीं, तो जल्द ही आपकी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल सस्ता भरा जा सकता है.