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GoC नियम बदले, नए आवेदन पर रोक… NHB सब्सिडी के लिए किसानों के सामने दोहरी मुश्किल

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा सब्सिडी नियमों और पात्रता में किए गए अचानक बदलावों के बाद किसानों और एग्री-इंटरप्रेन्योर्स के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है. एक तरफ जहां नए आवेदनों (GoC) पर रोक लगा दी गई है, वहीं दूसरी तरफ सब्सिडी दरें घटने से किसान न तो अपने खेतों में ढांचा तैयार कर पा रहे हैं और न ही उन्हें समय पर मंजूरी मिल पा रही है.

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अगर आप किसान हैं या बागवानी (Horticulture) और कोल्ड स्टोरेज के बिजनेस से जुड़े एग्री-इंटरप्रेन्योर (Agri-Entrepreneur) हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board – NHB) ने हाल ही में दो महत्वपूर्ण सार्वजनिक सर्कुलर जारी किए हैं, जिन्होंने सब्सिडी हासिल करने के नियमों और पात्रता (Eligibility) को पूरी तरह बदल दिया है.

हालांक‍ि मंत्रालय की ओर से ये हवाला द‍िया गया है क‍ि न‍ियमों और पात्रता में बदलाव क‍िसानों की बेहतरी के ल‍िए क‍िया गया है, लेक‍िन नए न‍ि‍यमों के आने के बाद किसान खासा परेशान नजर आ रहे हैं. इस पूरे मामले को समझने के लिए आइए सबसे पहले ये समझते हैं कि NHB के इन दो नए सर्कुलर में क्या बड़े बदलाव किए गए हैं और इसे लेकर क‍िसानों की क्‍या परेशान‍ियां हैं.

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सब्सिडी नियमों में संशोधन और नई शर्तें

21 अगस्त 2026 को एनएचबी ने सर्कुलर नंबर 2101 जारी क‍िया. इसमें NHB ने सब्सिडी ढांचे में बदलाव किया है और सरकारी पद पर बैठे लोगों या बड़े अधिकारियों के कृषि अनुदान लेने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है. नए बदलाव के बाद 5 श्रेणियों के लोग अब सब्सिडी नहीं ले सकेंगे. इसमें संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति, मंत्री, सांसद (MP), विधायक (MLA), नगर निगम के मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष शाम‍िल हैं.

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केंद्र या राज्य सरकार के मंत्रालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), स्वायत्त निकायों और स्थानीय निकायों में काम करने वाले कर्मचारी (ग्रुप डी / क्लास-IV कर्मचारियों को छोड़कर) भी इसका लाभ नहीं उठा सकेंगे. इसके अलावा रिटायर्ड सरकारी पेंशनभोगी जिनकी मासिक पेंशन 10000 रुपये या उससे अधिक है उन्‍हें भी सब्‍स‍िडी नहीं म‍िलेगी.

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परिवार की नई परिभाषा:
नए सर्कुलर में आवेदक के परिवार के दायरे को बढ़ाकर उसमें पति/पत्‍नी, माता-पिता, बेटे और बेटियों को भी शामिल कर द‍िया गया है. यानी नए न‍ियमों के अनुसार पर‍िवार का कोई एक व्‍यक्‍त‍ि ही प्रोजेक्‍ट के ल‍िए व‍ित्‍तीय मदद ले सकता है. उदाहरण के तौर पर अगर पत‍ि ने व‍ित्‍तीय मदद ले ली है तो उसकी पत्‍नी या उसके बेटा-बेटी या माता-प‍िता, कोई भी व‍ित्‍तीय सहायता नहीं ले सकेंगे.

संरक्षित खेती (Protected Cultivation) पर घटी सब्सिडी:
दूसरी ओर पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस आदि जैसे प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन के लिए दी जाने वाली सब्सिडी की दर को भी घटा दिया गया है. अब सामान्य क्षेत्रों में यह 35% और पहाड़ी या अनुसूचित क्षेत्रों में 45% कर दी गई है, जो पहले 50 फीसदी थी. यहां तक क‍ि सब्‍स‍िडी की ये दर पहले से पेंडिंग आवेदनों पर भी लागू हो रही हैं. केस-टू-केस (मामले के आधार पर) विचार किया जाएगा.

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नए आवेदनों पर अस्थायी रोक
21 अगस्‍त के सर्कुलर के बाद NHB ने 3 सितंबर 2026 को दूसरा सर्कुलर (सर्कुलर नंबर 146810) जारी क‍िया. इसके मुताब‍िक नए प्रोजेक्ट्स के आवेदनों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. NHB ने ग्रांट ऑफ क्लीयरेंस (Grant of Clearance – GoC) के लिए नए आवेदन (Fresh Applications) स्वीकार करने पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है. यानी जब तक जीओसी की बैठक नहीं हो जाती है, तब तक क्‍लीयरेंस नहीं म‍िलने वाली है.

क‍िसानों ने रखी अपनी बात
NHB के इन न‍ियमों और पात्रता में बदलाव के बाद आवेदन में और फसल की बुवाई में हो रही देरी के कारण क‍िसान खासा परेशान हो रहे हैं. आगरा, उत्‍तर प्रदेश के क‍िसान अंबरीष स‍िंह ने कहा क‍ि NHB के नए न‍ियमों के कारण पहले जहां किसानों को अपनी जेब या बैंक लोन से कुल लागत का सिर्फ 50% लगाना पड़ता था, वहीं अब सब्सिडी घटकर 35% होने से किसानों को 65% पैसा खुद लगाना पड़ेगा. यानी पॉलीहाउस या फार्म पॉन्ड बनाने की शुरुआती लागत और बैंक लोन का बोझ अब आम किसान पर 15% ज्यादा बढ़ गया है.

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सर्कुलर स्पष्ट कहता है कि सही पाए जाने वाले आवेदनों को 30 दिन में क्लीयरेंस मिलनी चाहिए. लेकिन अब अत्यधिक सतर्कता (Caution) के नाम पर आम किसानों की फाइलों में तरह-तरह की कागजी कमियां निकालकर उन्हें महीनों पेंडिंग में रख रहे हैं. सर्कुलर के तहत JIT को 15 दिन में इंस्पेक्शन रिपोर्ट देनी होती है. लेकिन जमीनी स्तर पर जियो-टैगिंग और डिजिटल वेरिफिकेशन के लिए अधिकारी समय पर खेत तक नहीं पहुंच रहे हैं. किसान बैंक से कर्ज लेकर स्ट्रक्चर खड़ा कर लेता है, लेकिन 35% की घटी हुई सब्सिडी का पैसा भी समय पर न मिलने से उस पर ब्याज बढ़ता जाता है.

नियम घटने (50% से 35%) और वेरिफिकेशन सख्त होने के बाद बैंक भी अब पुराने कृषि सब्सिडी प्रोजेक्ट्स के लिए भी आसानी से लोन पास नहीं कर रहे हैं. बैंक किसानों से extra collateral (अतिरिक्त गारंटी) मांग रहे हैं, जिससे छोटे किसानों का सपना अटक गया है.

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क्‍या हैं क‍िसानों की मांगें :
अंबरीष स‍िंह ने कहा क‍ि क‍िसान की कुल तीन मांगें हैं. पहली मांग है पुराने प्रोजेक्‍ट्स को होल्‍ड पर न रखा जाए. दूसरी मांग है जीओसी की मीट‍िंग करके पेंडेंसी खत्‍म क‍िया जाए. क‍िसानों की तीसरी मांग सब्‍स‍िडी को वापस 50 फीसदी करना है. अंबरीष स‍िंह ने कहा क‍ि व‍िकसित देशों की सरकारें भी क‍िसानों को 50 फीसदी की सब्‍स‍िडी दे रही हैं. अंबरीष स‍िंह ने क‍हा क‍ि अगर एनचीबी सब्‍स‍िडी को 35 फीसदी से दोबारा 50 फीसदी नहीं कर सकती, तो जीएसटी को घटाकर 18 से 5 फीसदी कर दें. आपको बता दें क‍ि फार्म पॉन्ड और पॉलीहाउस के ल‍िए क‍िसान 18% की जीएसटी देते हैं.

दूसरी ओर न्‍यूज24 ने NHB के ड‍िप्‍टी मैनेज‍िंग डायरेक्‍ट व‍िजय कुमार दोहरे से संपर्क करने की कोश‍िश की, लेक‍िन उनकी तरफ इस बारे में कोई जवाब नहीं द‍िया गया.

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क‍िसान करेंगे धरना प्रदर्शन
IGMA, नए न‍ियमों के कारण प्रभाव‍ित क‍िसानों के साथ 15 स‍ितंबर को NHB हेडक्‍वाटर के सामने धरना प्रदर्शन कर रहा है. इस प्रदर्शन में देशभर के क‍िसान शाम‍िल हो रहे हैं. क‍िसानों का धरना प्रदर्शन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक क‍िया जाएगा.

First published on: Sep 14, 2026 03:05 PM

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About the Author

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.

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