अगर आप प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं, तो यह खबर आपके भविष्य और पेंशन से सीधी जुड़ी है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ (EPF) के तहत अनिवार्य सैलरी लिमिट (Wage Ceiling) को 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है.
आइए, समझते हैं कि इस फैसले से आपकी टेक-होम सैलरी, पीएफ और पेंशन पर क्या असर पड़ेगा.
आखिर क्या है यह नया फैसला?
अभी तक के नियम के मुताबिक, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये तक होती है, उनके लिए पीएफ (PF) खाते में योगदान करना अनिवार्य होता है. 15000 रुपये से ज्यादा बेसिक सैलरी वालों के लिए यह नियम ऐच्छिक (Optional) रहता है.
अब इस सीमा को बढ़ाकर 25000 रुपये किया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि अब 25000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पाने वाले लाखों नए कर्मचारी अनिवार्य रूप से पीएफ और पेंशन योजना (EPS) के दायरे में आ जाएंगे.
कब से लागू होगा नया नियम?
वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट (Central Cabinet) के पास भेजा गया है. कैबिनेट की अंतिम मुहर के बाद कंपनियों को अपने पेरोल सिस्टम को अपडेट करने के लिए समय दिया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नया नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह लागू हो सकता है.
इससे पहले सितंबर 2014 में पीएफ की सैलरी लिमिट को 6500 रुपये से बढ़ाकर 15000 रुपये किया गया था.
किन कर्मचारियों को मिलेगा इसका फायदा?
प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी: यह फायदा संगठित क्षेत्र (Organised Private Sector) के उन कर्मचारियों को मिलेगा, जिनकी कंपनी में 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं.
नई नौकरियों वाले युवा: जिनकी बेसिक सैलरी 15000 से 25000 के बीच है, वे अब सीधे तौर पर सरकारी पेंशन और पीएफ बचत योजना से जुड़ सकेंगे.
सरकारी कर्मचारियों पर असर नहीं: केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारी अलग पेंशन नियमों के तहत आते हैं, इसलिए उन पर ईपीएस (EPS) के ये नियम लागू नहीं होते.
कंपनियों और सरकार पर क्या पड़ेगा असर?
सैलरी लिमिट बढ़ने का मतलब है कि पीएफ और पेंशन फंड में कंपनी (Employer) को ज्यादा अंशदान देना होगा. नियम के तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 8.33% हिस्सा नियोक्ता (कंपनी) द्वारा पेंशन योजना (EPS) में जमा किया जाता है. केंद्र सरकार भी इसमें 1.16% का योगदान देती है.
लिमिट बढ़ने से कंपनियों का खर्च (Cost to Company) बढ़ेगा और सरकार पर भी पेंशन सब्सिडी का वित्तीय बोझ बढ़ेगा. हालांकि EPFO की तरफ से अभी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह कदम देश के लाखों नौकरीपेशा लोगों के बुढ़ापे को वित्तीय रूप से और अधिक सुरक्षित बना देगा.