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US President Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं, लेकिन न दुनिया के लिए ट्रंप नए हैं और न ही ट्रंप के लिए दुनिया नई है। दुनियाभर के कूटनीतिज्ञ एक बात अच्छी तरह जानते हैं कि ट्रंप अमेरिका के सबसे अधिक Unpredictable President होंगे। क्योंकि वो कब क्या करेंगे? कैसे फैसला लेंगे? कोई नहीं जानता। दुनिया को लेकर उनके दिमाग में कौन-सा केमिकल लोचा चल रहा है! इसकी भविष्यवाणी करना बहुत मुश्किल है। डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में जंग के मोर्चे खोलेंगे या साम, दाम, दंड, भेद, नीति के जरिए शांति कायम करने में दमदार भूमिका निभाएंगे, यह कहना भी बहुत मुश्किल है। ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी का साइड इफेक्ट दुनिया में किस तरह दिखेगा? इसे लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

ऐसे में आज आपको बताने की कोशिश करते हैं कि ट्रंप 2.O में भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते किस तरह के होंगे? क्या प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ PM मोदी की बेहतरीन केमेस्ट्री से बिजनेस और इमिग्रेशन के मुद्दे पर भारत को लेकर अमेरिका का रुख लचीला होगा? चीन को लेकर अमेरिका किस रास्ते आगे बढ़ेगा? अमेरिका के लिए चीन जरूरी या मजबूरी? क्या शपथ ग्रहण से पहले ही दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी कर चुके हैं ट्रंप? क्या ट्रंप के दबाव से ही इजरायल और हमास सीजफायर के लिए तैयार हुए हैं? रूस और यूक्रेन को लेकर क्या है ट्रंप का फ्यूचर प्लान? गाजा से ग्रीनलैंड तक…कनाडा से पनामा तक… एशिया से यूरोप तक किस तरह दिखेगा ट्रंप फैक्टर…आज ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे।

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170 मिलियर डॉलर चंदे से शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन

अमेरिका में आज औपचारिक रूप से अमेरिका में ट्रंप युग शुरू हो जाएगा। प्रचंड ठंड और बर्फीली हवाओं की वजह से डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह की जगह बदल दी गई है । शपथ ग्रहण समारोह अब Capitol Hill के अहाते में खुले में न होकर Capitol Rotunda नामक हॉल में होगा। करीब 4 साल पहले पूरी दुनिया ने ट्रंप समर्थकों का तांडव इसी कैपिटल हिल में देखा था, लेकिन लोकतंत्र में किसे सत्ता में रहना है और किसे नहीं, यह जनता तय करती है। अमेरिका की अवाम के दिलों को जीतने में ट्रंप कामयाब रहे। ट्रंप समर्थकों का जोश हाई है। इसलिए उनके लिए Capitol One Arena में बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाई गई हैं, जहां करीब 20 हजार लोगों के बैठने का इंतजाम है।

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आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए भी 170 मिलियन डॉलर से अधिक का चंदा जुटाया जा चुका है और इसे 200 मिलियन डॉलर तक पहुंचाने का टारगेट रखा गया है। भारत की ओर से ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर होंगे तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी जगह उप-राष्ट्रपति हान झेंग को भेजने का फैसला किया है। इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का भी शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होना तय माना जा रहा है। इन सबसे इतर कूटनीतिज्ञ यह हिसाब बैठाने में लगे हैं कि ट्रंप 2.O का साइड इफेक्ट किस तरह से दिखेगा? इससे पहले यह समझते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की टीम में किसे कौन-सा काम दिया गया है? भारतीय मूल के लोगों का ट्रंप प्रशासन में किस तरह का रोल होगा?

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भारत के लिए ट्रंप 2.0 में खड़ी हो सकती हैं मुश्किलें

अमेरिका की नवनिर्वाचित उप-राष्ट्रपति जेसी वेंस की पत्नी उषा चिलुकुरी का कनेक्शन आंध्र प्रदेश से है। कार्यक्षमता बढ़ाने वाले महकमे के कप्तान चुने गए एलन मस्क के साथ नामित किए गए विवेक रामास्वामी की जड़ें केरल से जुड़ी हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक पद के लिए जय भट्टाचार्य पसंद बने, जो कोलकाता से जुड़े हैं। गुजरात से ताल्लुक रखने वाले काश पटेल को FBI का डायरेक्टर बनाया जाना तय है। तुलसी गबार्ड राष्ट्रीय खुफिया विभाग के प्रमुख की कुर्सी पर दिखेंगी।

भारत पर ऐसे पड़ सकता है ट्रंप 2.0 का इफेक्ट

लेकिन एक सच यह भी है कि अमेरिकी मूल के भारतीय पहले अमेरिकी हितों के बारे में सोचेंगे, न कि भारत के फायदे के बारे में सोचेंगे। उनके दिमाग में ट्रंप का America First और Make America Great Again सबसे पहले रहेगा। ट्रंप भी अच्छी तरह जानते हैं कि आज की तारीख में बिना भारत को साथ लिए Make America Great Again का सपना पूरा नहीं होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन के औपचारिक रूप से एक्शन में आने के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है। सामरिक और सुरक्षा सहयोग जहां बढ़ने की संभावना है, वहीं बिजनेस और इमिग्रेशन के मोर्चे पर ट्रंप की नीतियां भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप खुलकर कह चुके हैं कि भारत के निर्यात पर टैरिफ बढ़ाएंगे। नौकरी के लिए H1B वीजा की प्रक्रिया को भी मुश्किल बनाया जा सकता है।

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एलन मस्क बन सकते हैं भारत के साथ डील मेकर

आज की तारीख में भारत और अमेरिका के बीच करीब 200 बिलियन डॉलर का कारोबार होता है। 3 लाख से ज्यादा भारतीय अमेरिका में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। अमेरिका की सिलिकॉन वैली भारतीयों के टैलेंट से चमक रही है। अमेरिका के आर्थिक और सियासी आसमान में भारतीय समुदाय के लोग ध्रुव तारा की तरह चमक रहे हैं। ऐसे में बतौर प्रेसिडेंट ट्रंप चाहेंगे कि भारत के साथ अमेरिका की केमेस्ट्री बेहतर बनी रहे। वहीं बिजनेस टायकून एलन मस्क चाहेंगे कि भारत उनकी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए बड़ा बाजार बने। वे भारत में अपनी कंपनी स्टारलिंक और स्पेसएक्स के लिए भी जगह बनाते दिख सकते हैं। माना जा रहा है कि स्पेसएक्स और इसरो के बीच भविष्य में साझेदारी की स्क्रिप्ट पर काम दिख सकता है। डोनाल्ड ट्रंप को एक डील मेकर के तौर पर देखा जाता है। इस काम में उन्हें गजब की महारत हासिल है।

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उनके शपथ ग्रहण समारोह के करीब 24 घंटे बाद अमेरिका में Quadrilateral Security Dialogue यानी QUAD की बैठक होनी है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे। QUAD के मंच को चीन अपने खिलाफ घेराबंदी की तरह देखता है। ट्रंप की पहली पारी में अमेरिका और चीन के बीच छिड़ी ट्रेड वार पूरी दुनिया देख चुकी है। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप चीन पर भारी-भरकम टैक्स लगाने का ऐलान कर चुके हैं। ऐसे में अगर ट्रंप प्रशासन 2.O में वाशिंगटन का रवैया बीजिंग के खिलाफ पहले से अधिक आक्रामक रहा तो चीन-अमेरिका के रिश्तों में तल्खी बढ़नी तय है। दरअसल, ट्रंप का फोकस ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन के प्रभाव को कम करने का है, लेकिन एक सच यह भी है कि अमेरिका की नई हुकूमत के लिए Make America Great Again के सपने को पूरा करना बिना चीन की मदद के असंभव जैसा है।

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चीन के लिए बदल सकता है अमेरिका का रुख

क्रिकेट और कूटनीति में कभी भी और कुछ भी हो सकता है। अपने शपथ ग्रहण समारोह से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का फोन घुमा दिया। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रंप ने लिखा कि दुनिया को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए मैं और राष्ट्रपति जिनपिंग मिलकर काम करेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका के राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठने के बाद चीन को लेकर ट्रंप का मन बदल जाएगा? क्या वो अमेरिका में पहुंचने वाले चाइनीज प्रोडक्ट्स पर भारी-भरकम टैक्स नहीं लगाएंगे? कूटनीति की नब्ज टटोलने वाले डॉक्टरों की सोच है कि अगले 4 साल तक चीन और अमेरिका के रिश्ते बहुत हैरान करने वाले दिख सकते हैं।

इसमें कहीं दोनों एक-दूसरे को ललकारते दिखेंगे तो कहीं एक-दूसरे के साथ गलबहियां करते नजर आएंगे। कूटनीतिज्ञ ट्रंप को बहुत जुनूनी मानते हैं। कहा यह भी जा रहा है कि इजरायल और हमास के बीच युद्ध विराम कराने के पीछे भीतर खाने ट्रंप का दबाव रहा। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इसी तरह अपने वादे के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच भी ट्रंप युद्धविराम करा देंगे? क्या कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने में कामयाब हो जाएंगे? क्या डेनमार्क से ग्रीनलैंड छीन लेंगे? पनामा नहर और मैक्सिको की खाड़ी को लेकर किस प्लान पर आगे बढ़ते दिख सकते हैं अमेरिका के नए राष्ट्रपति?

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डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय

कोई डोनाल्ड ट्रंप को जुनूनी कहता है, कोई तुनकमिजाज, कोई अति आत्ममुग्ध, कोई Unpredictable, कोई Deal Maker, कोई Very Calculative Man तो कोई Pragmatic Politician कहता है, लेकिन अमेरिका के अगले राष्ट्रपति ट्रंप इन सभी का मिलाजुला रूप हैं। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि ट्रंप ने जो कुछ चुनाव प्रचार के दौरान कहा, जो वादा लोगों से किया, उसे ही अपनी दूसरी पारी में अमलीजामा पहनाते दिखें। लेकिन Make America Great Again के लिए जहां जरूरत होगी, वे सख्त हो जाएंगे। जहां जरूरत होगी, वहां डील की टेबल पर बैठे दिखेंगे।

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ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मॉस्को, बीजिंग और तेहरान के बीच केमेस्ट्री बेहतर हुई है। यह तिकड़ी अमेरिका डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की स्क्रिप्ट पर काम कर रही है। इतना ही नहीं, कल तक अमेरिका की छतरी तले खड़े दिखने वाले मुस्लिम वर्ल्ड के कई अहम खिलाड़ियों को भी इस तिकड़ी ने नया रास्ता दिखा दिया है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की भीतरखाने कोशिश होगी, किसी भी तरह से रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर करा दिया जाए। उसके बाद अमेरिका मॉस्को को बीजिंग से दूर करना चाहेगा। इसमें रूस के राष्ट्रपति पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप की पर्सनल केमिस्ट्री मददगार साबित हो सकती है।

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डोनाल्ड ट्रंप एक ओर चीन के साथ सशर्त कारोबार चाहेंगे, जिसमें अमेरिका का पलड़ा भारी हो। दूसरी ओर इस क्षेत्र में सैन्य तैयारियों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं चाहेंगे। ऐसे में ट्रंप प्रशासन चाहेगा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के वर्चस्व को रोकने के लिए भारत का तरकश मजबूत होता रहे। ट्रंप प्रशासन 2.O में विश्व व्यापार संगठन, संयुक्त राष्ट्र और नाटो जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के ढांचे और प्रभाव में बड़े बदलाव की भविष्यवाणी की जा रही है।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी दूसरी पारी के शुरुआती 100 दिनों में दुनिया को किस तरह प्रभावित करते हैं। वे फैसले दिल से लेते हैं या फिर दिमाग से? दुनिया के झगड़ों में अमेरिकी हथियार कंपनियों का फायदा देखने वाली सोच के साथ आगे बढ़ते हैं या दुनिया के झगड़ों को निपटाने में एक जिम्मेदार नेता की भूमिका निभाते हैं?

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First published on: Jan 20, 2025 09:58 AM

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Anurradha Prasad

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