Sunil Sharma
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Kaal Bhairav Ashtami: भगवान शिव के अवतार कालभैरव या भैंरूजी को एक उग्र देवता माना गया है। वह श्मशान में वास करते हैं और जगत के समस्त भूतों के अधिपति हैं। कई बार जब ज्योतिष के सारे उपाय फेल हो जाते हैं, तब उनकी शरण में जाने से बड़े से बड़े बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं।
आम तौर पर भैरव या भैंरूजी के उपाय शनिवार अथवा रविवार को किए जाते हैं। परन्तु यदि इन उपायों को विशेष मुहूर्त यथा होली, दिवाली या भैरव अष्टमी के दिन किया जाए तो विशेष लाभ होता है। इस वर्ष 16 नवंबर 2022 (बुधवार) को कालभैरव जयंती है। इस दिन कुछ बहुत ही आसान से उपाय कर आप भी अपने समस्त कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं। ये उपाय करने में जितने आसान हैं, उतना ही जल्दी लाभ भी पहुंचाते हैं। जानिए ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में
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इस बार कालभैरव अष्टमी या जयंती 16 नवंबर 2022 (बुधवार) को है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 16 नवंबर को सुबह 5.49 बजे आरंभ होगी और समापन 17 नवंबर को सुबह 7.57 बजे होगा।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष के ज्ञान पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। news24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
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