Sunil Sharma
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Bageshwar dham: इन दिनों बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और मेंटलिस्ट सुहानी शाह काफी चर्चा में है। बागेश्वर धाम में भक्तों और जिज्ञासुओं से पूछे बिना ही उनकी समस्या बताने का चमत्कार किया जाता है। वहीं दूसरी ओर सुहानी शाह इसे चमत्कार न मानते हुए एक ट्रिक मानती है। वह कहती है कि इस ट्रिक को कोई भी सीख सकता है। प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार ऐसी सिद्धियां वास्तव में होती हैं। वे अपना चमत्कार भी दिखाती हैं। परन्तु उनके लिए एक पूरा प्रोसेस फॉलो करना होता है।
हिंदू धर्म और आध्यात्म से जुड़े कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ साधनाओं के जरिए व्यक्ति चमत्कारी शक्तियां पा सकता है। उनका उपयोग और प्रदर्शन कर सकता है, उनसे लाभ उठा सकता है। हालांकि इसके लिए कड़ी साधना करनी होती है, कठोर अनुशासन का पालन करना होता है, तब जाकर इनकी झलक मात्र मिल पाती है। जानिए ऐसी ही कुछ बातों के बारे में
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पातंजल योग सूत्र के विभूति पाद में कहा गया है कि हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं। इन चक्रों को यदि किसी योग्य गुरु के दिशा-निर्देशन में सही तरह से जागृत कर लें तो दिव्य शक्तियां मिल जाती हैं। सभी शक्तियों के लिए अलग-अलग साधना करनी होती है। आप क्या चीज पाना चाहते हैं, उसके आधार पर ही आपके गुरु आपको साधना करवाएंगे।
योगियों के अनुसार दिव्य दृष्टि भी ऐसी ही एक सिद्धी है जिसमें व्यक्ति बिना कहे ही दूसरों के मन की बात जान सकता है। वह दूसरों का भूत, भविष्य और वर्तमान एक क्षण में देख सकता है। इसे पाने के लिए आपको सबसे पहले एक योग्य गुरु ढूंढना होगा जो आपका सही तरह से मार्गदर्शन कर सकें। गलत गुरु का मिलना आपको शिजोफ्रेनिया का भी शिकार बना सकता है।
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योग की तरह तंत्र में भी कुछ क्रियाएं बताई गई हैं। ये क्रियाएं Bageshwar dham वाले धीरेन्द्र शास्त्री के समान दिव्य शक्तियां प्रदान कर सकती हैं। ये क्रियाएं बहुत ही खतरनाक होती हैं और जान जाने या पागल होने का भी खतरा होता है। हालांकि इनसे बहुत कम समय में ही सिद्धि प्राप्त हो जाती हैं। जबकि योग के मार्ग में कई वर्षों का समय लग सकता है। इन तांत्रिक क्रियाओं (Tantra Mantra) के जरिए भूत, प्रेत, यक्ष आदि को नियंत्रित कर उनसे काम लिया जाता है। तंत्र के जानकारों के अनुसार ऐसे कर्मकांडों से दूर ही रहना चाहिए।
यदि आप अपने गुरु की खूब सेवा करते हैं, उन्हें प्रसन्न रखते हैं तो आपको भी ये दिव्य शक्तियां मिल सकती हैं। गुरु चाहें तो अपनी कृपादृष्टि या आशीर्वाद के द्वारा भी शिष्य को दूसरों के मन की बात जानने का वरदान दे सकते हैं। परन्तु इसके लिए आवश्यक है कि गुरु तो योग्य हो ही, साथ में शिष्य भी उस क्षमता को धारण करने योग्य हों। अन्यथा इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
(Tramadol)
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