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PoK में क्यों है अलग राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और झंडा? जानिए इस व्यवस्था के पीछे पाकिस्तान की साजिश का सच

PoK की वर्तमान अस्थिरता में Joint Awami Action Committee (JAAC) और पाकिस्तान के सैन्य-राजनीतिक तंत्र के बीच संभावित मुकाबला बढ़ रहा है. हाल की कार्रवाई में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई, 1.4 लाख लोग नए प्रदर्शनों में उतरे.

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मुजफ्फराबाद में शुरू हुए ताजा संघर्ष और पाकिस्तान की कड़ी कार्रवाई के बाद पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) की राजनीतियां संरचना फिर से चर्चा में है. पाकिस्तान के कब्जे में होने के बावजूद PoK में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, विधानसभा और अलग झंडा क्यों है? सवाल उठते हैं, क्योंकि ये सब संस्थाएं वास्तव में पाकिस्तान के केंद्रीय सत्ता-तंत्र के हाथ में हैं, दरअसल अलग-राष्ट्र की छवि केवल बाहरी दिखावा है.

Pok में अब तक 27 लोगों की मौत


PoK की वर्तमान अस्थिरता में Joint Awami Action Committee (JAAC) और पाकिस्तान के सैन्य-राजनीतिक तंत्र के बीच संभावित मुकाबला बढ़ रहा है. हाल की कार्रवाई में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई, 1.4 लाख लोग नए प्रदर्शनों में उतरे. इन घटनाओं के बीच PoK के प्रधानमंत्री फैसाल मुमताज राठौर ने वार्ता की मांग की, लेकिन असली तनाव राजनीतिक अधिकार और पाकिस्तान के हस्तक्षेप पर बने सवाल से जुड़ा है.

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असली ताकत पाकिस्तानी सेना के पास


पाकिस्तान इसे ‘आजाद जम्मू-कश्मीर’ कहता है, लेकिन ये स्पेशल स्टेटस सिर्फ आंकड़ों में है. 1949 की कराची समझौता से रक्षा, विदेशी मामले और संचार जैसे मुख्य विषय पाकिस्तान के हाथ में गए और 1974 के अंतिम गठन-अधिनियम से PoK में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा का ढांचा बना. लेकिन असली सत्ता इस्लामाबाद और रावलपिंडी में वहां के सैन्य और सिविल तंत्र के हाथों में है.

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क्या है पाकिस्तान की साजिश?


इस ढांचा को भारत के अब हटाए गए अनुच्छेद 370 से तुलना की जाती है, लेकिन ये सिर्फ एक दिखावा है. अनुच्छेद 370 भारत के संविधान में था और जम्मू-कश्मीर के भारत में समावेश के तर्ज पर बना, PoK की व्यवस्था पाकिस्तान की राजनीतिक-विदेशीय गणनाओं से निकली, जिसका उद्देश्य PoK को आधिकारिक रूप से पाकिस्तान के फेडरेशन में मिलाए नहीं, बल्कि ‘विवदित’ क्षेत्र बनाए रखकर पूरे जम्मू-कश्मीर पर दावा बरकरार रखना है.

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First published on: Jun 11, 2026 05:19 PM

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