भारतीय चुनावी सिस्टम के कायल हुए डोनाल्ड ट्रंप, बोले- ‘भारत में होते हैं अमेरिका से ज्यादा सुरक्षित इलेक्शन’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ की. इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र किया. ट्रंप ने भारत के वोटर आईडी सिस्टम को अमेरिका में चुनावी नियमों को सख्त करने के अपने तर्क के समर्थन में पेश किया.
Edited By : Versha Singh|Updated: Aug 18, 2026 07:27
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फोटो- ANI
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव प्रणाली की सराहना की. ट्रंप ने कहा कि भारत में अमेरिका से ज्यादा सुरक्षित चुनाव होते हैं. उनके अनुसार भारत में इस बार (लोक सभा चुनाव में) 646 मिलियन मतदाताओं ने वोट दिया और हर एक के पास वैध फोटो पहचान पत्र होना अनिवार्य है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पूछा, ‘बिना वैध फोटो ID के अमेरिका में चुनाव कैसे हो सकते हैं?’ उन्होंने कहा कि अमेरिका को अब पहले से कहीं ज्यादा ‘Save America Act’ की जरूरत है.
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के 2024 लोकसभा चुनाव का आंकड़ा भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि उस चुनाव में करीब 64.6 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया था और 1% से भी कम लोगों ने मेल के जरिए वोट डाला. उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रत्येक मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र जरूरी था. इसी उदाहरण के आधार पर ट्रंप ने अमेरिका में चुनावी नियमों को और मजबूत करने की बात कही.
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क्या है ‘SAVE America Act’?
ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर ‘SAVE America Act’ को लेकर उनके अभियान से जुड़ा है. जिसका अर्थ अमेरिका को बचाना है. इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य अमेरिका में मतदाता पंजीकरण के दौरान नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और मतदान के समय फोटो पहचान पत्र की आवश्यकता को मजबूत करना है. ट्रंप लंबे समय से अमेरिकी चुनावों में मतदाता पहचान से जुड़े नियमों को सख्त करने की वकालत करते रहे हैं. बता दें कि इस कानून को लेकर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी हैं. समर्थकों का तर्क है कि इससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में गैर-नागरिकों के मतदान पर पहले से प्रतिबंध है और अतिरिक्त दस्तावेजों की अनिवार्यता से कुछ पात्र मतदाताओं के लिए मतदान मुश्किल हो सकता है.
बयान में कहा गया कि भारत और ब्राजील में मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ा गया है. इसके विपरीत, अमेरिका में नागरिकता से जुड़ी जानकारी के लिए बड़ी हद तक मतदाता की ओर से दी गई जानकारी पर निर्भरता है. जर्मनी और कनाडा में मतदान के लिए पेपर बैलेट का इस्तेमाल होता है. दावे में कहा गया है कि अमेरिका में बैलेट की सुरक्षा और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट और सख्त व्यवस्था नहीं है. वहीं, डेनमार्क और स्वीडन में मेल से मतदान की सुविधा सिर्फ उन लोगों के लिए होती है, जो मतदान केंद्र तक पहुंचकर वोट नहीं डाल सकते हैं. इन देशों में चुनाव खत्म होने के बाद पहुंचने वाले बैलेट को गिना नहीं जाता है, जबकि अमेरिका में ऐसा नहीं है.