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आखिर क्यों जानलेवा साबित हुई ‘ब्रॉड पीक’? एवलांच की चपेट में कैसे आए निर्मल पुर्जा, पढ़ें हादसे की इनसाइड स्टोरी

PoK की ब्रॉड पीक चोटी पर हुए दर्दनाक हादसे में मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का निधन हो गया. जानिए आखिर क्यों यह पहाड़ इतना जानलेवा साबित हुआ.

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मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की ब्रॉड पीक चोटी पर हिमस्खलन की चपेट में आने से निधन हो गया है. एवलांच के बाद उनके जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस में हलचल दिखने से उनके जीवित होने की उम्मीद बंधी थी. हालांकि बचाव टीम के पहुंचने तक उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. निर्मल पुर्जा बेहद अनुभवी ट्रैकर थे और उन्होंने महज 7 महीनों में 8 हजार मीटर से ऊंची 14 चोटियों को फतह करने का रिकॉर्ड बनाया था. समुद्र तल से 8,051 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक चोटी सीधे ‘डेथ जोन’ में आती है. यहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से एक-तिहाई से भी कम रह जाता है.

फॉल्स समिट का जानलेवा धोखा

ब्रॉड पीक की सबसे खतरनाक बात इसका ‘फॉल्स समिट’ है, जो पर्वतारोहियों को बुरी तरह भ्रमित करता है. घंटों की बेहद थकाऊ चढ़ाई के बाद ट्रैकर जब ऊपर पहुंचते हैं, तो उन्हें चोटी पर पहुंचने का भ्रम होता है. असली चोटी तक जाने के लिए वहां से चाकू की धार जैसी एक बेहद संकरी और खतरनाक पट्टी पार करनी पड़ती है. इस संकरे रास्ते के दोनों तरफ हजारों फीट गहरी ढलान है, जहां हवा का एक मामूली झोंका भी जानलेवा साबित हो सकता है. बहुत ज्यादा शारीरिक थकान के बाद इस संकरे रास्ते को पार करना किसी भी इंसान की हिम्मत तोड़ देता है.

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जानलेवा मौसम और फ्रॉस्टबाइट

कराकोरम पर्वतमाला में स्थित इस पहाड़ का मौसम पलक झपकते ही बेहद भयावह रूप ले लेता है. यहां 100 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बर्फानी हवाएं इंसान को उड़ा सकती हैं. इसके साथ ही तापमान माइनस 40 से माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है, जिससे हाथ-पैर जमने और फ्रॉस्टबाइट का खतरा बढ़ जाता है. अचानक आने वाले बर्फीले तूफान और एवलांच अक्सर चढ़ाई के लिए बिछाई गई रस्सियों को उखाड़ फेंकते हैं. ऐसे भयानक हालात में फंसे पर्वतारोहियों के लिए वापस लौटना या जान बचा पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है.

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First published on: Aug 02, 2026 06:55 AM

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About the Author

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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