---विज्ञापन---

दुनिया angle-right

रेफरेंडम, 2 खेमों में बंटा देश, मजहबी कट्टरपंथ… बांग्लादेश के नए PM तारिक रहमान के सामने क्या होंगी चुनौतियां?

Tarique Rahman Challenges: तारिक रहमान चुनाव जीतकर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन उनकी राह आसान नहीं होगी। क्योंकि उन्हें आंदोलन और हिंसा की आग में जल चुके देश को फिर से नया रास्ता दिखाना होगा। लोगों को एकजुट करके उनका भरोसा जीतकर तारिक काम करेंगे तो प्रचंड बहुमत फायदेमंद साबित होगा।

---विज्ञापन---

Challenges For Tarique Rahman: 18 साल के निर्वासन के बाद तारिक रहमान देश लौटे और उनके नेतृत्व में लड़े गए पहले ही चुनाव में बहुमत हासिल करके बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐसी आंधी उड़ाई कि जमात-ए-इस्लामी उड़कर दूर जा गिरी। अब तारिक रहमान देश के प्रधानमंत्री बनेंगे, लेकिन पद संभालने के बाद उन्हें भारी-भरकम चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

हालांकि तारिक की जिंदगी में पिछले 4 महीने में कई चीजें बहुत तेजी से हुई हैं, लेकिन अब उनके सामने बांग्लादेश की जनता के भरोसे को कायम रखने की चुनौती होगी। तारिक रहमान की BNP ने 299 में से 212 सीटों जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया। करीब 20 साल बाद पार्टी के हाथ यह सफलता लगी, लेकिन अगर तारिक चुनौतियों से नहीं निपट पाए तो बहुमत सिर्फ कागजी कहलाएगा।

---विज्ञापन---

इसलिए चुनाव जीतने से ज्यादा बड़ी परीक्षा तारिक को अब देनी होगी। बांग्लादेश की सत्ता संभालने के बाद टिके रहना भी एक चैलेंज है, क्योंकि पिछली सरकारों को यहां एक फैसले के कारण बहिष्कार, आंदोलन, हिंसा झेलनी पड़ी। इसलिए जनता का भरोसा जीतना होगा और कायम रखना होगा तो आइए जानते हैं कि इसके अलावा तारिक रहमान को और किन-किन चुनौतियों से निपटना होगा…

यह भी पढ़ें: मेडिकल छात्र से जमात के ‘अमीर’ तक का सफर… कौन हैं शफीकुर रहमान जिन्हें पछाड़कर तारिक बने बांग्लादेश के ‘कैप्टन’

---विज्ञापन---

2 खेमों में बंटे देश को एक करना होगा

बता दें कि तारिक रहमान के लिए सबसे पहली चुनौती 2 खेमों आवामी लीग और BNP में बंटे बांग्लादेश को एक करने की रहेगी। क्योंकि 1971 के बाद हुआ बांग्लादेश का यह बंटवारा राजनीतिक नहीं, बल्कि विचारधारा, इतिहास और पहचान को लेकर दोनों में सालों से चल रही खींचतान है. इसलिए जब शेख हसीना का विरोध शुरू हुआ तो आवामी लीग को निशाना बनाया गया। पार्टी के नेताओं और समर्थकों को टारगेट करके हमले किए गए। आज भी देश में एक बड़ा तबका आवामी लीग का समर्थक है। तारिक रहमान को इन समर्थकों को सहानुभूति दिखाकर शांत करना होगा।

अल्पसंख्यक हिंदू और इस्लामी कट्टरपंथी

तारिक रहमान के लिए दूसरा बड़ा चैलेंज इस्लामी कट्टरपंथियों की विचारधारा और उनके निशाने पर रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू हैं। तारिक की पार्टी BNP का जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन है. 1971 से जमात आरोपों से घिरी है और इसके नेताओं को सजा भी हुई थी। BNP पर इस्लामी ताकतों को साथ रखने के आरोप हैं। क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथियों के कारण बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हिंसा होती है। ऐसे में तारिक रहमान का फैसला करना होगा कि वे इस्लामी कट्टरपंथियों से दूर रहेंगे या उन्हें साथ रखेंगे, वैसे दोनों रास्ते जोखिम भरे हैं।

---विज्ञापन---

भारत के साथ संबंध और मजबूत करने हैं

तारिक रहमान के लिए तीसरा बड़ा चैलेंज भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना होगा। हालांकि भारत और बांग्लादेश के बीच बॉर्डर को लेकर और रक्षा समझौते हुए। लेकिन BNP अब तक भारत को लेकर सख्त रवैया अपनाती आई है। तारिक रहमान को भारत के साथ मौजूदा संबंधों को संतुलित रखना होगा। प्रधानमंत्री मोदी तारिक रहमान को बधाई देकर इसकी शुरुआत कर चुके हैं। तारिक की मां खालिदा जिया के निधन पर भी उन्होंने ट्वीट किया था। अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री जयशंकर को भेजा था। अगर तारिक भी भारत विरोधी रुख अपनाएंगे तो व्यापार, बॉर्डर मैनेजमेंट और क्षेत्रीय सहयोग पर असर पड़ेगा।

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश चुनाव: तारिक रहमान कल ले सकते हैं PM पद की शपथ, 10 प्वाइंट्स में जानिए कैसे BNP की आंधी में उड़ी ‘जमात’

---विज्ञापन---

विदेश नीति में संतुलन बनाना भी चैलेंज

तारिक रहमान के लिए एक चैलेंज देश की विदेश नीति को संतुलित बनाए रखना है। चीन बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए जरूरी है और भारत सबसे बड़ा सुरक्षा साझेदार है. अमेरिका से संबंध जरूरी हैं तो खाड़ी देश श्रमिकों के निर्वहन के लिए जरूरी हैं। अब पाकिस्तान भी लाइन में लग गया है, जिससे फायदा तो नहीं, लेकिन भारत विरोधी राजनीति के लिए मोहम्मद युनूस ने उसे साथ लगा लिया। तारिक को फैसला करना होगा कि वे कौन सा रास्ता चुनते हैं?

इनके अलावा तीसरा मोर्चा सेना और पुलिस के बीच तालमेल बिठाना चुनौती है. बेरोजगारी और आर्थिक संकट से निपटना भी चुनौती है, क्योंकि इससे बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। तारिक रहमान के लिए बांग्लादेश की राजनीति में खुद की पहचान कायम करना भी चैलेंज है। मीडिया और सिविल सोसाइटी भी चैलेंज भरा फैक्टर रहेगा।

---विज्ञापन---
First published on: Feb 14, 2026 06:27 AM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola